बुधवार, 17 सितंबर 2014

सूर्यकांत मिश्रा का आलेख - प्रकृति का आनंद माउन्ट आबू की वादियों में

प्रकृति का आनंद माउन्ट आबू की वादियों में


० पर्यटन के लिये सरकारों की गंभीरता दिख रही
पर्यटन अर्थात सैर सपाटे की दुनिया का रंग सभी की नजरों में एक से बढ़कर एक आकर्षण पैदा करने में लगी हुई है। प्राकृति नदी, पहाड़, झील, झरनों के अलावा अब प्रकृति को पीछे छोड़ते हुए वैज्ञानिक, अभियांत्रिकीय तकनीक का प्रयोग करते हुए बनाये जा रहे नयनाभिराम पर्यटन स्थल भी प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हे। प्रकृति से गलबहियां करने हर मनुष्य का हृदय धड़क उठता है। फुलों और विभिन्न पौधों से आच्छादित मनोरम स्थल को छोड़कर वापस लौटने का मन नहीं करता है। विशेष कर पहाड़ों का सुहाना दृश्य सैलानियों को गहरायी तक अपनी ओर खींच ले जाता है। शुद्ध और शीलत हवा मन के सारे क्लेशों को दूर कर आनंद की अनुभूति करा जाता है। पूरे विश्व में पर्यटकों की संख्या का अनुमान लगाने पर पता चलता है कि समय के साथ साथ मनुष्य के जीवन में पर्यटन का महत्व बढ़ता ही जा रहा है। यही कारण है कि पर्यटन मंत्रालय द्वारा देश में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये ‘स्वच्छ भारत’ नामक अभियान की शुरूआत की गयी है।


बढ़ायी जा रही सुविधाएं
उल्लेखनीय है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू दोनेां ही स्तर पर पर्यटकों के लिये पसंदीदा जगह है। भारतवर्ष में आंतरिक पर्यटन का विकास लगातार प्रगति पर देखा जा रहा है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ भारत’ अभियान शुरू किया जा चुका है। इस योजना के परिणाम भी सामने आने लगे है। विशेष कर पहाड़ी पर्यटन केंद्रों में पहले की तुलना में साफ सफाई अब बेहतर रूप में दिखाई पड़ रही है। इसी येाजना के चलते छत्तीस स्मारकों को ‘पायलट प्रोजेक्ट’ हेतु एएसआइ्र द्वारा चिह्नित किया गया है। दस स्मारकों को इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट द्वारा गोद लिया जा चुका है। वे ठोस कूड़ा प्रबंधन प्रणाली का आलोचनात्मक विश्लेषण करते हुए सुधारों हेतु प्रस्ताव पेश करेंगे। एसोसिएटेड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचम) तथा यस बैंक द्वारा किये गये अध्ययन के मुताबिक भारत पर्यटन क्षेत्र में वर्ष 2019 तक 94.5 बिलियन डॉलर का पूंजीगति निवेश प्राप्त कर लेगा। सन 2011 से 2019 के दौरान पर्यटन की विकास दर भी 2.2 प्रतिशत तक हो जाने की संभावना जतायी गयी है


सुरक्षा भी प्राथमिकता में
भारत वर्ष के कुछ राज्यों में आतंकवादी और नक्सली गतिविधियों ने पर्यटन उद्योग को झटका देने के साथ ही सुरक्षा उपायों पर भी सवालिया निशान लगाये है। पर्यटकों की सुरक्षा पर्यटन से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। पर्यटन स्वयं को जिस स्थान अथवा देश में जितना सुरक्षित महसूस करेगा, वही अधिक सैर सपाटे की योजना को अंतिम रूप प्रदान करेगा। पर्यटन क्षेत्रों में गोलियों और बमों की आवाज को देखते हुए भारत सरकार ने विभिन्न राज्यों के साथ पर्यटकों को सुरक्षा प्रदान करने के गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर चिंतन शुरू किया है। कुछ अति संवेदनशील पर्यटन क्षेत्रों में विशेष पर्यटक पुलिस बल के गठन पर भी गंभीरता के साथ विचार चल रहा है। कश्मीर में मां वैष्णवदेवी के दर्शनार्थियों को भयमुक्त यात्रा प्रदान करने और असम में कामाख्या देवी के दर्शनार्थ निकले यात्रियों के लिये अब देश के सुरक्षा संगठनों ने अच्छी से अच्छी सुरक्षित यात्रा के लिये कमर कस रखी है।

 
रेतीले राजस्थान में आध्यात्म का केंद्र माउन्ट आबू
रेगिस्तान के लिये पूरी दुनिया में अपनी अमिट पहचान बनाने वाले राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में विकसित माउन्ट आबू आध्यात्म का बड़ा केंद्र है। पहाड़ी पर स्थित केंद्र के साथ ही झीलों, नहरों तथा हरीभरी वादियो से आच्छादित माउन्ट आबू में वन्य जीवों से परिपूर्ण अभ्यारण्यों की भी कमी नहीं है। माउन्ट आबू की विशेषता यह है कि वह अपनी रमणियता से महज राजस्थान को ही गौरवान्वित नहीं कर रहा, वरन गुजरात को भी पहाड़ी का आनंद प्रदान कर रहा है। यह राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। जमीन से लगभग 4 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह हिल स्टेशन हिल ऑफ विस्डम के नाम से भी जाना जाता है। यही कारण है कि आध्यात्मिकता से संबंध रखने वाली धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने माउन्ट आबू को अपने केंद्र के रूप में चुना। प्रजापिता ब्रम्हकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मुख्यालय माउन्ट आबू में लाखों पर्यटक शांति की खोज में प्रतिवर्ष पहुंच रहे है। पर्यटकों को माउन्ट आबू स्थित पहाड़ी पर पहुंचाने वाला सड़क मार्ग भी अत्यंत ही नयनाभिराम है। गुजरात का प्रसिद्ध अंबिका जी का मंदिर भी बहुत ही पास होने से सैलानियों को आकर्षित कर रहा है।


नक्की झील दिखा रहा डूबते सूरज का अनोखा नजारा
माउन्ट आबू में ही 3 हजार 9 सौ 37 फीट के ऊंचाई पर स्थित नक्की झील सैलानियों के आकर्षक का केंद्र रहा है। उक्त झील ढाई किमी की सीमा में अद्भुत नजारा प्रस्तुत करते देखी जा सकती है। इसी नक्की झील में बोटिंग का आनंद उठाने सैलानी घंटों इंतजार करते दिखाई पड़ते है। झील के बीज बना आईलैंड भी पर्यटकों की नजरें चुराता प्रतीत होता है। झील के चारों ओर हरी भरी वादियां, खजूर के वृक्षों की लंबी कतारें, पहाड़ियों के बीच छल छल करती बह रही नक्की झील शायद अपने आप में अकेली झील हो, जो इतनी सुंदरता को समेटे अलग नजारा दिखा रही है। इसी झील के समीप सनसेट पाइंट सूर्यास्त को एक ऐसे दृश्य का रूप दे रहा है, जैसे कोई बॉल हवा में लटकी हो। सूर्यास्त के अद्भुत नजारें को प्रतिदिन हजारों लोग इस रूप में देखते है मानों सूर्य आसमान से गिरकर पाताल लोक में समा रहा हो। सूर्य की ढलती सुनहरी किरणें मानों समय को रोककर पर्वत श्रृंखलाओं पर स्वर्ण मुकुट पहना रही हो। ऐसे सुंदर आभास शायद कहीं और न हो।

 
जैन मंदिर, म्युजियम और वन्य जीव अभ्यारण का अनोखा संगम
जैन धर्मावलंबियों का प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर भी इसी माउन्ट आबू से लगा धार्मिक स्थल है। 11वीं से 13वीं शताब्दी में बना दिलवाड़ा का मंदिर मार्बल कलाकृति का बेजोड़ नमूना माना जा सकता है। यदि स्थापत्य कला की बेहतरीन मिसाल देखनी है तो एक बार दिलवाड़ा का जैन मंदिर का दर्शन जरूरी जान पड़ता है। यहां वास्तुकला की अद्भुत कारीगरी भी पर्यटकों को अपने पास से जल्दी नहीं हटने देती। दिलवाड़ा का जैन मंदिर अपने पांच अन्य समूह मंदिरों के कारण अधिक चर्चित है, जहां संगमरमर की महीन नक्कसी दर्शनीय है। इसी तरह राजभवन के विशाल परिसर में स्थापित म्युजियम पुरातात्विक संपदा का विशाल भंडारण रखने वाला प्रसिद्ध म्युजियम है। इसे आज से 52 वर्ष पूर्व सन 1962 में बनाया गया था। विशेष रूप से कांसे और पीलत के बर्तन और सजावटी सामानों पर की गयी नक्कासी भी देखते ही बनती है। क्षेत्र को अधिक रमणीय और पर्यटकों को आकर्षिक करने के साथ ही वन्य जीवों को उनके अनुकूल वातावरण प्रदान करने राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव अभ्यारण्य वर्ष 1960 में बनाया गया। 228 वर्ग किमी का विशाल मैदान वन्य जीवों प्राकृतिक वातावरण दे रहा है। वक्त अभ्यारण्य विशेष रूप से प्रवासी पक्षियों के लिये अलग स्थान रखता है। इसी प्रकार दिलवाड़ा के पास ऊंचाई पर स्थित बेलनाकार निरीक्षण स्थल से माउन्ट आबू का दृश्य और साल गांव निर्मित वॉच टॉवर से वन्य प्राणियों को बेहतर देखा जा सकता है। माउन्ट आबू की पहाड़ी पर भारतीय सेना का बेस कैम्प भी है। यहां प्रायः होते रहने वाले सैनिक अभ्यास और घुड़सवारी के करतब सैलानियों के लिये अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र बन रहे है।


                               प्रस्तुतकर्ता
                                       (डा. सूर्यकांत मिश्रा)
                                   जूनी हटरी, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

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