मंगलवार, 9 सितंबर 2014

सुशील यादव का व्यंग्य - स्टिंग की पाठशाला

स्टिंग की पाठशाला

आज हमारी पार्टी-मीटिंग ‘स्टिंग आपरेशन’ पर प्रकाश डालने के लिए आयोजित है।

देहात से जो चुनकर प्रतिनिधि आये हैं, हाथ उठायें , उनको आपरेशन के नाम से डरने की जरूरत नहीं है। हमें मालुम है ,आपरेशन के नाम पे अच्छे-अच्छो का पसीना निकल आता है। मगर भाइयों-बहनों स्टिंग आपरेशन वो आपरेशन है जिसमें चाक़ू-छूरी का इस्तेमाल बिलकुल नहीं होता। खून-खराबे की नौबत नहीं आती।

स्टिंग करने वाला आता है आपको बिना बेहोश किये, अपना काम कर जाता है। एक इसी आपरेशन में काम हो जाने के बाद मरीज बेहोश होते देखा गया है। उसपे सदमों का पहाड़ ,पार्टी निकासी का खतरा ,कहीं –कहीं जेल जाने की नौबत, किसी जगह देशद्रोह का इल्जाम सब कुछ ज़रा सी असावधानी में लग सकता है।

करियर तो समझो ,जिन्दगी भर के लिए चौपट हो जाती है।

भाइयों-और बहनों ,आप लोग नए-नये चुन के आये हैं ,सही मायने में आपके ,खाने –कमाने के दिन अब शुरू हो रहे हैं।

यहाँ भेदिये-भेडिये घात लगाए घूम रहे हैं। आप को अकेला पा के ,निरीह समझ के ,नासमझ जान के राजनीतिक हमला कर सकते हैं।

इस हमले के माने है आप का करियर दांव पर लग जाना। वो आपको घेरेंगे ,आपके घर के चक्कर लगायेंगे ,आपको गिफ्ट देने की शुरुआत करके मेल-जोल बढ़ाएंगे। इनसे बचना होगा ,इन्हें सिरे से पहचानना होगा।

हाँ... भाई साब, आप कुछ पूछना चाह रहे हैं ....?

देखिये ,यहाँ चुप रहने से नुकसान आप ही का है। अपनी शंकाओं का खुल कर निवारण कर लीजिये,बिना हिचक बिना दर-दहशत के जो चाहें पूछ सकते हैं, पूछने का कोई दाम नहीं लग रहा है । हाँ तो आप क्या पूछना चाह रहे हैं श्रीमान ...

-हमें कैसे पता चलेगा कि हमारे आस-पास दिखने वाला भेदिया या भेडिया है वो हमें घेर रहा है ?

- बहुत अच्छा प्रश्न किया है आपने। एकदम माकूल। पार्टी को आप जैसों की जरुरत है जो हमेशा चौंकाने और जागरुक रहें।

देखिये ! अमूमन देखने में, वो भी आम इंसान की तरह होते हैं ,मगर होते हैं बेहद धूर्त ,चालाक ,छटे हुए बदमाश। वे आपको अपनी वाक् –पटुता से प्रभावित करने की ताकत रखते हैं। तर्क क्षमता में महा-बली होते हैं| वे परिस्थितियों से घबराते नहीं।

आपकी तारीफों के नाजायज पुल पर, वे अपनी खटारा निकालने के माहिर होते हैं|

आपको फाइव स्टार की पार्टी ,बड़े-बड़े सेलिब्रिटी से मुलाकातें करवा के प्रभावित करने का काम फटाफट निपटा देते हैं।

घेरने में वे आयें तो सारी पृथ्वी को, साढे-तीन बार, अपनी बौद्धिक- क्षमता के महीन तार से लपेट दे|

आप लोग विधायकी- मैदान में पहली बार उतरे हैं| आजकल ‘कोइलिशन’ का ज़माना है। इसी का फैशन है। सरकारें आप की बदौलत बनती हैं -बिगड़ती हैं।

आप लोग, सच कहे तो मेढक हैं। इधर उछले तो इसकी सरकार उधर कूदे तो उसकी सरकार।

आपकी उछल-कूद को ज़माना बड़े गौर से देखा करता है। जनता भी आप पर निगाह रखती है। मगर जनता की निगाह को आप दर-किनार कर सकते हैं| देखिये ये सब बातें मैं ‘अन-कोट टर्म’ में कह रहा हूँ| इसे किसी के सामने कहने-दुहराने की जरुरत नहीं है। यानी मेरा मतलब है जनता की याददाश्त ज़रा कमजोर होती है। वो पांच साल आते-आते सब भूल जाती है। आपके, आया राम –गयाराम का अकाउंट डिलीट करके नए रूप में आपको फिर सजा के आपके क्षेत्र का दुल्हा बना देती है। तभी तो सब आया-गया वाले, बार-बार चुन कर आ जाते हैं।

खैर जाने दो ,तब की तब देख लेना। जो अपनी नय्या वक्त रहते सम्हाल ले वही सच्चा नाविक, जो घोड़े पर समय रहते एड लगा ले, वही सही घुड़सवार।

तो आपको स्टिंग –वालों से बचना है, ये बात गाँठ बाँध लीजिये।

किसी अजनबी या करीबी जाने –पहचाने वालों के साथ ढेर सारी बातें मत कहिये। अपनी मंशा खुल के मत बताइये कहते हैं बंद मुट्ठी लाख की, कस के बंद है तो करोड़ की भी हो सकती है| मेरा कहना है ,पैसों के लेन-देन और सौदेबाजी में जल्दी मत कीजिए।

अपने आला-कमान का खौफ बता कर, अपना कद और वजन बढ़ाइए। सौदा करने वाला आपका भाव बढ़ाएगा। अगर आप आश्वश्त हैं कि सौदा सही दिशा में जा रहा है तो फायदे के लिए आगे बढ़ने में कोई हर्ज नहीं है। पार्टी को फंड की दरकार है अगर आप इन तरीकों से पार्टी की भलाई सोच रहे हैं तो, पार्टी को एतराज नहीं बशर्ते आप पार्टी को नेक नीयत से कमाई का हिस्सा दें। नहीं तो पार्टी की सेवा में लगे निष्काम लगे रहिये|

आपको जानकारी दे दूँ ,आपकी पार्टी भी इसी, उधेड़बुन में दूसरों को तोड़ने की नीयत लिए हुए स्टिंग करवा रही है। परिणाम जल्द आने को है।

एक बात का और खुलासा कर दूँ ,आपकी पार्टी भी कभी आपकी नियत को ताड़ने के लिए आपका स्टिंग करवा ले तो अचरज में न पद जावें। हो सकता है इस अभियान में , आपको लेने के देने पड जाएँ।

दुविधा में कदापि ,न रहें .आलाकमान को हर छोटी-बड़ी हरकतों से वाकिफ रखें ,कहीं ऐसा न हो “दुविधा में दोनों गए ,माया मिली न राम” ......वाली बात न हो जाए।

 

सुशील यादव

२०२,श्रीम –सृष्ठी,अतालादारा

वडोदरा (गुज) ३९००१२

 

susyadav7@gmail.com

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