चन्द्रकुमार जैन की पांच प्रेरक कविताएँ

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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

की

पांच प्रेरक कविताएँ

 

हौसला

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काँटों से डरने वाले

फूल-फल पा नहीं सकते

तूफां से डरने वाले

साहिल पा नहीं सकते

स्वयं चूमती चरण मुसीबत

जांबाजों की इस दुनिया में

सफ़र से डरने वाले

मंज़िल पा नहीं सकते। 

 

सुबह

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दो रातों के बीच सुबह है

दोष न उसको देना साथी

दो सुबहों के बीच रात भी

एक ही जीवन में है आती !

आगत का स्वागत करना है

विगत क्लेश की करें विदाई,

शाम बिखरकर, सुबह जो खिलीं

कलियाँ कुछ कहतीं मुस्कातीं !

 

पूजा

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किसी के काम आ जाएँ

अगर ये हाथ तो पूजा हुई !

किसी के दर्द में दो पल हुए

गर साथ तो पूजा हुई !

माना कि प्रार्थना में होंठ

रोज़ खुलते हैं मगर,

आहत दिलों से हो गई

कुछ बात तो पूजा हुई !

 

ख्वाहिश

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क्यों यहाँ हर शख्स औरों में

किसी की खोज में है ?

ख़बर अपनी ही नहीं उसको

न ही वह होश में है !

पाँव के नीचे ज़मीं

चाहे न हो पर देखिए तो

आसमां की बुलंदी छूने की

ख़्वाहिश जोश में है !

 

ज़िंदगी

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मिली हुई दुनिया की दौलत

भूल न जाना माटी है !

हाथ न आई है जो अब तक

दौलत वही लुभाती है !

लेकिन इस खोने-पाने की

होड़-दौड़ भी अद्भुत है,

भूल गए हम जीना भी है

श्वांस भी आती-जाती है !

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प्राध्यापक, शासकीय दिग्विजय पीजी कालेज,

राजनांदगांव।

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2 टिप्पणियाँ "चन्द्रकुमार जैन की पांच प्रेरक कविताएँ"

  1. जैन साहब की सभी कविताये न केवल प्रेरणादायक है
    जिन्दगी से भी रूबरू करवाती है बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. उम्दा, दिलचस्प, प्रेरणादायक|

    उत्तर देंहटाएं

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