बुधवार, 17 सितंबर 2014

साहित्यकार सम्मान समारोह तथा गजल संग्रह ‘परत-दर-परत सच’ का लोकार्पण

गजल संग्रह ‘परत-दर-परत सच’ का लोकार्पण

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कवि एवं बाल साहित्यकार सन्तोष कुमार सिेंह की दो पुस्तकों का लोकार्पण एवं हिन्दी के तीन साहित्यकारों का सम्मान समारोह ‘आलोक पब्लिक स्कूल, पंचवटी कालौनी, मथुरा के सभागार में सम्पन्न हुआ।

अध्यक्ष पं. ललित कुमार वाजपेयी ‘उन्मुक्त’ एवं मुख्य अतिथि श्री विश्वभूषण मिश्र, एस.डी.एम. छाता द्वारा माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। स्व. श्री आलोक प्रताप सिंह के चित्र पर भी अतिथियों द्वारा माल्यार्पण किया तथा श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मुख्य अतिथि विश्वभूषण मिश्र, अध्यक्ष श्री ललित कुमार वाजपेयी, विशिष्ट अतिथिगण शायर महेन्द्र सक्सैना हुमा, डा. जगदीश व्योम, डा. कन्हैयालाल पाण्डेय, डा. प्रदीप गुप्त, ए.बी.एस.ए श्री निशेष जार ,डा. रामनिवास शर्मा अधीर एवं डा. अनिल गहलौत के कर कमलों से कवि सन्तोष कुमार सिंह के गजल संग्रह ‘ परत-दर-परत सच एवं बाल कविता संग्रह ‘ भारत की महान विभूतियाँ’ का लोकार्पण हुआ। सन्तोष कुमार सिंह की ये तीसवीं और इकत्तीसवीं पुस्तकें हैं।

गजल संग्रह पुस्तक की समीक्षा डा. रामनिवास शर्मा अधीर ने तथा बाल कविता संग्रह की समीक्षा डा. दिनेश पाठक शशि ने प्रस्तुत की। अतिथयों द्वारा अपने सम्बोधन में सन्तोष कुमार सिंह के साहित्य-सृजन की भूरि-भूरि प्रसंशा की और कहा इनके द्वारा सृजित हिन्दी साहित्य प्रौढ़ एवं बालक दोनों के लिए पठनीय है।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में आलोक स्मृति समिति, मथुरा द्वारा प्रतिवर्ष तीन साहित्यकारों का सम्मान किया जाता है। इस सम्मानित किए गए साहित्यकारों में दिल्ली के डा. इन्द्र सेंगर, मथुरा के डा. रमाशंकर पाण्डेय एवं डा. के. उमराव विवेकनिधि हैं। इनका सम्मान प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न, श्रीफल एवं शॉल उढ़ाकर बड़े ही मनोहारी वातावरण में किया गया।

कार्यक्रम के तृतीय चरण में उपस्थित कवियों ने कविता पाठ करके समारोह को ऊँचाइयों पर पहुँचाया। सैकड़ों साहित्यप्रेमी, कवियों की कवितायें सुनकर झूम उठे। मुख्य अतिथि ने काव्य पाठ करते हुए निम्न पंक्तियाँ कहीं -

कब तक यूँ लड़ना होगा

सब दुःस्वप्न सरीखा है

मैंने अनुभव से सीखा है।

 

डा. जगदीश व्योम ने हिन्दी के सम्मान ये पंक्तियाँ कहीं -

माँ भारती के भाल की श्रंगार है हिन्दी

हिन्दोस्तां के बाग की बहार है हिन्दी।

 

डा. इन्द्र सेंगर ने सस्वर गीत पढ़ कर श्रोताओं का मन मोह लिया-

तुमने मुझको कहाँ न देखा।

उदयाचल की कनक गगन किरन में

प्राची के रक्तिम अधरों में।

 

मशहूर शायर महेन्द्र सक्सैना ने पहले सन्तोष कुमार की लोकार्पित गजल संग्रह और उनकी गजलों की सराहना की तत्पश्चात अपनी गजलें सुनाकर लोगों का मन मोह लिया।

सुबह के वक्त हँसी? और उनके चेहरों पर,

जो बच्चे रात को भूखे सुलाए जाते हैं।

 

डा. अनिल गहलौत ने एक मुक्त और एक गजल सुनाकर वाहवाही लूटी। एक शेर देखें -

आँख को सपने, न कानों को कहानी लिख

आँख देखी लिख तनिक अब सच बयानी लिख

 

इनके अतिरिक्त पं. ललित कुमार वाजपेयी, डा. रमाशंकर पाण्डेय, डा. प्रदीप गुप्त, निशेष जार, डा. रामनिवास शर्मा अधीर, डा. कन्हैया लाल पाण्डेय, नीरज शास्त्री, डा. योगेश निर्भीक, अनुपम गौतम, जितेन्द्र विमल, अशोक अज्ञ, मोहन मोही, सन्तोष कुमार सिंह, मूलचन्द शर्मा, प्रमोद लवानियाँ, डा. के.उमराव विवेकनिधि, कैप्टेन एस.डी.राय, अंजीव अजुम, डा. धर्मराज, शैलेन्द्र कुलश्रेष्ठ, डा. सन्तशरण शर्मा, कैप्टेन डी.सी.राय, चन्द्रवीरसिंह, बाल कवि मनुज एवं लाखनसिंह ‘हलचल’ ने भी कविता पाठ किया जिसे सुनकर श्रोता झूम उठे।

इस अवसर पर सूर्यकान्त वर्मा,श्रीमती दयावती, डा. महेन्द्र सिंह, तेंजसिंह सेंगर, डा. जी.के.सिंह, नरेश अग्रवाल, विनय अग्रवाल, अजय आचार्य, धर्मवीरसिंह, घनश्यामंसिंह, देवीसिंह, दिनेश कुमार , जितेन्द्र सिंह सेंगर, बाबूलाल, ए.पी.सिंह, भगवती प्रसाद शर्मा, चन्दन साह, डा. डी.सी.वर्मा, पत्रकार भोलेश्वर उपमन्यु, एम.एम.शर्मा, स्कूल की अध्यापिकायें तथा पंचवटी कालौनी के गणमान्यनागरिक उपस्थित थे। संचालन अनुपम गौतम तथा धन्यवाद ज्ञापन समिति के अध्यक्ष जितेन्द्रसिंह सेंगर ने दिया

 

प्रस्तुति -

सन्तोष कुमार सिंह,

बी 45, मोतीकुंज एक्सटेंशन मथुरा।

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