सोमवार, 22 सितंबर 2014

प्रमोद यादव का व्यंग्य - छोड़ दो आँचल ज़माना क्या कहेगा

छोड़ दो आँचल ज़माना क्या कहेगा.../ प्रमोद यादव

 

‘ छि...छि...छि...क्या हो गया है इस देश के मर्दों को ? ‘ पत्नी ने नाक-भौं सिकोड़ते पतिदेव को चाय देते कहा.

‘ क्यों भई..ऐसा क्या हो गया की आज मुझे छोड़ सारे मर्दों को कोस रही हो ? ‘ पति बोले.

‘ गलतफहमी में न रहें..आपको भी कह रही हूँ.. सारे मर्द एक समान ही होते हैं...’

‘ अरे माजरा क्या है बताओगी भी ? पति ने “ हमसे क्या भूल हुई “ के अंदाज में पूछा.

‘ समझ नहीं आता आजकल आप रहते किस दुनिया में हैं ? सारी दुनिया की खोज-खबर रखने वाला खुद इस खबर बेखबर है.. आजकल समाचार नहीं देखते क्या ? ‘

‘ देखता हूँ भागवान..सब देखता हूँ ..पर बताओ तो सही कि किस खबर से तुम इतनी आंदोलित हो रही हो ? ‘

‘ अरे देखो न..आपके एम.पी. में इन दिनों क्या हो रहा है ? एक पूर्व महिला एम.पी. के आँचल से एक एम.एल.ए. महोदय ने अपना हाथ पोंछ लिया..’

‘ अच्छा.. अच्छा.. तो तुम “पोंछ लो आँचल.. ज़माना क्या कहेगा” वाली खबर से गरम हो रही हो ...’ पति ने हंसते हुए कहा.

‘ शुक्र है..मालूम तो है..अब बताईये..ये भी कोई बात हुई कि कोई किसी महिला के आँचल से जबरिया अपना थोबड़ा पोंछ ले..अरे पोंछना था तो रुमाल से पोंछ लेते..इसी काम के लिए तो रुमाल बना है..’

पति ने बात काटते कहा- ‘ हो सकता है..बेचारे के पास रुमाल न रहा हो..इमरजेंसी में ऐसा किया हो..’

‘ अजी कैसी इमरजेंसी..सब जानते हैं हम....वे तो कहते हैं – हमने भाभी के साथ मजाक किया..मजाक क्या यूं खुले मंच पर करते है ? ‘

‘ हाँ ..ठीक कहती हो...घर पर करना था.. जैसा सब करते हैं.. उससे गलती तो हुई.. इस बात की उसने माफ़ी भी मांग ली...अब भला एक शरीफ आदमी और क्या करे ? ‘ पति ने अपनी बात रखी.

‘ लेकिन माफ़ी माँगने से जो बेइज्जती हुई, रिश्तेदारी में जो मान=अपमान हुआ.. जो जग- हंसाई हुई वो तो नहीं सुधरेगा न..और एम.पी. साहिबा तो स्पष्ट कह रहीं हैं कि उनका उस महोदय से न देवर-भाभी का रिश्ता है..न ही कोई इस तरह का कुछ और..फिर मान न मान मैं तेरा मेहमान..उन्हें तो पता भी नहीं कि मजाक हो रहा है.. वो तो भला हो मीडियावालों का जिन्होनें इस दृश्य को कैद कर दिखाया.. और सारी दुनिया को आँचल के तार-तार होने का किस्सा बताया..’

पति झुंझलाया- ‘ तुम कहना क्या चाहती हो यार.. साफ़-साफ़ कहो..’

‘ अरे..सब कुछ तो साफ़ है...आँचल महिला की इज्जत है..आबरू है....उसे कोई खींचे-पकडे या पोंछे तो नारी-सशक्तीकरण के दौर में महिला चुप नहीं बैठेगी..वो आन्दोलन करेगी.. इन्साफ मांगेगी..महिला आयोग जायेगी...’

‘ तो गई तो थी ...क्या हुआ इससे ? बात को बतंगड़ बना रही वो साहिबा.’ पति ने रूखे शब्दों में कहा.

‘ कैसी बातें करते हो जी..उस नेता ने बत्तमीजी की..एक अबला नारी का पल्लू पकड़ उसे अपमानित किया..उसे तो कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए...’

‘ जैसे ? ‘ पति ने पूछा.

‘ उनकी विधायिकी ख़त्म कर देनी चाहिए..उनके क्षेत्र के लोगों को उनका पुतला दहन कर विरोध जताना चाहिए..’

‘ तो इससे क्या एम.पी. साहिबा की इज्जत ( जो चली गई ) बाइज्जत वापस आ जायेगी ? ’

‘ देखोजी..हम इतना जानते हैं..उसने पल्लू से मुंह पोंछ अच्छा काम नहीं किया..’

‘ अरे यार हमने भी तो कई बार ऐसा किया...तुम्हारे पल्लू से पोंछा है..पल्लू खिंचा है.. उसमें हँसते-हंसते कभी मुंह भी छिपाया है..’

पत्नी बिफरी- ‘ आपको शरम – वरम है भी या नहीं..हम आपकी पत्नी हैं..आपका तो हक़ बनता है..पर उसने तो.....’

‘ अच्छा एक बात बताओ..माफ़ी माँगने के बाद भी वो क्यों इस बात को ज्यादा तूल दे रही है ? कहीं सचमुच साहिबा को लालबत्ती की दरकार तो नहीं ? जैसा कि विधायक महोदय बयानबाजी कर रहें..‘

‘ वो मैं नहीं जानती कि लालबत्ती कैसे मिलती है..बस इतना जानती हूँ एम.एल.ए को “बत्ती” मिलनी चाहिए..’

‘ पर देगा कौन? उसकी तो कोई पार्टी भी नहीं.. और जिस साहिबा की पार्टी है,उसके कर्णधार तो..बोल तक नहीं रहे.. सपोर्ट देना तो दूर की बात..ऐसे में क्या गलत और क्या सही का फैसला कैसे हो ? ‘

‘ अरे..जब हम कह रहे कि गलत हुआ तो हुआ..’ पत्नी जजमेंट देते बोली.

‘ तो तुम्ही फैसला भी सुना दो ‘ पति ने अनुरोध भरे स्वर में कहा.

‘ हाँ..सुनाते हैं..हम सभी महिलाओं से अनुरोध करेंगे कि अब से सार्वजनिक कार्यक्रमों में वे साड़ी पहनकर ना जाएँ..सलवार-कुर्ती का अधकाधिक उपयोग करें.. ‘

पति ने बात काटते कहा- ‘ वो भी रेशमी... रेशमी सलवार-कुरता जाली का..ओल्ड इज गोल्ड..लेकिन तब भी कहीं दुपट्टे से किसी ने पोंछ दिया तब क्या हो ? ‘

‘ वो हम बाद में बताएँगे..पहले आप बाजार जाईये और तुरंत एक सलवार-कुर्ती हमारे नाप का ले आईये..कल हमें “ बहु बचाओ “ मीटिंग अटेंड करनी है.. हम इस आन्दोलन के प्रेसिडेंट हैं..’

‘ तो इस बातचीत का टोटल कन्क्लूजन यही है..आपको सलवार-कुर्ती चाहिए.. पर हम भी बताये देते हैं.. फबती तो तुम साडी में ही खूब हो..’

‘ सच ? ‘ पत्नी खुश होते..थोडा शरमाते हुए बोली.

‘ और नहीं तो क्या ? अरे बिना आँचल पकडे..खींचे..भला कोई कैसे प्यार जताए ? पल्लू तो प्यार जताने के लिए ही होता है..इसे भी महिला त्याग देगी तो कोई भला कैसे कहेगा- “ छोड़ दो आँचल ज़माना क्या कहेगा...”..प्यार तो पल्लू से ही शुरू होता है..’ इतना कहते पति ने पत्नी का पल्लू पकड़ उसे अपनी बाहों में जोर से खींच लिया.

‘ बदमाश कहीं के...’ पत्नी गिरफ्त से निकलने कसमसाते हुए बोली- ‘ और आपकी बातों का टोटल कन्क्लूजन यही रहता है...न दिन देखते न रात....कहाँ की बातें कहाँ ले आते हो..आपकी यही बातें तो सारे मर्दों से आपको जुदा रखती है..प्लीज अब छोड़ भी दो... देखो कोई आ रहा है...’

पति ने छोड़ तो दिया पर आँचल अभी भी उसके हाथ में था..पत्नी गुनगुनाते बोली- ‘ छोड़ दो आँचल....नहीं तो साहिबा को बता दूंगी..saadsaasaफिर तिल के ताड को आप ही सम्हालना..’ और आँचल छुड़ा वो खिलखिलाते हुए किचन की ओर भाग गई.

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प्रमोद यादव

गया नगर, दुर्ग , छत्तीसगढ़

3 blogger-facebook:

  1. उत्तम व्यंग है हमेशा की तरह मजेदार बधाई
    हो प्रमोदजी

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन व्यंग प्रमोद जी…

    उत्तर देंहटाएं

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