शुक्रवार, 31 अक्तूबर 2014

गुरु प्रसाद द्विवेदी का व्यंग्य -- अच्छा वक्ता विरुद्ध अच्छा वक्ता

अच्छा वक्ता विरुद्ध अच्छा वक्ता

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एक समय की बात है, एक शहर में ढेंचू और घेंचू नामक दो मित्र रहते थे| दोनों ही प्रखर वक्ता थे, लेकिन घेंचू की माली हालत बहुत ही खराब होती जा रही थी| घेंचू जब भी मुंह खोलता तो पिटता| उसके लगभग सभी अंग काम करना बंद कर दिए थे| पिटने कि वजह से| वहीं ढेंचू दिन दूना रात चौगुना तरक्की कर रहा था| एक दिन संयोग से ढेंचू और घेंचू दोनों को एक ही विषय पर व्याख्यान देने के लिए बुला लिया गया| सबसे पहले घेंचू ने बोलना शुरू किया और समा बाँध दिया लेकिन भाषण का अंत होते-होते लोगों ने जूते-चप्पल कि बौछार कर दिया| ढेंचू ने बीच बचाव करके मामले को शांत किया और ख़ुद बोलने लगा| सब लोगों ने बहुत ही आदर भाव से सुना| घेंचू जब घर पहुँचा तो काफ़ी दुखी था, उसने ढेंचू से पूछा, क्या कारण है? लोग मेरी बातों को तवज्जोह नहीं देते! बात खतम होते - होते लोग मुझपर टूट पड़ते है! यहां तक कि लोग मेरे द्वारा लिखे गये ब्लॉग्स को भी पसंद नहीं करते! मुझमें क्या कमी है? इस पर ढेंचू ने घेंचू को ये बातें बताई।

मित्र तुम बोलते अच्छा हो, हर पहलू पर बोलते हो लिखते हो, लेकिन बोलने और लिखने से पहले  सुनिश्चित कर लो बोलना किस पर है और क्या बोलना है? किसके पक्ष में बोलना है और किसके विपक्ष में बोलना है। बोलने से पहले आप ग्रुप बना लो एक जिसके पक्ष में बोलना है दूसरा जिसके विपक्ष में बोलना है। थोड़ा इतिहास उठा के देखो किस वर्ग विशेष के विपक्ष में बोलना है, ऐसे लोग जिनके विरोध में बोलने पर कोई हानि न हो, उन्हें गाली भी दे तो वे कुछ न बोलेंगे इग्नोर कर देंगे, बस ऐसे टाइप के लोगों को ही निशाना बनाओ, ये कुछ भी ख़राब करें उस पर तो खिचाई करो ही अगर ये कुछ अच्छा भी करें तो उसे भी शक के निगाह से देखो, उसकी भर्त्सना करो। इनकी हमेशा खिंचाई ही करो क्योंकि इनसे तो कोई खतरा है ही नहीं। अब बारी आती है ऐसे ग्रुप कि जिनके पक्ष में बोलना है, ये काफी खतरनाक ग्रुप वाले लोग हो सकते है,  इनकी तो प्रशंसा भी बहुत सोच समझ कर करनी चाहिए ये अपने आलोचकों को कभी नहीं बख्शते क्या मजाल है इनके बारे में कोई कुछ उलटा सीधा लिख-बोल दे। अगर ये कोई गलत काम भी करें तो भी इनकी तारीफ करो,  इनकी गलती को भी पॉजिटिव वे में लो, अगर पॉजिटिव वे लेने कि कोई सूरत ही न हो तो मौन हो जाओ, कुछ न बोलो धीरे-धीरे सब सामान्य हो जायेगा। यही बोलने का मूल मंत्र है।

ढेंचू कि ये बातें सुनकर घेंचू भाव विभोर हो गया और ढेंचू के द्वारा बताये गए हर एक बात को अक्षरशः पालन करने कि कसम खाई। घेंचू की ख्याति नई-नई उचाइया छूने लगी।


Guru Prasad Dwivedi
http://gpdwivedi.hpage.com

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