शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

राजकुमार झाँझरी का आलेख - हिंसा का वास्तु से संबंध

पूर्वोत्तर क्षेत्र को उग्रवाद से मुक्त कराने में समर्थ है वास्तु

राजकुमार झाँझरी

किसी जमाने में देश व जाति की उन्नति का सपना संजोये हाथों में बंदूकें थामने वाले संयुक्त मुक्ति वाहिनी, असम अर्थात अल्फा के उग्रवादी भी अब उग्रवाद का रास्ता त्याग कर आत्मसमर्पण करने के बाद अपना जीवन संवारने के लिए प्रकृति के विज्ञान (वास्तु विज्ञान) की शरण ले रहे हैं और वास्तु के नियमानुसार अपने घरों को सुधार कर सुख-शांति का जीवन बसर कर रहे हैं। जी हाँ, विगत कुछ सालों में मैंने कई पूर्व अल्फाईयों के घरों का वास्तु सुधरवाया है, जिसके बाद उनका जीवन अब काफी सुधार पर है। जब से मैं वास्तु से जुड़ा हूँ, मैंने महसूस किया है कि चूंकि पूर्वोत्तर के लोग पूरी तरह वास्तु के विपरीत गृह निर्माण करते हैं, इसीलिए पूर्वोत्तर के राज्य सैकड़ों वर्षों से अशांति, उग्रवाद, पिछड़ेपन से ग्रस्त हैं। पूर्वोत्तर और कश्मीर को छोड़ दें तो समूचे देश में 6-7 उग्रवादी संगठन हैं, जबकि एकमात्र असम में ही 26 उग्रवादी संगठन हैं, जिनकी गतिविधियों पर काबू पाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगाकर भी सफल नहीं हो पा रही है। मुझे जब इस बात का पूरा विश्वास हो गया कि असम सहित समूचे पूर्वांचल इलाके के लोगों द्वारा वास्तु के संपूर्ण विपरीत गृहनिर्माण के चलते उग्रवाद, अशांति और पिछड़ेपन से ग्रस्त है और जब तक पूर्वांचल के लोग वास्तु नियमानुसार गृह निर्माण नहीं करेंगे, तब तक यहाँ स्थाई शांति स्थापित नहीं होनी है, विकास नहीं होना है, तभी से मैंने पूर्वांचल में वास्तु के प्रचार-प्रसार को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और किसी भी प्रकार की फीस लिये बिना मैं गाँव-गाँव जाकर लोगों के घरों का वास्तु दोष दूर करने लगा। विगत १६-१७ सालों में मैं १४ हजार से ज्यादा परिवारों को नि:शुल्क वास्तु सलाह दे चुका हूँ। मुझे इस बात की खुशी है कि इनमें से जिन परिवारों ने मेरी सलाह के अनुसार अपने घरों का वास्तु दोष ठीक किया है, उनके जीवन में अकल्पनीय परिवर्तन आया है। इस दौरान कई पूर्व अल्फा उग्रवादियों ने भी मुझे अपने घर बुलाकर अपने घरों का वास्तु दिखवाया है और वास्तु दोष संशोधन के बाद उनके जीवन में भी काफी सुधार आया है।

कामरुप जिले के छयगाँव के रमजान अली कभी अल्फा के खूंखार उग्रवादी हुआ करते थे। म्यामाँ से असम आते हुए म्यामाँ सीमा पर पुलिस ने उन्हें हथियारों व काफी बड़ी रकम सहित गिरफ्तार कर लिया था। लगभग तीन सालों तक कैद रहने के बाद वे जब जमानत पर रिहा होकर आये तो विभिन्न समस्याओं से उन्हें रू-ब-रू होना पड़ा। एक रोज उन्होंने मुझे फोन कर अपने घर का वास्तु देखने के लिए बुलाया। उनके घर जाकर मैंने उन्हें वास्तु संबंधित दोषों को बताया तथा कीचन का स्थान व हैंडपंप बदलने को कहा। मेरे बताये अनुसार उन्होंने कीचन तो बदल दिया, लेकिन हैंडपंप को बदल नहीं पाये। कीचन बदलने के बाद से ही उनके घर में होने वाली फिजूलखर्ची काफी कम हो गयी तो चंद महीनों बाद उन्होंने मुझे पुन: अपने घर बुलाया। मैंने उन्हें हैंडपंप बदलने तथा कमरों में बदलाव करने की सलाह दी। मेरी सलाह के अनुसार घर में परिवर्तन करने के बाद आज उनका जीवन काफी संवर गया है। अब वे खुद भी लोगों को अपने घरों का वास्तु दोष दूर करने की सलाह देते हैं और जो भी वास्तु में रुचि दिखाते हैं, उन्हें मेरा मोबाईल नंबर देकर मुझे घर बुलाने के लिए कहते हैं।

बोको के पूर्व अल्फाई विष्णु दास का जीवन भी काफी कठिनाईयों से भरा था। एक रोज उन्होंने मुझे फोन कर कहा कि वे अपने परिवार से अलग होकर अपना अलग घर बनाना चाहते हैं, सो वास्तु के नियमानुसार कैसे, क्या बनाना है, इस बात की वे मुझसे सलाह लेना चाहते हैं। मैं उनके साथ उस स्थान पर गया, जहाँ वे घर बनाना चाहते थे। एक छोटे से टीन के शेड में ही वास्तु के अनुसार कहाँ, क्या रखना है, मैंने उन्हें नक्शा बनाकर दे दिया। आज वे अपने छोटे से घर में पत्नी व बच्चे के साथ सुख का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। घर में ही एक फॉर्म खोलकर वे सफलता पूर्वक अपना व्यवसाय चला रहे हैं।

छयगाँव के पास बांकाकाटा गाँव के सोबिन दास किसी जमाने में अल्फा के सेनापति परेश बरुवा के बॉडीगार्ड हुआ करते थे। उग्रवाद से मन ऊबने के बाद वे जंगलों से वापस लौट आये और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। जेल से वापस आने के बाद घर में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। विशेषकर उन्हें इतना गुस्सा आता था कि वे छोटी सी बात पर पत्नी से झगड़ बैठते थे, कभी-कभी तो उसकी पिटाई भी कर देते थे। एक रोज उन्होंने मुझे अपने घर का वास्तु देखने के लिए बुलाया। मैंने उन्हें तत्काल अपना बेडरुम बदलने को कहा क्योंकि जहाँ उनका बेडरुम बना था, उसमें सोने से मनुष्य का स्वभाव काफी उग्र हो जाता है। मेरी सलाह के अनुसार बेडरुम बदलने के बाद कुछ ही दिनों में उन्हें काफी मानसिक शांति महसूस हुई और पत्नी से झगड़ा आदि भी बंद हो गया। उन्होंने मुझे पुन: एक रोज अपने घर बुलाया और अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें इससे काफी फायदा हुआ है और मेरे बताये अनुसार अपने घर का वास्तु दोष दूर करना चाहते हैं। मैंने उन्हें अच्छी तरह से घर के वास्तु दोषों के बारे में बताया और उन्हें सुधारने को कहा। मेरे बताये अनुसार उन्होंने काफी कुछ परिवर्तन कर लिया है और आज उनका जीवन पहले की बनिस्बत काफी सुधर चुका है। छयगाँव के ही पवित्र दास भी किसी जमाने में अल्फा के कैडर हुआ करते थे। अल्फा से निकलकर आत्मसमर्पण करने के बाद उन्होंने छयगाँव में एक हॉर्डवेयर की दुकान शुरू की, लेकिन कुछ ही दिनों बाद दुकान बंद हो गयी। बाद में उन्होंने मुझे अपने घर का वास्तु देखने के लिए बुलवाया। मैंने उन्हें घर के वास्तु दोषों के बारे में बताया तथा एक नक्शा बनाकर दे दिया, जिसके अनुसार वास्तु दोषों को दूर करने की सलाह दी। घर का वास्तु दोष दूर करने के कुछ ही बाद उनकी परेशानियाँ दूर हो गयी और काफी उन्नति हुई। तब उन्होंने छयगाँव में एक होटल शुरु करने का मन बनाया। उन्होंने मुझे एक रोज फोन कर बुलाया और कहा कि वे होटल खोलना चाहते हैं और होटल में सबकुछ वास्तु के अनुसार ही करना चाहते हैं। मैंने उन्हें होटल में कहाँ, क्या रखना है आदि दर्शाते हुए एक नक्शा बनाकर दे दिया। आज उनकी होटल काफी प्रगति कर रही है। व्यावसायिक उन्नति के साथ ही अब वे अपना पक्का मकान बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं।

बोको के गोपाल कलिता किसी जमाने में अल्फा की कामरुप जिला इकाई के संगठन सचिव हुआ करते थे। एक एथलिट के रूप में भी वे काफी प्रसिद्ध हैं। अल्फा से मन ऊबने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया और बोको में अपना घर बनाकर रहने लगे। उन्होंने बोको मेडिकल के पास एक छोटी सी साईकिल की दुकान कर ली। लेकिन उनकी मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही थी। उन्होंने मुझे फोन कर अपने घर बुलवाया तो मैं उनके घर का वास्तु देखने के लिए गया। मैंने उन्हें घर में मौजूद वास्तु दोषों के साथ ही दुकान का भी वास्तु दोष ठीक करने को कहा। मेरी सलाह के अनुसार उन्होंने अपने घर का जितना संभव था, वास्तु दोष ठीक कर लिया। आज उनका जीवन काफी व्यवस्थित हो चुका है।

विगत सालों में लगभग ५० पूर्व अल्फा उग्रवादियों को वास्तु सलाह देने के बाद मैंने उनके जीवन में काफी सार्थक परिवर्तन देखा है। मुझे खुशी है कि कल तक जो उग्रवाद की राह पर चलकर देश और मानवता के विरुद्ध काम कर रहे थे, आज वे न सिर्फ ङ्क्षहसा का रास्ता छोड़कर देश की मुख्यधारा में सम्मिलित हो चुके हैं, अपितु मेहनत की कमाई कर औरों के लिए भी आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं। विगत सालों में गाँव-गाँव घूमकर मुझे जो अनुभव हुआ है, उसके आधार पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जब तक पूर्वांचल के लोग अपने गृह निर्माण का सिस्टम नहीं बदलेंगे, तब तक यहाँ किसी भी हालत में स्थाई शांति, उन्नति संभव नहीं है। कल तक बंदूकों से खेलने वाले उग्रवादियों का वास्तु के जरिये जीवन संवारने के बाद मेरा यह विश्वास और पुख्ता हो गया है। लोगों का वास्तु में विश्वास पैदा करने के लिए ही मैं पूरी तरह नि:शुल्क वास्तु सलाह देता हूँ क्योंकि जब तक पूर्वांचल के लोगों के गृह निर्माण का ढंग नहीं सुधरेगा, पूर्वांचल का ढर्रा भी नहीं सुधरेगा। पूर्व उग्रवादियों के जीवन में आये परिवर्तन के बाद उनकी भी वास्तु में पूरी तरह मन रम गया है और वे अपने संगी-साथियों, परिजनों को भी वास्तु के अनुसार गृहनिर्माण करने की सलाह दे रहे हैं। उनके काफी संगी-साथियों, परिजनों का भी मैं वास्तु संशोधन करवा चुका हूँ। मैं उन्हें कभी मजाक में ही पूछता हूँ कि क्या आपको मौका मिला तो पुन: जंगल को जाना पसंद करेंगे, तो उनका एक ही जवाब होता है कि जीवन के उस काले अध्याय को हम अब पूरी तरह भूल चुके हैं और जाना तो दूर सपने में भी याद करना नहीं चाहते।

केंद्र व राज्य सरकार अगर इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और पूर्वांचल के राज्यों में वास्तु के प्रचार-प्रसार की पहल करे तो न सिर्फ उग्रवाद की कंटीली राहों से वापस लौटे हजारों पूर्व उग्रवादियों का जीवन सुधर सकता है, अपितु समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र को हमेशा-हमेशा के लिए उग्रवाद के चंगुल से मुक्त कराया जा सकता है। जो काम भारत सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर तथा हजारों सैनिकों की तैनाती व काले कानून लागू कर भी नहीं सकी, वह काम वास्तु के जरिये आसानी से तथा निश्चित रूप से किया जा सकता है, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है

 

- राजकुमार झाँझरी

पत्रकार व नि:शुल्क वास्तु सलाहकार

संपादक, आगमन

संपादक, सम्मेलन समाचार

गुवाहाटी

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------