बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

विनय भारत का व्यंग्य - हम ईमान बेचते हैं

‘‘हम ईमान बेचते हैं''

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जी हाँ ,आपके कान गलत नहीं सुन रहे हैं यदि आपको विश्‍वास नहीं हैं तो आपकी कसम, हम वास्‍तव में बेचते हैं। क्‍या कहा... सुनाई नहीं दिया....... अरे! ईमान बेचते हैं और क्‍या....? अब भी नहीं सुन सकते तो तुम्‍हारा....सिर। हाँ अब सुन लिया.... तो बताइये क्‍या भाव लगाया है आपने हमारे ईमान का? क्‍या....अच्‍छा.....भाव...भाव जो आप चाहें.....विश्‍वास नहीं हो रहा हैं तो एक बार हमारे ऑफिस आइये.... आपका कोई काम लाईये..... फिर हम बताऐंगे कि हम सफेद कुर्ता पजामा यूँ ही नहीं पहनते। इसके नीचे मोटी तोंद और मोटे हाथ-पैर और मोटी चमडी ऐसे ही ईमानदारी से नहीं बनाई है... सब दो नम्‍बर की माया हैं... सिर पर सफेद टोपी पहनते हैं ताकि हमारा दिमाग कोई चुरा न ले। यदि चाहें तो आजमाकर देख लीजिये.... कसम से। झूठ नहीं बोलते जिंदगी में दो बार झूठ बोला था। पहली बार जब जनता के घर पर हाथ जोड़कर गये थे तब और दूसरी बार शपथ लेते समय। अजी...जनाब भगवान कौन है... कोई नहीं। उसकी कसम की कोई कीमत नहीं। हमें क्‍या करना है उस पत्‍थर से। और भई...फिर वह ईश्‍वर खुद बिक जाता हैं...मूर्ति के रूप में तो फिर हम अपना ईमान क्‍यों न बेचें। अब खरीदना हो तो आ जाईये..। क्‍या.... पता पूँछ रहे हो.... ऐसी बात है भाई मेरा एक घर तो है नहीं जैसे श्रीकृष्‍ण गीता में कहते हैं मैं ही नर हूँ और मैं ही नारायण। उसी प्रकार मैं कहता हूँ मैं ही नेता हूँ, मैं ही अधिकारी, मैं ईश्‍वर की तरह कण-कण में तो नहीं हूं लेकिन हाँ... हर सरकारी ऑफिस में अवश्‍य मिलूँगा। मैंने मीडिया से बचने हेतु हॉस्‍पीटल में तख्‍ती लटकाई हैं जिस पर लिख दिया .... यहाँ भ्रूण हत्‍या या जांच निषेध है... पर आप जानते हैं सबसे बड़ा रूपैया!

मेरे पास आईये। मैं बैंक में उपलब्‍ध हूँ। आप मुझे पोस्‍ट ऑफिस, पंचायत समिति, अस्‍पताल, शिक्षा विभाग आदि में खोज सकते हैं। प्रायः मेरा मुख्‍य विभाग राज्‍य स्‍तर तथा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बडे मंत्री नेताओं के निवास स्‍थान पर हैं, पर आप मुझे बिजली विभाग में अधिकांशतः प्राप्‍त कर सकते हैं।

आप निराश न हो... मुझे आपका ये निराश चेहरा पसंद नहीं। आप चाहें तो आपका चेहरा बदलवा दूँ। लेकिन आप अब परिचित हो गये हैं औरों से पाँच लाख लेता हूँ, आप दो ही दे दीजिये। सब चलता है..., अच्‍छा बाबा आपका चैक क्‍लीयर हो जाएगा.... आपकी परीक्षा पास ही समझिए.... आपकी नौकरी पक्‍की ..... अरे लड़का ही होगा... आपकी पेंशन चालू... आपका ट्रांसफर रूक जायेगा... नो चिन्‍ता नो फिकर आप जेल से छूट जायेंगे.... आप केस जीतेंगे.... टेंडर आपको ही मिलेगा... जज को छोडिये मेरा ही ससुर है.... उसकी ऐसी..... उसकी तैसी.... कौन क्‍या कर लेगा... चिन्‍ता छोडिये.... देख लेंगे ये ईनाम आपको ही मिलेगा.... मुबारक हो समझिये आप बी.पी.एल. में आ गए... कल के अखबार में आपकी दूसरी मैरिट... सत्रांक पूरे पचास ..... साहित्‍य पुरस्‍कार आपको मिलेगा.... बस दो पेटी लगेंगे.... हो जाएगा... हो जाएगा... हो जाएगा।

बस थक गये, क्‍या मेरे और कारनामे सुनना चाहेंगे.... कि ईमान के साथ मैं चारा..... राशन का गेहूँ....चीनी भी बेच देता हूँ। क्‍या आप अब तक ये जान पाए कि मैं हूँ कौन। चलिये छोडिये फिर कभी जानना... तब तक के लिए जय हिन्‍द।

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