मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

दीनदयाल शर्मा की हिंदी बाल कविताएं


फुलवारी

भांत-भंतीली खुशबू प्यारी
महकी फूलों की फुलवारी

तितली फूलों पर मंडराए
भौंरे अपनी राग सुनाए
पत्ता-पत्ता हुआ हरा है
धरा हो गई हरियल सारी।

सूरज के उगते ही देखो
चिडिय़ा चहके गीत सुनाए
ओस की बूूंदों से टकराकर
कण-कण को रश्मि चमकाए

मदमाती जब चली पवन तो
महक उठी है क्यारी-क्यारी।

गेंदा और गुलाब - चमेली
सबकी खुशबू है अलबेली
जिधर भी देखो मस्ती छाई
जीव-जगत के मन को भायी

अपनी मस्ती में हैं सारे
भोली शक्लें प्यारी-प्यारी।।

मोर

आसमान में बादल छाए
गड़-गड़-गड़-गड़ करते शोर
अपने पंखों को फैलाए
घूम-घूम कर नाचे मोर।

सजी है सुंदर कलंगी सिर पर
आँखें कजरारी चितचोर
रिमझिम-रिमझिम बरखा बरसे
सबके मन को भाता मोर।

पँखों में रंगीला चँदा
पिकोक पिको बोले पुरजोर
बरखा जब हो जाए बंद तो
नाचना बंद कर देता मोर।।

नीरोगी काया

स्वच्छ रखें हम सारे तन को
स्वच्छ रखें हम भीतरी मन को।

भोज से पहले हाथ धोएं हम,
आलस्य ना करें कभी हम।

साफ सफाई बहुत जरूरी,
इसको ना समझें मजबूरी।

विद्वानों ने भी फरमाया,
पहला सुख नीरोगी काया।।

लड़की

मैं हूँ  इक दुखियारी लड़की
दिनभर मिलती मुझको झिड़की
चौबीसों घण्टे करती काम
ना लेती आराम का नाम

जी करता है बाहर जाऊं
क्रिकेट खेलूं पतंग उड़ाऊं
घर से बाहर रोक लगी है
सबकी मुझ पर टोक लगी है

भैया दिनभर खेले बाहर
उसके कैसी मौज लगी है
पौचा मारूं कपड़े धोऊं
बर्तन मांजूं सुबह औ शाम

दिन और रात व्यस्त रहती मैं
खत्म नहीं होता कोई काम।
सबके लिए अर्पित हूँ  फिर भी
कहें सभी अभिशप्त है लड़की

सुनूं मैं जब-जब कड़वे बोल
मानो मुझ पर बिजली कड़की॥

मानवता 

आपस में हम सब हैं भाई
नहीं करें हम कभी लड़ाई।

प्रेम मधुरता का रस घोलें
इक दूजे से मीठा बोलें।

आओ मिलकर बात करें हम
आपस में बांटें खुशियां $गम।

बड़े लोग सब दिन और रातें
जाति-पांति की करते बातें।

हम सब बालक जात न जानें
सब जन को हम अपना मानें।

हम सबकी जाति मानवता
जात-पांत सब है दानवता।

भेदभाव की मेटें खाई
इसमें है हम सब की भलाई।।

मच्छरों की शामत

गाँव-शहर और गली-गली में
मच्छरों की भरमार है,
मच्छर क्यों नहीं होंगे यहां पर
कचरा बेशुमार है।

घर-घर फैला है मलेरिया
किसकी जिम्मेदारी है,
कोई भी लग जाए रोग
होती बड़ी बीमारी है।

गली-गली और गाँव-शहर में
रखेंगे हम रोज सफाई,
कूड़ेदान में डालें कचरा
मच्छरों की फिर शामत आई।।

चालाक चूहा

चूहा गया बाजार में
खूब खरीदे आम,
बिल्ली मिल गई रस्ते में
खून हो गया जाम।

कहां जाए, कहां छुपे
बहुत दूर थी दिल्ली,
दिल की धड़कन बढ़ गई,
पैण्ट हो गई ढीली।

हिम्मत करके चूहा बोला
बिल्ली मैडम आओ,
आम लाया आपके लिए,
खूब मजे से खाओ।

मूंछ हिलाकर बिल्ली बोली
मुझसे मत घबराओ
छोड़ टोकरा आम का
मेरे पास तो आओ।

चूहे ने मोबाइल चलाया
उसमें कुत्ता भौंका
दुम दबाकर बिल्ली दौड़ी
लग गया जैसे चौका॥

किताब

सुख-दु:ख में साथ,
निभाती रही किताब।

बुझे मन की बाती,
जलाती रही किताब।

जब कभी लगी प्यास,
बुझाती रही किताब।

मन जब हुआ उदास,
हँसाती रही किताब।

अंधेरे में भी राह,
दिखाती रही किताब।

अनगिनत खुशियां,
लुटाती रही किताब॥


मेरी न्यारी नानी

नानी मेरी न्यारी है
सब दुनिया से प्यारी है।

मुझको रोज पढ़ाती है
होमवर्क करवाती है।
समझ ना आए कोई पाठ तो
बिन मारे समझाती है।

मीठे जल की झारी है
नानी मेरी न्यारी है।

सोने से पहले यह मुझको
लोरी रोज सुनाती है
नींद न आए मुझे कभी तो
सिर मेरा सहलाती है।

फूलों की फुलवारी है
नानी मेरी न्यारी है।
मामा-मामी, बहन और भाई
सारे आज्ञाकारी है।

घर नानी का, घर जैसा है
रंग-रंगीली क्यारी है
घर की छत है नानाजी
तो नानी चारदीवारी है।

नानी मेरी न्यारी है
सब दुनिया से प्यारी है।।

ता-ता थैया

ता-ता थैया- ता-ता थैया
नदिया में चलती है नैया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
जंगल में चरती है गैया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
सड़कों पर चलता है पहिया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
राखी का बंधन है भैया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
पॉकेट मनी पांच रुपइया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
गीत सुरीला गाए सुरैया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
नहाती मिट्टी में गौरैया॥

ता-ता थैया- ता-ता थैया
हम जैसा न कोई गवैया॥

नया साल

नया साल लेकर आया है
खुशियों का उपहार,
इक-दूजे में खुशियां बांटें
समझे हम त्यौहार।

जाति-पाँति और भेदभाव से,
यह दिन कोसों दूर।
दिनभर बाँटें प्रेम-प्यार के,
संदेशे भरपूर।
नया साल देता है सबको,
खुशियों का अम्बार।

तजें बुराई भीतर की हम,
दृढ़ संकल्प हमारे
दु:ख-सुख को अपनाएं मिलकर,
सबके काज संवारें।
नया साल फैलाता हरदम,
ठण्डी मस्त बयार।

भला ही सोचें, करें भलाई
जग में होगा नाम
सज्जनों ने आजन्म किया है
हरदम अच्छा काम।
नया साल बतलाता हमको,
सज्जनता का सार।।

अंक गणित

अंग्रेजी,हिन्दी, सामाजिक
और विज्ञान समझ में आए
अंक गणित जब करने बैठूं
सारा दिमाग जाम हो जए।

सरल जोड़ भाग गुणा घटाओ
कर लेता हूँ  जैसे तैसे
घुमा घुमा कर पूछे कोई
उसको हल करूं मैं कैसे

इतना बड़ा हो गया फिर भी
अब अंक गणित में जीरो
बाकी सारे काम करूं झट
दुनिया माने मुझको हीरो।।

- दीनदयाल शर्मा
10/22 आर.एच.बी.कॉलोनी,
हनुमानगढ़ जं. 335512, राज.

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