बुधवार, 15 अक्तूबर 2014

गोवर्धन यादव का आलेख - आओ, ग्रिटिंग कार्ड बनाएँ

आओ, ग्रिटिंग कार्ड बनाएँ.

(गोवर्धन यादव)

बच्चों,

वर्ष का सबसे बडा त्योहार “दीपावली” का होता है. दीपावली पर लोग-बाग अपने परिचितों को/रिश्तेदारों को तरह-तरह के गिफ़्ट आईटम भेंट में देते हैं. इन गिफ़्ट आईटमों के अलावा वे एक-दूसरे को ग्रिटिंग कार्ड भेजकर शुभकामना संदेश भी भेजते हैं. एक कार्ड पाकर आपका चेहरा खिल उठता है. कार्ड में तरह-तरह के शुभकामना संदेश देखे जा सकते हैं, जिसे पढकर आप गदगद हो उठते हैं. सस्ते से सस्ता और महंगे से महंगा आकर्षक कार्ड आपको दुकानों पर मिल जाएंगे. जिसमें आपको अपनी ओर से कुछ लिखना नहीं है. सब कुछ छपा छपाया है. कार्ड के साथ लिफ़ाफ़े भी होते हैं, सिर्फ़ आपको अपने मित्र, रिश्तेदारों को अथवा अत्मीय व्यक्तियों का पता लिखकर,उचित मूल्य की डाक टिकिट लगाकर डाकघर के डिब्बे में डालना होता है. चंद दिनों में आपका कार्ड अपने गन्तव्य पर पहुँच जाता है.

आजकल मोबाईल फ़ोन के जरिए एस.एम.एस देने का प्रचलन कुछ ज्यादा ही बढ गया है. बाजार में सब कुछ रेडी है, बने बनाए फ़्रेज आपको मिल जाएंगे. बस उनकी कापी करिए और फ़ार्वर्ड कर दीजिए. काम खत्म. इतना सब कुछ होने के बावजूद उनमें मौलिकता नहीं होती. जो कुछ भी होता है,सब बनावटी होता है. उसमें आत्मीयता की कोई पुट नहीं होती. रिश्तों की वह गर्मजोशी नहीं होती, और न ही वह बात होती है जिसे आप अपने मन से प्रकट करना चाहते हैं, यह सब उसमें नहीं मिलेगा. बस एक ही रास्ता बचता है कि आप अपनी ओर से आकर्षक कार्ड बनाइए, अपने मन की उडान से उसमें रंग भरते जाइए. और जो कुछ भी आप लिखना चाहते हैं, लिख डालिए. इसमें किसी प्रसिद्ध कवि अथवा शायर की कोई खास पंक्तियां भी हो सकती हैं. जो कुछ भी आपने उस पर लिखा है, निश्चित ही वह सामने वाले का मन मोह लेगा.

क्या आपमें से, किसी के मन में यह विचार कभी प्रस्फ़ुटित हुआ है कि हमें भी ग्रिटिंग कार्ड बनाना चाहिए? सचमुच में यदि ऎसा विचार आपके मन में कौंधा होगा, तो हम उसका स्वागत करना चाहेंगे. यदि आप उसे बनाना चाहते हैं तो मैं अपने अनुभव आपसे साझा करने के लिए तैयार हूँ.

पोस्टकार्ड के साईज की तथा उसकी मोटाई की ड्राईंग शीट ले लीजिए. उस पर कोई खूबसूरत सी आकृति बनाइये तथा उसे आकर्षक रंगों से भर दीजिए. आप अपने मित्र को, पिता को, माँ को, अथवा किसी रिश्तेदार को शुभकामना संदेशा देना चाहते हैं, उसे उस पर कलात्मक ढंग से लिख डालिए. ऊपर दाएं कार्नर पर आप अपना पता तथा दिनांक डाल दीजिए. यदि आपके पास फ़ोन अथवा मोबाईल की सुविधा उपलब्ध है, तो उस पर जरुर लिख दीजिए. अब उसे पलटिए. कार्ड के दो बराबर हिस्से बनाइये और दायीं ओर, आप उनका सही-सही पता लिख दीजिए जिसे आप कार्ड भेजना चाहते हैं. कार्ड को डाकघर के डिब्बे में डालने से पूर्व उस पर कितने मूल्य की टिकिट चस्पा करनी चाहिए, पोस्ट आफ़िस के इन्क्वारी काउन्टर से इसकी जानकारी ले लीजिए. उचित मूल्य की डाक टिकिट चस्पा करने के बाद ही आप उसे पोस्ट कर सकते हैं.

यह कतई जरुरी नहीं है कि आप दीपावली पर ही कार्ड बनाएं. जीवन में ऎसे कई अवसर हमें प्राप्त होते रहते हैं, जब आप अपने रिश्तों को प्रगाढ करने के लिए ग्रिटिंग कार्ड का उपयोग कर सकते हैं

डाकघरों से बिकने वाले पोस्टकार्ड भी आप ग्रिटिंग कार्ड बनाने के लिए प्रयोग में ला सकते हैं, बशर्ते कि आपकॊ कार्ड पर किसी अन्य कागज पर बनी आकृति चस्पा नहीं करना है. यह नियम विरुद्ध हो जाएगा और ऎसा किए जाने पर, डाकघर पत्र पाने वाले से अथवा प्रेषक पर पेनाल्टी लगाकर दूनी राशि वसूल कर सकता है. अतः आपको अपनी ओर से पोस्टकार्ड पर कुछ भी चस्पा ( चिपकाना) नहीं करना है.. डाक विभाग पोस्टकार्ड पर पेन से लिखने अथवा कुछ चित्रकारी करने की छूट देता है. यदि आप उस पर रबर मोहर की छाप लगाते हैं अथवा पोस्टकार्ड को प्रिंटिग प्रेस से छपवा लेते हैं, ऎसी सूरत में भी उसे बैरंग मानकर पेनाल्टी वसूल की जाती है. प्रेस से छपवाना अथवा रबर मोहर को प्रयोग में लाने से उसे बिजीनेस-कार्ड की श्रेणी में रखा जाता है, जिस पर दो रुपयों की टिकिट लगती है, जबकि साधारण कार्ड मात्र पचास पैसे में मिल जाता है. अतः कार्ड को प्रयोग में लाने से पूर्व डाकपाल से इस बाबत जानकारियां प्राप्त कर लेना उचित होगा.

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ग्रिटिंग कार्ड बनाते हुए ग्रिटिंग कार्ड के दो नमूने

मैं विगत चार दशकों से पोस्टकार्ड पर ग्रिटिंग बना रहा हूँ. पहले दस-पांच बना लिया करता था, लेकिन जैसे-जैसे साहित्यिक मित्रों की संख्या बढती चली गई, इनकी संख्या में वृद्धि होती गई. इस समय मुझे लगभग तीन सौ कार्ड बनाने पड़ते हैं. यदि किसी कारणवश मित्रों तक यह कार्ड नहीं पहुँच पाता है तो बाकायदा वे मुझसे शिकायत करते हैं कि क्या बात है इस बार आपका कार्ड हमें प्राप्त नहीं हुआ. वर्ष में सिर्फ़ एक बार ही, वह भी दीपावली के पर्व पर, ग्रिटिंग कार्ड बनाता हूँ.

बाजार में उपलब्ध कार्ड खरीदकर भी मैं भिजवा सकता हूँ, पर मुझे इसमें आत्मिक संतुष्टि नहीं मिलती. हालांकि यह काम बडा श्रमसाध्य है. पहले तो कार्ड पर दीए की आकृति ट्रेस करना होता है. फ़िर दीपक में रंग भरना होता है. फ़िर उसे कलात्मक तरीके से सजाना होता है, जलती लौ बनानी पडती है, कार्ड पर अपना पता लिखना होता है और अंत में मित्रों के पते लिखने होते है. तब जाकर ये तैयार हो पाते हैं. तीन सौ कार्ड बनाने में मुझे लगभग एक माह का समय लग जाता है. जैसा कि मैंने पहले ही बता दिया है कि यह श्रमसाध्य कार्य है, इसमें बहुत समय खपाना होता है. इतना श्रम करने के बाद मुझे जो आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है, जिसका वर्णन मैं नहीं कर सकता.

बच्चों,

जरुरी नहीं है कि आप ढेर सारे कार्ड बनाएं, लेकिन बनाएं जरुर. इससे अनेक फ़ायदे भी है. एक तो आपकी लेखनी सुधरेगी, आप ड्राईंग में कुशलता प्राप्त कर सकते हैं, अपने रिश्तों को भावनात्मक ऊँचाइयां दे सकते हैं, अपने मन के उद्गार उसमें प्रकट कर सकते हैं. ऎसा करने से आपको अपने माता-पिता अथवा अभिभावकों का आशीर्वाद तो मिलेगा ही, साथ ही आपका उत्साहवर्धन भी होगा, मित्रता प्रगाढ होगी और सबसे अहम और बडी बात यह कि आपको एक विशेष संतुष्टि का भी अनुभव होगा, जिसकी कल्पना भी आपने नहीं की होगी.

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संपर्क:

103 कावेरी नगर ,छिन्दवाडा,म.प्र. ४८०००१
07162-246651,9424356400

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