शनिवार, 4 अक्तूबर 2014

चन्द्रकुमार जैन का आलेख- क्विट इंडिया से क्लीन इंडिया तक - बदलाव की नई बयार 

क्विट इंडिया से क्लीन इंडिया तक - बदलाव की नई बयार 

डॉ.चन्द्रकुमार जैन 

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मैं मीडिया से भी प्रार्थना करता हूं। ये सब, आज भी मैं कहता हूं, हिन्‍दुस्‍तान में कई नौजवान ऐसे हैं, कई संगठन ऐसे हैं, और हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में हैं, हजारों की तादाद में हैं। वे सफाई का काम, मैं प्रधानमंत्री बना, उससे पहले से कर रहे है। जरा उनको हम हिन्‍दुस्‍तान की जनता के सामने मीडिया के माध्‍यम से लाएं। छोटे-छोटे लोग जो सफाई का काम करते हैं, वो देश के सामने लाएं। हम सब मिलके एक एक प्रेरणा का वातावरण बनाएं। किसने किया, किसने नहीं किया, कैन जिम्‍मेवार है, कौन नहीं है, कौन गुनाहगार, इसमें इस बात को हम न घसीटें। 

महात्मा गांधी के शब्दों को पूरा करने का ये वक्त है। उस महापुरुष के शब्दों की पवित्रता देखिए, उस महापुरुष के शब्दों की ताकत को देखिए, उस महापुरुष के शब्दों के समर्पण को देखिए, क्या हमें वो प्रेरणा नहीं दे सकते हैं। चाहे मैं हूं या आप हों, हम सबके लिए महात्मा गांधी का क्विट इंडिया  नारा, ये सफलता जैसा हमें आनंद देती है, क्लीन इण्डिया भी हमें उतना ही आनंद देगी, उतना ही सुख देगी, उतना ही समृद्धि का रास्ता प्रशस्त करेगी, इस विश्वास के साथ इन महापुरुषों के शब्दों पर भरोसा करके हम चल पड़े हैं।

देश के 4041 छोटे बड़े शहरों और कस्बों को शौचालयों से युक्त बनाने के महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ भारत’ अभियान शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयन्ती और अंतर राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर जो यादगार भाषण दिया उसका अंश ऊपर उद्धरित किया गया है। बापू का सपना जैसे हम सबको आवाज़ दे रहा है कि हम गहराई से समझें कि साफ़-सफाई की राह पर चलकर ही दूसरी आज़ादी का स्वप्न साकार किया जा सकता है। 

गौरतलब है कि ‘स्वच्छ भारत’ अभियान 62009 करोड़ रुपये का होगा। इसमें 14623 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी बाकी राज्यों और अन्य साधनों से जुटाए जाएंगे। ‘स्वच्छ भारत’ की कल्पना के अनुरूप इस अभियान में बाद में गांवों में स्वच्छता के लिए जारी ‘निर्मल भारत योजना’ समाहित की जाएगी। इस योजना में 1828 करोड़ रुपये जन जागरुकता की मद में व्यय किए जाएंगे, ताकि स्वच्छता को लेकर देश के जनमानस में बदलाव आ सके। इस योजना में घरों में शौचालयों के साथ-साथ सामुदायिक शौचालयों के निर्माण भी कराए जाएंगे।

स्मरणीय है कि महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में शुरू होने वाले स्वच्छ भारत अभियान को महत्वपूर्ण पहल करार देते हुए बापू की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने कहा है कि यह महत्वाकांक्षी मुहिम बताती है कि देश की सोच किस ओर जा रही है। सुमित्रा जी ने कह  कि देश में सरकार के स्तर पर सफाई के अभियान की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान इंगित कर रहा है कि देश की सोच किस दिशा में जा रही है। बापू की 84 वर्षीय पोती ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान बड़े महत्व का काम है, जिसे अब सरकार भी पहचान रही है और खुद प्रधानमंत्री भी इस मुहिम में शामिल होने के लिये लोगों से आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ने के लिये देश की कोई भी स्त्री कभी ना नहीं कहेगी। यह बहुत अच्छी बात है कि हम इतने सालों बाद समझ रहे हैं कि हमारे लिये अपने परिवेश में स्वच्छता रखना जरूरी है।

सुमित्रा जी ने कहा कि मेरे दादा (महात्मा गांधी) स्वावलम्बन और स्वच्छता के लिये हमेशा सबको प्रेरित करते थे। मेरे परिवार में भी इस विषय में उन्हीं का अनुसरण किया जा रहा है। क्या देश में आजादी के बाद बनी सरकारों ने महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर स्वच्छता सरीखे महत्वपूर्ण क्षेत्र में बड़ा अभियान शुरू करने में देर कर दी, इस सवाल पर उन्होंने तपाक से कहा, अब यह चर्चा नहीं छिड़नी चाहिये कि पिछले 60 साल के दौरान (सरकारी स्तर पर) सफाई को एक अभियान के रूप में हाथ में लेने के बारे में किसी ने नहीं सोचा। मुझे भरोसा है कि स्वच्छ भारत अभियान के शुभारंभ के दो-चार साल बाद पूरे देश में लोगों को साफ-सफाई से रहने की आदत पड़ जायेगी।

इस बार गांधी जयंती पर केंद्र सरकार स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करके देशवासियों को सफाई का संदेश देना चाहती है। सुमित्रा जी ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, इस अभियान के आगाज को देर से हुई शुरूआत नहीं माना जाना चाहिये। यह बहुत अच्छा होगा कि देशवासी साफ-सफाई के बारे में मेरे दादा के जीवन मूल्यों पर वास्तव में अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और उनके दर्शन के मूल तत्व को समझेंगे। उधर प्रधानमंत्री जी ने आह्वान किया कि महात्‍मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी बल्कि एक स्‍वच्‍छ एवं विकसित देश की कल्‍पना की थी। महात्‍मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मां भारती को आजाद कराया। अब हमारा कर्तव्‍य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें। 

बहरहाल दो मत नहीं कि पूरे  देश को एक सूत्र में जोड़ने वाली जानदार मुहिम के रूप में इस मिशन ने वास्तव में समाज के हर वर्ग के दिलों में दस्तक दी है। यह संयोग मात्र नहीं है कि लोग इसे सिर आँखों में बिठा रहे हैं, इसके पीछे हम सब की ज़िंदगी के रोज़मर्रे के सुकून का ख़्वाब जुड़ा हुआ है। सफाई का सुख से नाता क्या और कैसा है इसे जानने और समझने से आगे बढ़ाकर ईमानदारी जीने के लिए के लिए अवसर देने वाला है यह स्वच्छ भारत अभियान। तभी तो मत-मतान्तर को पर रखकर लोग इसकी सफलता के आईने में अपना और पूरे देश के भविष्य की तस्वीर साफ़-साफ़ देख पा रहे हैं। आम जनता के साथ-साथ सामाजिक-धार्मिक मिशनों से लेकर नैगमिक संस्थाओं तक ने इसमें सहयोग और सहभागिता के लिए न सिर्फ शपथ ली है, बल्कि सहयोग देने के लिए सुनियोजित कार्यक्रम भी तैयार कर लिया है। 

इतना सब होने के बावजूद विशेषज्ञों की इस राय में दम है कि प्रभावी सीवरेज प्रणाली और गाँवों में पाइप लाइन के जरिये पानी की सप्लाई के बगैर केवल ऊपरी साफ़-सफाई से बात नहीं बनेगी। इसी तरह कचरा-प्रबंधन भी कोई मामूली समस्या नहीं है। उससे भी बड़ी चुनौती है लोगों की आदत में परिवर्तन लाना। लोग तो यहाँ तक लापरवाह हो जाते हैं कि सफाई के नाम पर उत्सव के मूड में कार्यक्रम स्थल पर ही कचरे का अम्बार छोड़ जाते हैं। अब क्या, सफाई के बाद या तो फिर से सफाई कराएं या फिर गंदगी क्यों हुई इसे लेकर सफाई देने वाले बयान जारी करें। लिहाज़ा, अपनी बला से और सब चलता है या कौन देखता है वाली अदाएं यानी आदतें, सफाई को हमारी ज़िंदगी की एक अहम आदत बनने नहीं देती हैं। दरअसल, हम में से ज़्यादातर लोगों पर नज़रअन्दाज़ी और जब तक चल सके चलने दो वाले दो गहरे रंग इस कदर चढ़े हुए हैं बगैर किसी बदलाव के हम बरसों तो क्या कभी-कभी पूरी ज़िंदगी भी यूं ही बिता ( गंवाँ ) सकते हैं। कमाल ये हैं कि फिर भी हमें कोई मलाल नहीं होता है। क्या इस पर कभी आपने कभी सोचा है ? अगर नहीं तो अभी भी देर नहीं हुई है।

मसला ये नहीं है कि मसले हल कौन करें 

मसला दरअसल ये है कि पहले पहल कौन करे 

ये पहल हम और आप यानी सब करें। स्वच्छ-स्वस्थ-सबल भारत हमारी नई पहचान बने। बात साफ़ है कि हम खुद साफ-सुथरे रहें और अपने परिवेश को भी साफ़-सुथरा बनाये रखें। अच्छी कोशिश में सच्ची भागीदारी के अधिकारी बनें। 

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प्राध्यापक, दिग्विजय कालेज,

राजनांदगांव। 

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