बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

चन्द्रकुमार जैन का दीपावली विशेष आलेख - आइये ! जलाएँ स्वच्छ-स्वस्थ-सबल भारत के संकल्प-दीप

आइये ! जलाएँ स्वच्छ-स्वस्थ-सबल भारत के संकल्प-दीप

डॉ.चन्द्रकुमार जैन 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण मुक्त दिवाली सुनिश्चित करने का आग्रह किया। यह भी आग्रह किया है कि स्कूलों और कॉलेजों के प्रधानाचार्य विद्यार्थियों को ध्वनि प्रदूषण के कुप्रभावों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में एक अभियान शुरू किया गया है, ताकि लोग अपने पैसे ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों में खर्च न करें। इससे भला कौन इंकार कर सकता है कि ये बातें वास्तव में काबिलेगौर हैं।

बेशक दिवाली खुशियों एवं रौशनी का त्यौहार है लेकिन दिवाली के दौरान छोड़े जाने वाले तेज आवाज के पटाखे पर्यावरण पर कहर बरपाने के अलावा जन स्वास्थ्य के लिये खतरे पैदा कर सकते हैं। दिवाली के दौरान पटाखों एवं आतिशबाजी के कारण दिल के दौरे, रक्त चाप, दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है और इसलिये दमा एवं दिल के मरीजों को खास तौर पर सावधानियां बरतनी चाहिये। 

चिकित्सकों की राय को जानें

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गौर कीजिए कि नौएडा स्थित मेट्रो हास्पीटल्स एंड हार्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक पद्मविभूषण डा.पुरूषोत्तम लाल बताते हैं कि पिछले कई सालों से यह देखा जा रहा है कि दिवाली के बाद अस्पताल आने वाले हृदय रोगों, दमा, नाक की एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या अमूमन दोगुनी हो जाती है। साथ ही जलने, आंख को गंभीर क्षति पहुंचने और कान का पर्दा फटने जैसी घटनायें भी बहुत होती हैं। डा. लाल ने आम लोगों को पटाखे नहीं छोड़ने अथवा धीमी आवाज वाले पटाखे छोड़ने की सलाह देते हुये कहा कि दिल और दमे के मरीजों को खास तौर पर पटाखों से पूरी तरह दूर रहना चाहिये। दिवाली के दौरान पटाखों के कारण वातावरण में आवाज का स्तर 15 डेसीबल बढ़ जाता है जिसके कारण श्रवण क्षमता प्रभावित होने, कान के पर्दे फटने, दिल के दौरे पड़ने, सिर दर्द, अनिद्रा और उच्च रक्तचाप जैसी समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं। 

तेज आवाज करने वाले पटाखों को चलाने का सबसे अधिक असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिल तथा सांस क मरीजों पर पड़ता है। दिवाली के दौरान छोड़े जाने वाले पटाखों के कारण वातावरण में हानिकारक गैसों तथा निलंबित कणों का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण फेफड़े, गले तथा नाक संबंधी गंभीर समस्यायें भी उत्पन्न होती हैं। 

अध्ययनों से पाया गया है कि दमा का संबंध हृदय रोगों एवं दिल के दौरे से भी है इसलिये दमा बढ़ने पर हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। तेज आवाज वाले पटाखे सामान्य पटाखों से अधिक खतरनाक हैं क्योंकि इनसे कान के पर्दे फटने, रक्तचाप बढ़ने और दिल के दौरे पड़ने की घटनायें बढ़ जाती हैं। हृदय रोगों की चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिये डा. बी सी राय राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित डा. लाल क अनुसार मनुष्य के लिए 60 डेसीबल की आवाज सामान्य होती है। आवाज के 10 डेसीबल अधिक तीव्र होने के कारण आवाज की तीव्रता दो दोगुनी हो जाती है, जिसका बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दिल तथा सांस के मरीजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

पटाखे की धूम ही नहीं है दिवाली

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भारतीय संस्कृति में दीपावली का त्योहार सबसे बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि बनवास पूरा करके राम जब अयोध्या लौटे थे तो उनके आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने खुशियां मनाईं थीं। इस दिन रोशनी से पूरा जग चमक उठा था। गीत, संगीत के साथ ही सभी लोगों में खुशी की लहर थी। बताया जाता है केि उस समय दिवाली बड़े ही अदब के साथ मनाई जाती थी। लेकिन आज के दौर में दिवाली का मतलब बम पटाखों के अलावा कुछ नहीं रहा। लोग खुशियों का इजहार बम पटाखें फोड़कर करते हैं। 

भारत में लोगों के मौत की पांचवीं वजह वायु प्रदूषण है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडी में पाया गया कि वायु प्रदूषण एक ऐसी पंचवी वजह है जिससे भारत में लोग मर जाते हैं। आंकड़ों की बात करें तो 2010 6 लाख 20,000 लोग वायु प्रदूषण के कारण मर गए। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वायु प्रदूषण अस्थमा, लंग केंसर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण है।इसलिए अगर हम दिवाली के दिन बम पटाखे कम जलाएं तो वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा लाखों लोगों की जान भी बच पाएगी। इसलिएं बम पटाखे कम जलाएं और खुद भी जिएं और जीनें दें।

दिवाली मनाएं निराले अंदाज़ से

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जरूरी नहीं है बम पटाखे जलाकर ही दिवाली मनाई जाए तो ही मजा है। देश में ही नहीं विदेश में भी रहने वाले कई भारतीय लोग दिवाली अलग तरह से मनाना पसंद करते हैं। कई लोग घर में मिठाइयां बनातें हैं, अच्छे पकवान बनाकर पड़ोसियों और अपने नाते रिश्तेदारों को घर पर बुलाकर जश्न मनाते हैं।  दिवाली पर जश्न मनाने के अलग तरीके भी हो सकते हैं। नाच कर जश्न मनाया जा सकता है। कहते हैं दिवाली और दशहरा पर बुराई का अंत हुआ था। इसलिए अपनी सारी बुरी आदतों को हमेशा के लिए बाय बाय कहा जा सकता है। अच्छी आदतों और लोगों से दोस्ती बढ़ाई जा सकती है।

घर को सजाएं। आस पड़ोस में गंदगी को भी साफ करें। साफ सुथरा होगा तो माहौल खुशियों से भरा महसूस होगा। इसके अलावा उस दिन घर के आस पास या बाग बगीचों में अपना एक पौधा बोएं। जो आगे जाकर वायु प्रदूषण को भी कम करेगा और कई स्वच्छ वातावरण बनाने में भी सहुलियित होगी। वायु प्रदूषण: दीवाली का मजा पटाखों की फोड़ में निहित है. और नतीजा जबरदस्त वायु प्रदूषण है. हमारे देश के पहले से ही प्रदूषित शहरों में इस दिन पर प्रदूषित अधिक हवा मिलता है. यह, बारी में, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी हवा प्रदूषित बीमारियों का कारण बनता है आदि सल्फर डाइऑक्साइड,कार्बन डाइऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड के रूप में की तरह हवा में पटाखे रिलीज की विषैली गैसों और प्रदूषण जलन. बुजुर्गों और बच्चों को प्रभावित कर रहे हैं. इसके अलावा जानवरों और पक्षियों. यह भी दीवाली के बाद रातों में कम दृश्यता की ओर जाता है जो धुंध बनाता है। 

शोर के रोमांच में जीवों की आफत

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शोर प्रदूषण: धूल और धुआं इतना ही नहीं, पटाखों की फोड़ समान रूप से हानिकारक है और बीमार बूढ़े लोग, अस्पतालों में रोगियों को प्रभावित जो ध्वनि प्रदूषण होता है. चरम मामलों में, ध्वनि प्रदूषण में कमी, उच्च रक्तचाप और अनिद्रा सुनने के लिए नेतृत्व कर सकते हैं. पशु और पक्षी भी बहुत बुरी तरह पटाखों की ऊँची आवाज़ से दीवाली के दौरान प्रभावित होते हैं। बाल श्रम: हम पटाखे जलने आनंद, हम पटाखों की सबसे कारखानों में मजदूरों के रूप में काम करने वाले छोटे बच्चों द्वारा तैयार कर रहे हैं कि यह नहीं भूलना चाहिए. ये पटाखे खतरनाक पदार्थों, रसायनों और एसिड का उपयोग कर तैयार कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में वे वे अपने पैरों, हाथों और आंखों को जलाने की वजह से हानिकारक धुएं को बीमार पड़ना, और वे एक बहुत ही कम वेतन पर बहुत जर्जर स्थिति में काम करते हैं। 

कचरे से करें तौबा तो बने बात

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ऊर्जा की खपत: बिजली की रोशनी और बल्ब का उपयोग करते हुए एक प्रवृत्ति दीवाली में इन दिनों है. केवल घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों, दुकानों, स्मारकों और सड़कों को भी बिजली की रोशनी, ज्यादा दीवाली से पहले और यहां तक ​​कि बाद से सजाया जाता है. परिणाम विद्युत ऊर्जा स्रोतों और बिजली की भारी राशि की खपत पर भारी बोझ है। चारों ओर कचरा: कैसे हम सिर्फ दिवाली के बाद हमारे इलाकों में सड़कों पर इकट्ठा कि कचरा और कूड़े के बारे में भूल सकता है? दीवाली के बाद जारी कचरा की मात्रा बहुत अधिक है. पिछले साल अकेले दिल्ली में, कचरे के लगभग 4,000 अतिरिक्त मीट्रिक टन जारी किए गए. मुंबई में राशि दोगुना. यह आग पटाखों की सल्फर, फास्फोरस, पोटेशियम क्लोरेट, और जले कागज भी शामिल है के रूप में यह कचरा खतरनाक है। तब जबकि पूरे देश में स्वच्छ भारत की मुहिम जागरूकता का नया इतिहास गढ़ने तैयार, आइये हम सब इस बार दिवाली में जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निर्वहन करेंगे। स्वच्छ-स्वस्थ-सबल भारत बनाने के लिए संकल्प दीप जलाएंगे। 

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प्राध्यापक,

शासकीय दिग्विजय पीजी कालेज,

राजनांदगांव

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