सुनील जाधव की लघुकथाएँ

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1.ताराबाई ..(लघु कहानी)

ताराबाई ने ओंठों को भीचते हुए सर पर पानी से भरे दो घड़े रखें । दूसरे हाथ से नौ महीने के गर्भ को सम्हालते हुए दो कोस दूर टांडे की राह पकड़ी ।कुआँ पीछे छुट रहा था । सूर्य की किरने कोड़े बरसा रहे थे। चलते-चलते पगडंडी पर अचानक वेदना शुरू हो गई । एक पल के लिए आँखों के सामने अँधेरा छा गया । ऐसे में उसके हृदय से एक ही आवाज निकली,
"याडि ये.....।"(माँ...)
उसे होश आया, तो पता चला; उसका गर्भ खाली हो चूका है । मिट्टी से लिपटा गोरा नवजात शिशु मुस्कुरा रहा है।पास ही दोनों घड़े पानी से अब भी भरे हुए है ।

2.

दीयें....(लघु कहानी)

शहर चायनीज दीयों में जल रही बाती से जगमगा रहा था । पट़ाकें-फुलझड़ियाँ चल रही थी । दीये की रौशनी में रंगोली से लिखा था 'दिवाली' । ऐसे में एक कुम्हार बचे हुए मिट्टी के दीयों को कंधे पर लादे अपने घर लौट रहा था । एक पल उसने दीयों को देखा । सांसे भरी और सोचा,

" काश, यहाँ मेरे बनायें हुए दीये जल रहे होते ।"

और सांसे छोड़ता हुआ अपने घर चला गया ।

3.

प्रमाणपत्र (लघु कहानी )

"मेरे पास सेट-नेट ,पीएचडी की उपाधियाँ हैं । कई शोध पत्रिकाओं में शोध आलेख प्रकाशित हैं । कई प्रमाणपत्र हैं । लीजिये देखिये आप !"

उस संस्था चालक ने अपना हाथ आगे बढ़ाया । मेरे हाथ को दायें हाथ से हटाते, बायें हाथ के अंगूठे को ऊँगली पर उछालते हुए कहा,

" मुझे इस प्रमाणपत्र की नहीं उस प्रमाणपत्र की आवश्यकता हैं ।"

4.

सभ्य..(लघु कहानी)

देश के राजा की बात सुनकर एक सभ्य बहुत प्रभावित हुआ । वह पुरे दिल से स्वच्छता अभियान में जुड़ गया । पिछड़े बस्ती में गंदगी साफ करने के बाद; एक गरीब दलित ने उसे अपने टूटे-फूटे घर में भोजन पर आमंत्रित किया । सभ्य ने मुस्कुरा कर कहा,

"मैं बाहर खाना नहीं खाता ।"

दलित बस्ती के बाहर उसे एक होटल में भोजन करते हुए पाया गया ।

5.

उस धर्म ( लघु कहानी)

एक नेता ने अपनी राजनीति गर्माने के लिए, अपने कुछ खास को बुलाकर कहा,

"चुनाव एक महिने बाद है । उस धर्म के चार-पाँच इंसानों का कत्ल कर दों । तो अपनी जीत तय हैं ।"

उसमें से एक खास ने ईसे धर्म के विरोध में बताकर प्रतिरोध किया । अगले दिन 'उस धर्म' की वेशभूषा में उसकी लाश पाई गई ।

6.

साहब के कपड़े..(लघु कहानी)

एक गरीब हिम्मत करके कपड़ों के स्टैंडर्ड दुकान में कपड़े खरीदने गया ।

"भाई साहब, मुझे कपड़े खरीदना हैं !"

भीड़ कम होने पर भी नौकर ने उसे रुकने के लिए कहा । वह बेचारा एक घंटे तक रुके रहा । जब उसकी बारी आयी, तब एक सूट पहने साहब आये । उसे देख कर नौकर ने उत्साह में कहा,

"साहब, आप को क्या चाहिए ?

और उसने साहब के पसंद के कपडे दिखाने शुरू कर दिये ।

7.

भिखारन ..(लघु कहानी)

स्टेशन के पादचारी पुल के सीढियों के नीचें एक भिखारन हाथ फैलायें बैठी थी । एक सज्जन को वहाँ से गुजरता देख; उसने कहा,

"ऐ बाबूजी ! भगवान के नाम पर एक रुपया दे दो।"

सज्जन उस और ध्यान न देकर जब आगे बढ़े, तब उसने कहा,

" जा , तेरा आज का दिन पूरा खराब हो । मुझ गरीब को देने के लिए तेरे पास एक रुपया नहीं ।"

और उसका पूरा दिन खराब गया

 

डॉ.सुनील जाधव,नांदेड

महाराष्ट्र,भारत।

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2 टिप्पणियाँ "सुनील जाधव की लघुकथाएँ"

  1. बेहतरीन रचनायें। साधुवाद स्वीकार करें।

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  2. शुक्रिया नैनवाल जी !

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रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

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