शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

पुस्तक समीक्षा - नन्हे सपने

(पुस्तक समीक्षा)

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बाल मन झाँकने वाली कविताएँ
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                                       ---त्रिलोकीनाथ तिवारी
हिंदी में अभी भी बाल-साहित्य विकासशील अवस्था में है । अन्य भाषाओँ में बाल-साहित्य को जो सम्मान मिला है वह अभी तक हिंदी में नहीं प्राप्त हुआ है जबकि मध्य-युग में सूरदास जैसे साधक-कवि ने अपनी रचनाओं का बहुलांश
बच्चों के लिए समर्पित किया है ।
जमशेदपुर में बाल-साहित्य लेखन की एक परंपरा रही है । यहाँ गंगा प्रसाद कौशल, रमाशंकर पांडे, डॉ बच्चन पाठक 'सलिल', और हरे राम राय 'हंस' जैसे कवियों ने बाल-साहित्य को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया ।
बाल -साहित्य की इसी परंपरा की एक सफल कड़ी "नन्हे सपने" है जिसमे पद्मा मिश्रा और मनोज 'आजिज़' जैसे नयी पीढ़ी के और डॉ बच्चन पाठक 'सलिल' जैसे पुरानी पीढ़ी के कवि एक साथ प्रकाशित हैं । प्रत्येक कवि की दस-दस कविताएँ इस संग्रह में संकलित हैं । इन कविताओं में बाल-मन झांकता है । वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक प्रियदर्शी ने इस पुस्तक की शुभाशंसा में कहा है कि तीनों ही कवियों ने बच्चों के मन को इतने जतन से पढ़ा है और इतनी प्यारी नन्ही कविताएँ लिखी हैं । पद्मा मिश्रा 'चंदा मामा' कविता में लिखती हैं--
उड़न खटोले पर बैठा वो

चंदा मामा आएगा
दूध-भात से भरी कटोरी
आकर तुझे खिलायेगा ।
इन पंक्तियों में सादगी भी है और बाल-सुलभ कल्पना भी जो बच्चों को प्रीत करेंगी ।
डॉ 'सलिल' 'मेरी गैया' कविता से बच्चों के बीच गो-माता के प्रति श्रद्धा के लिए प्रेरित करते हैं । पंक्तियाँ हैं--
मेरी गैया मेरी गैया
पापा कहते उसको मैया
गो-माता कहलाती है
मीठा दूध पिलाती है ।
यह सुखद है कि गंभीर रचनाओं के रचयिता भी बाल साहित्य की रचना कर रहे हैं और इसी कड़ी में हैं इस संग्रह के एक और कवि जो ग़ज़ल विधा में विशेष रूचि रखते हैं, मनोज 'आजिज़' । मनोज बच्चों को प्रकृति से जोड़कर लिखते हैं --
देख प्रकृति की हरियाली
दिल में ख़ुशी होती है
बड़ा आनंद आता है जब
गीत चिड़ियाँ गाती हैं |
बाल मनोविज्ञान की जानकारी रखने वाले लोगों को इन कविताओं में रूचि जगेगी क्योंकि ये कविताएँ बच्चों के प्रिय विषय पशु, पक्षी, ऋतु आदि से संबंधित हैं और इनमें प्रच्छन्न उपदेश का भी समावेश है । यह खेद की बात है कि आज का बाल मन अभिभावकों की अदूरदर्शिता से टी वी और कंप्यूटर में उलझ कर रह जाता है । उसके लिए स्वस्थ बाल सामग्री का अभाव भी प्रतीत होता है ।
प्रस्तुत पुस्तक एक सीमा तक इस अभाव की पूर्ति करेगी ।
समीक्ष्य पुस्तक---- नन्हे सपने
समीक्षक --- त्रिलोकीनाथ तिवारी
प्रकाशक-- सहयोग प्रकाशन, जमशेदपुर (२०१४)
मूल्य-- ७५ रु मात्र

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