मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

श्याम गुप्त का लघु आलेख - शिक्षा क्षेत्र में पतन के कारण

श्याम स्मृति- ---शिक्षा क्षेत्र में पतन के कारण ..

शिक्षा क्षेत्र में पतन आता जा रहा है, आज शिक्षा एक तप, साधना व परमार्थ न होकर व्यवसाय होगई है, स्कूल-कालेज, संस्थान खोलना अच्छा व लाभ का धंधा माना जा रहा है | जो व्यवसायिक कर्म परमार्थ हित कर्तव्य माने जाते थे वे प्रोफेशन हो गए हैं | यूं तो हर पतन का कारण मानव का अति-भौतिकता में लिप्तता होता है, शिक्षा में पतन के दो मूल कारण हैं |

एक--तमाम विद्यालय, चिकित्सा-विद्यालय, इन्जीनियरिंग व प्रवंधन आदि व्यवायिक संस्थान व्यक्तिगत हाथों में देदिए गए हैं और उस विषय विशेष के प्रोफेशनल्स से अन्य व्यक्तियों द्वारा चलाये जा रहे हैं जिनमें सिर्फ कमाने-खाने का भाव रहता है |

दो--- अधिकाँश व्यक्तिगत संस्थाएं ...सेवानिवृत्त व्यक्तियों को प्रोफेशनल्स को नियोजित करती हैं क्योंकि कम सेलेरी में ही काम चलजाता है| शिक्षा जैसे कर्म के लिए पूरी ऊर्जा, इच्छा-शक्ति, अनुप्राणित मन, प्राण व ज्ञान चाहिए | सेवानिवृत्त व्यक्ति थका-थकाया होता है वह बस समय काटने को नियोजन चाहता है बोनस में पैसे भी कमा लिए जायं तो बुरा क्या है | आखिर सेवानिवृत्ति तक कितना दम-ख़म, कितना ज्ञान व कितनी कर्म इच्छा-शक्ति बच रहती है, अन्यथा उसे सेवा से निवृत्त किया ही क्यों जाता | इस प्रथके कारण, जो अभी कुछ वर्षों से ही काफी प्रचलित हुई है मरते दम तक और कमा लिया जाये की लालच पूर्ण इच्छा के साथ, तमाम नव-युवाओं के कमाने के अधिकार का भी हनन होता है और उनके भविष्य की हानि एवं युवा ऊर्जा का प्रयोग में न आना भटकाव का कारण बन सकता है |

क्या निश्चय ही यह विचार का विषय नहीं है |

             ---डा श्याम गुप्त , के-३४८, आशियाना, लखनऊ

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  1. privatization dhan ke prabhav se yahi sab hota hai hum vybastha par niyntran nahi rakh paate hai

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    1. धन्यवाद ---सच कहा कमलेश जी ...धन आधारित सोच व व्यवस्था ही सब द्वंद्वों की जड़ है ....एक बार पैर जमा लेने के बाद हम सभी नियंत्रण खो देते हैं.....

      हटाएं

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