बुधवार, 29 अक्तूबर 2014

राजेन्द्र सारथी का व्यंग्य -- बुलेट ट्रेन

बुलेट ट्रेन

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अभी हाल ही में केन्द्रीय सरकार ने घोषणा की है कि देश में जल्दी ही बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। यह खबर बहुत से परिवारों के लिए बिलकुल ऐसी है जैसे उन परिवार के राजदुलारों को नई दुल्हन की सौगात मिलने वाली हो। बुलेट ट्रेन मेल ट्रेनों का लेटेस्ट वर्जन है। नये वर्जन को हर राजदुलारा इस्तेमाल करना चाहता है। यह बुलेट ट्रेन नजाकत-नफासत से भरपूर, साज-सज्जा में अनूठी, इठलाती-बलखाती अति तीव्र गति वाली और अन्य मेल ट्रेनों से अधिक सुविधा देने वाली होगी। 
नवेली दुल्हन भी तो मनमोहने वाली, सुख देने वाली, इतर-फुलेल की गंध महकाने वाली और छम-छम पायल बजाकर घर को सुमधुर  करने वाली होती है। राजदुलारों के लिए जैसे बुलेट ट्रेन एक वस्तु है, एक सुविधा है, वैसे ही उनके लिए दुल्हन भी एक वस्तु होती है, एक सुविधा होती है। इसलिए हर राजदुलारे के मन में दुल्हन का भी नया वर्जन पाने का सपना हर समय पलता रहता है। ससुराल पक्ष वाले यदि पुराने वर्जन वाली दुल्हन को ही इस्तेमाल करने के लिए इन राजदुलारों को अन्य भौतिक वस्तुओं के लेटेस्ट वर्जन भेंट करते रहते हैं तो वे पुरानी दुल्हन को घर की सफाई, भजन-पूजा, रसोई और कभी-कभी वैकल्पिक सुविधा के रूप में इस्तेमाल करके मर्यादा को कायम रखे रहते हैं। ऐसे में वे अन्य तरीकों से दुल्हन के ‘यूज एंड थ्रो’ वाले नये-नयेे वर्जन इस्तेमाल करते रहते हैं।
चूंकि इन परिवारों के नौनिहालों को हर चीज का लेटेस्ट वर्जन चाहिए होता है। इसलिए उनके लिए बुलेट ट्रेन की खबर निश्चित ही सुख की अनुभूति कराने वाली है। और दुल्हन के नये वर्जन को पाने की सुस्त पड़ी इच्छा को जगाने वाली है। ये राजदुलारे साम-दाम-दंड-भेद के जरिए हर चीज का नया वर्जन प्राप्त कर लेते हैं। ओल्ड वर्जन की दुल्हन की जगह नये वर्जन की दुल्हन प्राप्त करना किसी सामान्य आदमी के लिए कठिन काम होगा, पर इन राजदुलारों के लिए नहीं। ये ओल्ड वर्जन की दुल्हन को विदा करने में नाइंटी परसेंट कामयाब रहते हैं और फिर आराम से लेटेस्ट कार, कैमरा, मोबाइल, बूट, चश्मों के नये वर्जन की तरह नये वर्जन की दुल्हन प्राप्त कर लेते हैं। 
अब आप राष्ट्रीय दृष्टिकोण से आम नागरिक की तरह सोचिये। जिस तरह आप किसी माल या आधुनिक गगनचुंबी इमारत के आगे खड़े होकर गर्व का अनुभव करते हैं कि दुनिया में सबसे अधिक गरीब आबादी वाले हमारे देश ने भी तरक्की की है और वह लंदन, पेरिस के मुकाबले आधुनिकता के मामले में सिर उठाए खड़ा है। उसी प्रकार आप बुलेट ट्रेन चलाये जाने की खबर पर गर्वित हो सकते हैं। खुश हो सकते हैं। अपने को सुखी महसूस कर सकते हैं कि हमारे भ्रष्टाचार में डूबे भारत में भी अभी इतना दम है कि वह दुनिया की सबसे अधिक गति की बुलेट ट्रेन चलाकर अपने नागरिकों को सुखी कर सकता है। इसीलिए बुलेट ट्रेन चलाये जाने की यह खबर सबके लिए निश्चित ही सुख देने वाली है।
बुलेट ट्रेन चल जाएगी तो निश्चित ही उससे देश के नागरिकों को फायदा होगा। अमीर उसमें यात्रा कर सकेंगे। गरीब  प्लेटफार्म टिकट लेकर स्टेशन पर जाकर बुलेट ट्रेन को छूकर और अन्दर झाँककर बुलेट ट्रेन को देख आनंदित हो सकेंगे, जिससे वे उसकी भव्यता का लोगों से जिक्र कर गर्व का अनुभव कर सकें। सुख प्राप्त कर सकें। हां भिखारियों को बुलेट ट्रेन छूने और अंदर जाकर उसकी भव्यता देखने की इजाजत नहीं होगी। वे सिर्फ दौड़ती हुई बुलेट ट्रेन को ही देख सकेंगे। हां यदि उनकी इच्छा ज्यादा ही बलवती हो तो वे चलती बुलेट ट्रेन के आगे कूदकर गोलोकधाम की यात्रा पर अवश्य जा सकते हैं। गोलोकधाम यात्रा पर वैसे कोई भी जा सकता है, इसके लिए सिर्फ उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि वे अपनी इस योजना का पूर्वाभास किसी को न होने दे, वर्ना बजाय गोलोकधाम की यात्रा के उन्हें जेल की यात्रा करनी पड़ेगी।
सोचिये कितना भव्य और मनमोहक नजारा होगा। सतरंगी परिधान पहने ड्रेगन-सुन्दरी रूपी यह बुलेट ट्रेन मधुर मिलन के लिए आतुर कामिनी के कर्णप्रिय स्वर में पुकारिती, बलखाती और फर्राटा भरती हुई पटरियों से गुजरेगी। पटरियों के दोनों ओर दर्शर्नार्थी पुलकित और कौतुक भाव से खड़े होंगे। इनमें वे लोग भी होंगे जो गोलोकधाम की यात्रा पर जाने की मंशा रखते़ होंगे। मेरा मानना है कि इस मनोरम ट्रेन को देखने के बाद गोलोकधाम जाने की इच्छा रखने वाले लोग अपना कार्यक्रम स्थगित कर देंगे, उनके हृदय में इच्छा जागेगी कि इस मनोरम ट्रेन को तो प्रतिदिन इसी तरह निहारा जाये।
राजधानी और जिन नगरों से होकर यह गुजरेगी वहां के वाशिंदों को बुलेट ट्रेन का दृश्यावलोकन सुख, स्पर्श सुख, ध्वनि श्रवण सुख और यात्रा सुख का सौभाग्य सबसे पहले मिलेगा।  बुलेट ट्रेन की सीटी आलसी लोगों को बार-बार आलाप लेकर जगायेगी कि जागो लोगों सुख के दिन आ गये। कुछ दिन बात तो देश के चारों कौनों में बुलेट ट्रेन दौड़ा करेंगी। देश में सुख ही सुख बरसेगा। 
अब गरीब को पूरी स्वतंत्रता होगी कि वह अपनी गरीबी का स्वर्गिक आनंद उठाये। इसी प्रकार अमीरों को भी पूरी स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी अमीरी का पूरा नैसर्गिक आनंद उठायें।

 


-राजेन्द्र सारथी

परिचय: 

राजेन्द्र सारथी
जन्म : 01 सितंबर, 1949, प्रकाशित कृतियां : ‘कहीं कुछ जल रहा है!’ ‘तोड़ दो अपनी उदासी’ (कविता संग्रह) और ‘परिसंवाद’ (हरियाणा राज्य के 20 साहित्यकारों के साक्षात्कार)। ‘कहीं कुछ जल रहा है!’ वर्ष 2008-09 में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत। ‘मानुष गाथा शतक’
(ब्रजभाषा में मानव जन्म से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा 100 छंदों में) प्रकाशनाधीन.

वर्तमान स्थायी पता : राजनगर, शाहदरा, आगरा-28206

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