बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

प्रमोद यादव का व्यंग्य - एक ये भी दीवाली है…

एक ये भी दीवाली है.. / प्रमोद यादव

‘ देखोजी..अब बहुत हो गया...साफ़-सफाई की बातें सुन-सुन मैं बोर हो गई..माना कि पी.एम. साहब ने अच्छी शुरुआत की लेकिन इस अभियान के लिए उन्हें किसी और का झाड़ू नहीं वापरना था..उन बेचारों ने तो देश में कुछ और ही साफ़-सफाई-अभियान का नारा भर लगाया था...थोड़े वे कमजोर क्या हुए,उनकी झाड़ू ही छीन लिए..ये तो “ निर्बल से लड़ाई बलवान की ” जैसे हो गया..

‘ तुम औरतों को तो झाड़ू के सिवा कुछ सूझता ही नहीं यार....जब देखो तब झाड़ू ही पीटती रहती हो..और फिर पी.एम.साहब ने तुम्हें कौन सा झाड़ू लगाने कहा है...उनकी दुश्मनी तो हम नौकरीपेशा वालों से है..’ पति ने विचलित होते कहा.

‘ हाँ..हमें तो शौक होता है झाड़ू लगाने का..आप लोग गन्दगी फैलाओ और हम घूम-घूम कर साफ़ करती रहें..औरतों की तो जैसे यही नियति है..पर भगवान् के घर देर है,अंध्रेर नहीं..उसने सुन ली....पिछले पंद्रह दिनों से आप झाड़ू लिए घूम रहे हैं..कभी दफ्तर तो कभी मोहल्ला ..कभी गार्डन तो कभी तालाब....क्यों ? अब मजा आ रहा है कि नहीं ? ‘ पत्नी मजाक उड़ाते बोली.

पति ने पलटवार करते कहा -‘ हाँ..हाँ..क्यों नहीं आएगा मजा ? जब गांधीजी को आया तो हमें क्यूँ नहीं आएगा ? हम तो पी.एम. साहब के आभारी हैं...इसलिए नहीं कि उन्होंने झाड़ू थमाया बल्कि इसलिए कि इसी बहाने रोज अखबारों में हमारी बड़ी-बड़ी फोटो छप रही है..मीडियावाले आगे-पीछे दौड़ रहें हैं...रोज ही कई चैनलों में इंटरव्यू आ रहे हैं...तुम लोग सदियों से झाड़ू लगा रही हो..बताओ.. क्या कभी किसी अखबार में तुम्हारी फोटो छपी ?..कभी किसी चैनल वाले ने घास डाली ? किसी ने इंटरव्यू लिया ? ‘

‘ बस..बस.. अब रहने भी दो..कितनी साफ-सफाई करते हैं..सब पता है हमें..खूब फोटो छपा ली आपने ... अब दीवाली करीब है..थोड़ी बहुत नोट भी छापो..’

‘ क्या मतलब ? ‘ पति चौंका.

‘ अरे भई... मतलब ये कि लक्ष्मीजी के आगमन की तैयारी करो..थोड़ी जेब ढीली करो और घर की साफ़-सफाई में लग जाओ..आफिस साफ़ करने के लिए और भी लोग हैं..और फिर सरकारी जमादार और चपरासी तो हैं ही..कब तक इन्हें दामाद की तरह बिठाए रखोगे ? एक दिन की छुट्टी लीजिये और लग जाइए काम पर...ऐसे कबाड़ भरे घर में कहीं लक्ष्मी आएगी ? ‘

‘ अरे यार..हर साल का तुम्हारा यही डायलाग रहता है... बीते साल तो तुमने अकेले ही निपटा दिया था..इस बार भी निपटा लो न .. आफिस से छुट्टी मिलना मुश्किल लगता है..’ पति ने विवशता बताई.

‘ नहीं जनाब...बीते साल मेरा भाई यहाँ था तो उसने हेल्प का दिया था...मेरे अकेले के बस का नहीं..मर जाऊँगी..अब साफ़-सफाई,रंग-रोगन तो होना ही है..चाहे आपको छुट्टी मिले,न मिले..मुझे तो बस एक अदद मददगार चाहिए..और आज के आज ही चाहिए..परसों तो दीवाली है..लक्ष्मी-पूजा है..दो दिन में ही सब करना-धरना है..’

पति चुप रहा.. आफिस जाने के लिए कपडे पहनने लगा...पत्नी टिफिन देते बोली-‘ मेरी बातें आपने सुनी भी या इस कान से सुन उस कान से निकाल दी ? ‘पत्नी याद दिलाते बोली पर पति गहन चिंतन जैसी मुद्रा बना सटक लिया..

दोपहर बारह बजे जब निकी स्कूल से लौटा तो दरवाजे पर उसके पीछे एक दुबला-पतला ,गोरा-नारा अजनबी युवक खड़ा दिखा .. उसे देखते ही वह पूछ बैठी-- ‘साहब ने भेजा है ?’

उसने सिर हिलाया.

‘ अच्छा-अच्छा पहले अन्दर आओ..सबसे पहले तो अपना नाम बताओ..’

‘ लक्ष्मी..’ अजनबी युवक ने जवाब दिया.

वह मन ही मन हंसी कि पतिदेव को हमेशा मजाक ही सूझता है..लक्ष्मी आने की बात की तो उन्होंने लक्ष्मी ही भेज दी..

‘ पूरा नाम बताओ भई..’

‘ जी..लक्ष्मी नारायण...’ उसने बताया.

‘ ठीक है लक्ष्मी..मैं एकदम ही शार्ट में काम समझा देती हूँ..यहाँ एक बेडरूम,एक हाल,एक किचन और एक बाथरूम है ...एकदम ही चिड़िया के घोसले के माफिक घर है..तुम झटपट काम करो तो हो सकता है-आज ही साफ़-सफाई कम्प्लीट हो जाए..कल का दिन रंग-रोगन के लिए रखेंगे ..सबसे पहले तुम बेडरूम चलो....वहां दुनिया भर का कबाड़ जमा है..पहले वो.फिर बाकी बाद में...’

‘ जी...’ कहते लक्ष्मी घर की लक्ष्मी के पीछे-पीछे चलने लगा.

‘ देखो लक्ष्मी...ये हमारा बेडरूम है..ये नीलीवाली गोदरेज की अलमारी को छोड़ बाकी सबकी साफ़-सफाई करनी है...समझ गए ना ? ‘

उसने फिर सिर हिलाया.

‘ तो चलो ..तुम यहीं से शुरू हो जाओ.. निकी हाल में बैठकर होमवर्क कर रहा है.. फिर खाना खाकर ट्यूशन जाएगा..तब तक मैं नहा लेती हूँ.. सब समझ गए न ? ‘

उसने तीसरी बार सिर हिलाया.

नहा-धोकर गृहलक्ष्मी जब बाथरूम से निकल बेडरूम की ओर बढ़ी तो अचानक निकी सामने आ गया...

‘भूख लगी है बेटे ? अभी खाना लगाए देती हूँ ‘

‘ नहीं मम्मा..अभी-अभी दो बड़े साइज के कैडबरी खाए हैं..भूख नहीं.. ‘

; कैडबरी ? किसने दिए ? ‘ गृह लक्ष्मी चौंकी.

‘ अंकल ने..’

‘ कौन अंकल ने ? ‘

‘अरे वही जो घर की साफ़-सफाई करने आये थे..’

‘ आये थे से क्या मतलब ? ‘ वह फिर चौंकी.

‘ मतलब कि वो हमें चाकलेट दे के बाहर चले गए..’ निकी बोला.

सुनते ही गीले कपड़ों में ही वह बेडरूम की ओर भागी..दरवाजा खुला था..सब कुछ अपने ठीक-ठिकाने पर दिखा, उसे “हाय” लगा... पर ज्यों ही आलमारी की ओर आँख गई ..उसकी आँखें खुली की खुली रह गई..चीख सी पड़ी- ‘ हाय मैं लुट गई...बर्बाद हो गई..’ आलमारी से जेवरों वाला ब्रीफकेस गायब था.. बाकी सब कुछ यथास्थान था,जैसे किसी ने छुआ तक न हो .उसने तुरंत पति को मोबाइल किया..किन्तु इंगेज मिला...फिर लगाया..तब भी इंगेज..वह परेशान हो गई कि अचानक उनका ही फोन आ गया..वह कुछ बताती कि उसके पहले ही उधर से आवाज आई- ‘ यार पिंकी...तुम्हारे लिए खुश खबरी... बॉस तीन दिनों के लिए बाहर गए हैं.. आफिस का चपरासी बहुत ही कम पैसों में मान गया है.. अब दो दिन वह तुम्हारे साथ घर की साफ़-सफाई करेगा..अब तो खुश ? ‘

‘ क्या खाक खुश ?..सब कुछ तो साफ़ हो गया..अब उसकी क्या जरुरत ?....’ इतना कह वह रोने लगी.

पति के बार-बार पूछने पर जब उसने सच्चाई बयान की तो उसे ढाढस देते पति ने कहा- ‘ रोओ मत यार...जो हो गया सो हो गया...हम आज के आज ही तुम्हें सारे जेवर फिर से खरीद देंगे..’

‘ इतना बड़ा हादसा हो गया और आपको मजाक सूझी है..’ पत्नी विलाप करते-करते बोली.

‘ अरे मजाक नहीं...सच कह रहें हैं..’

‘ क्या कोई लाटरी लगी है ? ‘ पत्नी गुस्से से बोली.

‘ हाँ...यूं ही समझ लो...दरअसल आज जल्दी-जल्दी में हम आफिस के ब्रीफकेस की जगह तुम्हारे जेवर वाले ब्रीफकेस ले के आ गए...अभी-अभी जब.पेमेंट-स्लिप खोजने उसे खोला तब पता चला..कितने दिनों से हम कह रहे थे - एक जैसे ब्रीफकेस होने से किसी न किसी दिन धोखा हो जाएगा...और देखो आज हो भी गया...पर शुक्र मनाओ यह धोखा बड़े अच्छे दिन हुआ..आज ये धोखा नहीं होता तो इस दीवाली में हम दोनों घर में बैठे ड्युएट गाते रहते- “ एक वो भी दिवाली थी...एक ये भी दिवाली है..उजड़ा हुआ गुलशन है..रोता हुआ माली है “ अब चलो मुस्कुराओ..हम जल्द ही लक्ष्मी को लेकर घर आते हैं ..’

‘ कौन लक्ष्मी ? ‘ पत्नी घबराकर पूछी

‘ अरे वो नहीं जो तुम समझ रही हो...वो बेचारा तो आफिस के पेपर्स देख कहीं सिर धुन रहा होगा..हम जेवरों की बात कर रहें...रुपयों-पैसों की बात कर रहे हैं..जिसे खोकर तुमने फिर से पा लिया..सचमुच लक्ष्मी जी तुम पर मेहरबान है..हम अभी आते हैं....शुभ- दीवाली ...’

‘ आपको भी जी...लक्ष्मी जी सदा सहाय करे..यही दुआ है हमारी ..जल्दी आईये आज आपको नाश्ते में “ स्पेशल नाश्ता “ दूंगी..’

‘ नाश्ता तो मोबाईल पर ही दे दो यार....हमें तो आज “ स्पेशल डिश ” की इच्छा है..’

‘ धत...बदमाश कहीं के...’ पत्नी ने शरमाते हुए फोन काट दी.

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प्रमोद यादव

गया नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़

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