मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

पुस्तक समीक्षा - लुकार

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लुकार: 'सलिल' अमृत महोत्सव विशेषांक

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                                           -- मनोज 'आजिज़'

जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद् गत साठ वर्षों से भोजपुरी साहित्य की सेवा करती आ रही है । अब तक परिषद् ने भोजपुरी में विभिन्न विधाओं की साठ पुस्तकें प्रकाशित की हैं । इस बार परिषद् का मुखपत्र 'लुकार' संस्थापक सचिव डॉ बच्चन पाठक 'सलिल' का अमृत महोत्सव विशेषांक के रूप में प्रकाशित हुआ है । प्रस्तुत अंक के सफल और सार्थक संपादन के लिए संपादक डॉ अजय कुमार ओझा के साथ उनकी पूरी टीम बधाई के पात्र हैं । एक साहित्यसेवी के लिए एक पत्रिका की ओर से यह एकांत श्रद्धा ज्ञापन है । 

कुल २३ रचनाओं में विषय वैविध्य है और डॉ सलिल के व्यक्तित्व और कृतित्व की झांकियां अनेक दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गयी हैं । लेखकों में जमशेदपुर के अतिरिक्त बक्सर, पटना, भोजपुर, बलिया और चंपारण के रचनाकार भी शामिल हैं । डॉ आसिफ़ रोहतासवी(पटना) ने जहाँ डॉ सलिल के व्यक्तित्व और प्रोत्साहक रूप की चर्चा की है वहीँ जमशेदपुर के कवि शैलेन्द्र पाण्डेय 'शैल' ने इनके सहज व्यक्तित्व को चित्रित किया है । डॉ विष्णुदेव तिवारी (बक्सर) और उदय प्रताप 'हयात' (जमशेदपुर) ने डॉ सलिल के दो भोजपुरी उपन्यासों 'सेमर के फूल'(१९६५) और 'मेनका के आंसू' (१९८९) की समीक्षा अपने अपने ढंग से की है और इन्हें भोजपुरी के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम बताया है । जमशेदपुर एक औद्योगिक नगर है और यहाँ प्रत्येक व्यक्ति दो-तीन भाषाएँ पढ़-लिख-बोल लेता है किन्तु किसी अन्य भाषा से प्रभावित होकर किसी अन्य भाषा का रचनाकार रचना भी करने लगे तो यह एक सुखद साहित्यिक आश्चर्य लगता है । ऐसे ही उदाहरण इसमें भंजदेव देवेन्द्र कुमार (ओड़िया भाषी), उमेश चतुर्वेदी(ब्रज भाषी), मनोज 'आजिज़' (बांग्ला भाषी) और मंजू ठाकुर (मैथिली भाषी) के उदाहरण हैं जिन्होंने डॉ सलिल के ऊपर और इनकी भोजपुरी रचनाओं पर अपने-अपने विचार प्रकट किये हैं । डॉ सलिल को समर्पित कुछ कविताएँ भी इस अंक में प्रकाशित किये गए हैं । डॉ सलिल के कई रोचक संस्मरण गजेन्द्र प्रसाद वर्मा 'मोहन' ने लिखा है । जमशेदपुर के अतिरिक्त जादूगोड़ा, पतरातू, रांची, हज़ारीबाग़ आदि स्थानों में भी डॉ सलिल जाते रहें हैं और वहां राष्ट्रीय स्तर के भोजपुरी साहित्यकारों के साथ विचार-विमर्श करते रहे हैं । ऐसे ही प्रसंगों के बीस चित्र इस अंक में प्रकाशित हैं । पुराने भोजपुरी साहित्यकारों---दुर्गा शंकर सिंह 'नाथ', आचार्य महेंद्र शास्त्री, पाण्डेय नर्मदेश्वर सहाय, भुवनेश्वर श्रीवास्तव 'भानू', मनोरंजन प्रसाद सिंह, डॉ राम सेवक 'विकल' की वे टिप्पणियां जो डॉ सलिल पर समय-समय पर की गयी थीं, इस अंक में संकलित की गयीं हैं । डॉ सलिल सूरीनाम और नेपाल सहित कई जगहों में अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज़ करा चुके हैं और वहां के संस्मरणों में वहां के भोजपुरी प्रवासियों का काफी चित्रण हिंदी और अंग्रेजी में किया है । अच्छा होता यदि उन संस्मरणों के कुछ अंश भोजपुरी में ही सही इस अंक में दिए जाते । कुल मिलाकर यह एक लघु-पत्रिका के लिए संग्रहणीय अंक बन गया है जिसे सामान्यतः लोक-भाषा के सभी प्रेमी अपनाएंगे । 

समीक्ष्य पत्रिका-- लुकार (भोजपुरी), जमशेदपुर

समीक्षक--  मनोज 'आजिज़'

प्रकाशक--  जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद्

संपादक-- डॉ अजय कुमार ओझा

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