सविता मिश्रा की लघुकथाएँ

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दो जून की रोटी
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आंचल में दूध आंख में पानी भरा है, रह रह छलक जा रहा था क्योंकि आंचल का दूध तो अब सुख चूका था| नन्हा गुल्लू फिर भी चूस रहा था! भूख से अंतड़िया दिख रही थी| खुद को बेचने को मजबूर हो चुकी थी किसनी| पर उससे भी पूरी कहाँ हो रही दो जून की रोटी| बिकने वाली चीज सस्ती जो आंकी जाती है|
भूख से बिलबिला रहा था गुल्लू ,पर किसनी के पास उसके पेट की आग़ को बुझाने के लिये एक फूटी कौड़ी भी ना थी|
तभी एक दलाल की नजर पड़ी ,उसने बोला - "किसनी क्यों न इसे किसी अमीर परिवार के हवाले कर दें| वहां खूब आराम से रहेगा वह बच्चे की तलाश में है, तू कहें तो बात करूँ|"
सुनते ही किसनी ने सीने से चिपका लिया! कैसे दिल के टुकडे को अलग करने की हिम्मत जुटाती! आखिर इसी के लिये तो जी रही थी|
"मेरा यही सहारा है ये चला जायेगा तो मर ही जाउंगी मैं तो|"
दलाल के खूब समझाने पर उसके भविष्य के खातिर आख़िरकार किसनी राजी हो गयी पर शर्त भी रक्खी की उस घर में वो लोग नौकरानी ही सही उसे जगह दें तब|
आज अपने नन्हे को स्कूल ड्रेस में स्कूल जाते देख उसके आंसू झर-झर बहे जा रहे थे! वह उसके भविष्य के प्रति आश्वस्त हो ख़ुशी से फूले नहीं समा रही थी| उसका रोया-रोया आशीष रहा था गुल्लू के नये माँ बाप को| 

 


यमुना किनारा (छल )

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गाँव से खबर आई कि पड़ोस के जो की परिजन ही थे उनके बड़े बेटे की मृत्यु हो गयी है| शाम का समय था, शीला भूख से बिलखते अपने चार साल के बेटे के लिए मैगी बनाने के लिए स्टोव जलाने जा ही रही थी कि जेठानी ने रोका, "अरे यह क्या कर रही हो जानती नहीं हो ऐसे में कुछ भी नहीं बनता, और ना खाते- पीते है कुछ, आज दूध पिला दो रो रहा है तो|"
"अच्छा सुनो मैं तुम्हारे जेठ जी के साथ जरा यमुना किनारे जा रही हूँ , वही से कुछ फल-फूल लेती आऊंगी|" शाम ढल चुकी थी,जेठ जेठानी हँसते-खिलखिलाते आये, जेठानी ने आम पकड़ाते हुए कहा, "लो शीला बड़ी मुश्किल से मिला काट कर सबको दे दो|" 'दो आम और सब' मन में ही सोच रह गयी|
शीला उनकी उतारी साड़ी तह करती हुई बोली अरे दीदी "इस पर कुछ गिर गया है"
"हा तुम तो जानती ही हो लोग कितने बेवकूफ होते है, दोना फेंक दिया था मुझ पर..." "..हां दी होते भी है और दूसरों को समझते भी है" कह चुपचाप साड़ी तह करने लगी शीला ............|

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3 टिप्पणियाँ "सविता मिश्रा की लघुकथाएँ"

  1. BAHUT KHUBSURAT KAHANI
    MAN KO CHHUNE WALI

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  2. ममता की पुकार पर ममता का गाला गोंट लेना भी एक माँ ही जानती है....!!

    पर उपदेश कुशल बहुतेरे, नियम-कानून दूसरों के लिए ही बनाये जाते हैं जो खुद पर कभी नहीं लादे जाते....!!

    उत्तर देंहटाएं

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