शनिवार, 8 नवंबर 2014

सपना मांगलिक की कहानी - नमकीन प्रेम

नमकीन प्रेम

रुशाल की नयी नयी पोस्टिंग हुई थी दिल्ली में सब कुछ नया था उसके लिए इस अजनबी शहर में 

मन भी नहीं लगता था उसका यहाँ पर काम तो काम है करना ही होगा नहीं तो खाऊंगा क्या और बूढ़े माँ –बाप को खिलाऊंगा क्या

यही सोच वह अपने आपको समायोजित करने कि कोशिश करता। एक दिन उसे उदास और अकेला देख कर उसके सहयोगी आलोक ने पूछा –यार रुशाल तुम बहुत बुझे बुझे से रहते हो क्या बात है मन नहीं लगता यहाँ पर “

रुशाल “कुछ ऐसा ही है दोस्त इस शहर में कोई भी तो नहीं जिसे अपना कह सकूँ या मिल के दिल कि बात कर सकूँ बहुत परायापन है इस शहर में “

आलोक-“जब में पहली बार आगरा से यहाँ आया था तो मुझे भी ऐसा ही महसूस होता था पर मैंने अपने आपको पार्टी और डिस्कोथिक में मशरूफ कर लिया और मेरे इन जगहों पर कुछ नए दोस्त भी बन गए ,क्यों नहीं आज तुम भी मेरे साथ डिस्कोथिक चलो “

रुशाल थोड़े ना नकुर के साथ मान गया और शाम को आलोक के साथ डिस्को चल दिया।

वहाँ सभी अपने अपने जोड़े बनाकर नाच रहे थे एक सुन्दर सी लड़की जो सफ़ेद रंग का इवनिंग गाऊन पहने थी सभी दोस्तों से बहुत मुस्कुराते हुए खुश हो कर बातें कर रही थी वह अपने सभी दोस्तों को बराबर का तवज्जो दे रही थी अपनी बातों से वह बहुत ही शालीन और सभ्य जान पड़ती थी। रुशाल का भी मन हुआ कि जाकर उससे बात करे और दोस्ती करे लेकिन अपनी साधारण शक्ल सूरत और कद काठी कि वजह से हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। डिस्को से वापस चलने के समय तक वो हिम्मत जुटा उस लड़की के नजदीक पहुंचा और बहुत ही विनम्र स्वर में बोला-जी मेरा नाम रुशाल है इस शहर में नया आया हूँ “प्रत्युत्तर में लड़की ने अपनी चिरपरिचित मुस्कराहट के साथ बताया कि उसका नाम संजना है वो दिल्ली कि ही रहने वाली है “.

रुशाल फिर थोडा सकुचाते हुए बोला-“जी अगर आप बुरा ना मानें तो कल हम पास वाले कैफे में कॉफी पीने जा सकते हैं “संजना ना कहना चाहती थी पर रुशाल कि शालीनता देख मन ना कर पायी और उसने हाँ बोल दिया।

दूसरे दिन वह आधा घंटा पहले ही कैफे पहुँच गया और वेसब्री से संजना का इंतज़ार करने लगा उसका दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था। कुछ देर के इंतज़ार के बाद संजना वाहन पहुँच गयी रुशाल को संजना कि ये वादापरस्ती बहुत पसंद आई। औपचारिक अभिवादन के बाद रुशाल ने संजना से पूछकर दो काफी और कुछ नाश्ते का आर्डर कर दिया। बैरा काफी ऑफर स्नेक्स ले आया संजना चुपचाप काफी पीने लगी और रुशाल भी अब तक खामोश था। दोनों तरफ एक अजब सी ख़ामोशी थी ,संजना मन ही मन उस वक्त को कोस रही थी जब उसने रुशाल के साथ यहाँ आने का वादा किया था।

इतने में रुशाल ने बैरे को बुलाकर थोडा नमक लाने का आदेश दिया बैरा नमक लेकर आया तो उसने वह नमक अपनी काफी में डाल दिया बैरा अजीब नज़रों से रुशाल को देख चुपचाप चला गया लेकिन संजना ने बहुत ही आश्चर्य के साथ उससे ऐसा करने कि वजह पूछी। रुशाल-“दरअसल संजना में मुंबई का रहने वाला हूँ और पिछले ३ माह से अपने जन्मस्थान से दूर अपने बूढ़े माँ बाप से दूर यहाँ देल्ही में रह रहा हूं ,जब भी मुझे अकेलापन सताता है या फिर मुंबई कि वाहन के समुद्र कि चौपाटी की और मम्मी पापा की याद आती है तो में अपनी काफी में नमक

डालकर वाहन के खरे समुद्र कि कल्पना करता हूँ और अपनी मुंबई और वाहन से जुडी हर बात को महसूस करता हूँ “

संजना जो अब तक अपने आपको कोस रही थी कि रुशाल के साथ क्यों आई अब रुशाल कि सोच से अत्यधिक प्रभावित हो गयी और बोली “रुशाल मुझे जानकार अच्छा लगा कि में ऐसे आदमी के साथ इस समय हूँ जो अपने घर,माँ –बाप और जन्मस्थल से इतना प्यार करता है मेरा मानना है कि ऐसा व्यक्ति हर किसी के साथ जीवन पर्यंत रिश्ता निभाएगा चाहे उससे जुदा व्यक्ति कोई भी कितनी भी गलती क्यूँ ना करे “

इस तरह रुशाल और संजना के बीच जो बातों का सिलसिला शुरू हुआ वो थमने का नाम नहीं ले रहा था अंत में रुशाल ने विदा लेते हुए संजना से पूछा कि क्या हम दोबारा मिल सकते हैं संजना ने भी मुस्कुराते हुए सहमति दे दी।

रुशाल को दिल्ली अब अजनबी शहर नहीं लगता और यहाँ के लोग भी उसे अब बहुत ही अपने से लगने लगे थे क्यूँ ना हो उसे संजना के रूप में एक अच्छी दोस्त जो मिल गयी थी। दोनों रोज उसी कैफे में मिलते रोज ही रुशाल काफी में नमक डालता और रोज ही संजना को उसकी ये आदत बहुत प्यारी लगती। चार साल तक उनकी गहरी दोस्ती यूँ ही चलती रही मोड तो तब आया जब संजना ने अपने जन्म दिवस के दिन रुशाल से ऐसा तोहफा माना जिसे सुन रुशाल अवाक रह गया। संजना ने उससे अपने प्यार का इज़हार करते हुए शादी का प्रपोजल दिया रुशाल कि आँखों में आंसू थे क्यूंकि वो तो पहली नजर में ही संजना को दिल दे बैठा था पर कहने कि हिम्मत कभी नहीं जुटा पाया। रुशाल –“संजना में भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ लेकिन तुम एक बार फिर सोच लो क्या तुम मेरे जैसे साधारण आदमी के साथ खुश रह पाओगी क्यूंकि तुम बहुत नेक और सुन्दर लड़की हो तुम्हें मुझसे भी ज्यादा लायक और आकर्षक लड़के मिल सकते हैं “

संजना –“ तुमसे ये किसने कहा कि तुम लायक नहीं हो जो इंसान अपने साथ अपने बूढ़े माँ बाप को अपनी महिला मित्र को और अपने जन्म स्थल को इतना प्यार और सम्मान दे सकता है उससे लायक कोई और हो ही नहीं सकता और रही बात आकर्षण कि तो मेरे दिल को सिर्फ और सिर्फ तुमने ही आकर्षित किया है फिर तुम आकर्षण विहीन कैसे हो सकते हो हाँ ये बात और है कि तुम मुझे अपने लायक ना समझो तो मना कर सकते हो। ”

रुशाल ने मुस्कुराते हुए संजना को गले लगा लिया और जल्द ही दोनों कि शादी भी हो गयी जैसे कि आम तौर पे होता है शादी के बाद पति अपनी तरक्की के लिए प्रयास करता है और पत्नी अपनी गृहस्थी को सँभालने जुट जाती है उसी तरह ये दोनों भी अपने अपने स्वाभाविक कार्यों में लग गए ,जल्द ही इनके दो प्यारे प्यारे बेटों ने जन्म लिया अब पति-पत्नी से इनकी भूमिका माँ बाप के रूप में बदल गयी जो नहीं बदला था वो था इनका आपसी प्यार और संजना कि याद से रुशाल कि काफी में नमक डालने कि आदत और रुशाल भी अपनी प्यारी पत्नी संजना के हाथ से बनायीं नमकीन काफी बड़े स्वाद के साथ पीता। ऐसे ही इनके विवाहित जीवन के चालीस साल व्यतीत हो गए बच्चे अपनी अपनी नौकरी पे चले गए बस रुशाल और संजना ही एक दूसरे के साथी थे ,एक दिन रुशाल को तीव्र ह्रदयाघात हुआ डॉक्टर ने संजना को कह दिया कि ये बस दो घंटे ही जीवित रहने वाले हैं आप ये समय इनके साथ अंदर बैठिये।

संजना कि आंखों से आंसू बह रहे थे वह बोली –“रुशाल जीवन भर के साथ का वचन दिया था जा रहे हो ना मुझे अकेला छोड़कर “रुशाल लडखडाती आवाज में –“संजना में हरदम तुम्हारे साथ रहूँगा तुम्हारी यादों में तुम्हारा पीछा तो में हरगिज नहीं छोड़ने वाला “दोनों इसी तरह कुछ देर तक बातें करते रहे फिर रुशाल के बदन में अजीव सा तेज कंपन हुआ और उसकी आँखें पथरा गयी संजना दौड कर डॉक्टर को बुला के लायी लेकिन जब तक रुशाल उससे बहुत दूर जा चूका था। वक्त ने संजना को हिम्मत दी रुशाल के बिना जीने कि एक दिन संजना रुशाल कि अलमारी से गर्म कपडे निकल रही थी जरूरतमंदों को देने के लिए तभी एक डायरी निकल कर जमीन पर गिर पड़ी संजना ने चौंक कर उस डायरी को खोला वह रुशाल कि दैनिक डायरी थी जिसमें रोजाना जीवन में उसके साथ क्या घटित हुआ सब लिखा था ,डायरी के अंतिम पन्ने पर एक पत्र लिखा था जो इस प्रकार था –“प्रिय संजना में आज तुम्हें एक सच बताना चाहता हूं पिछले ४० साल से हिम्मत जुटा रहा था लेकिन नहीं कर पाया अब जब मेरा ब्लड प्रेसर मेरा साथ नहीं दे रहा और म्रत्यु करीब आती नजर आ रही है तो में तुम्हें ये सच लिखकर बताने जा रहा हूँ उम्मीद है तुम मुझसे नफरत नहीं करोगी और मुझे माफ कर दोगी ,दरअसल मुझे नमकीन काफी कभी पसंद नहीं थी लेकिन प्रथम मुलाकात में तुमसे बातचीत शुरू करने के उद्देश्य से मैंने नमकीन काफी का सहारा लिया मैं हमेशा वो काफी बड़ी मुश्किल से पीता था और मुझे नमकीन काफी में कभी कोई स्वाद सिवाय बेस्वादी के नजर नहीं आया लेकिन मैंने हमेशा तुमसे हर बात छुपाई क्यूंकी तुम उस काफी कि वजह से ही मेरी जिंदगी में शामिल हुई और मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता था चाहे इसके लिए मुझे अगले सात जन्मों तक वो नमकीन बेस्वाद काफी ही क्यों ना पीना पड़े मैं हमेशा तुम्हें प्यार करता रहा हूँ मरने के बाद जहाँ भी मेरा अस्तित्व होगा तुम्हें वहीँ से देख लूँगा और उतना ही प्यार करूँगा। मैं जनता हू तुम ये पड़कर नाराज होगी शायद मुझसे इस झूठ के लिए नफरत करोगी लेकिन फिर भी में तुमसे माफ़ी मांगते हुए अगले जन्मों में अपनी पत्नी बनने कि भीख मांगता हूँ। तुम्हारा रुशाल “

संजना कि आँखों से दो बूँद ढलक कर उस पत्र पर गिर पड़ी संजना पत्र को सीने से लगाती हुई “ओह रुशाल तुमने कैसे सोच लिया कि में तुमसे नाराज होउंगी जबकि मेरे लिए जिंदगी भर तुम्हें नमकीन बेस्वाद काफी पीनी पड़ी तुम्हारे प्यार कि कोई मिसाल नहीं ‘ऐसा कह संजना बिलख उठी।

 

साहित्यकार

सपना मांगलिक

आगरा उप्र

sapna8manglik@gmail.com

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