मंगलवार, 25 नवंबर 2014

ओमप्रकाश शर्मा की बाल एकांकी - शब्द निर्माण

शब्द निर्माण (बाल एकांकी)

(विद्यालय में सातवीं कक्षा का कक्ष, सामने बाईं और एक मेज और एक कुर्सी है मेज पर उपस्थिति पंजिका राखी है I कक्षा में बैठे सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी पुस्तकें खोलकर कुछ याद कर रहे हैं। कुर्सी के पीछे दीवार के मध्य दीवार श्यामपट टंगा है उसके नीचे बगल में तिपाई पर चॉक का डिब्बा रखा हुआ है। भाषा अध्यापक दाहिनी के दरवाजे से कमरे में प्रवेश करते हैं। सभी विद्यार्थी खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं तथा अध्यापक के संकेत पर सभी पुन: बैठ जाते हैI )

अध्यापक:(विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए) आज तो लग रहा है आपकी कक्षा में कोई भी अनुपस्थित नहीं है।

रमेश : गुरुजी इस सप्ताह हमारी कक्षा में उपस्थिति प्रतिदिन ही शत-प्रतिशत रही है।

भाषा अध्यापक : यह तो बहुत ही अच्छी बात है। इसके लिए तो आप बधाई के पात्र हैं। हाँ अब यह बताओ कि जो मैंने आपको गृहकार्य दिया था वह आप सभी ने पूरा कर लिया है य कुछ ऐसा भी है जो आप मुझसे समझना चाहते हो?

रमेश : शेष तो कर लिया गुरुजी, लेकिन पर्यायवाची शब्द यदि आप लिखवा दें तो हम उन्हें स्मरण कर लेंगे I इनमें कई तो एक से ही लगते हैं और उनमें कुछ अंतर समझ में नहीं आता जैसे- तोयज कमल और तोयद बादल।

भाषा अध्यापक : रमेश बेटा, लिखवाने को तो अभी लिखवा सकता हूँ लेकिन कुछ बातें ऐसी भी होती है जिन्हें एक बार भली-भांति समझ लिया जाए तो वे बिना स्मरण किए ही जीवन भर याद रह सकती हैं और जिस प्रकार की शंकाओं की बात तुमने की हैं उनका सदा के लिए समाधान भी मिल जाता हैI

सोहन :बिना स्मरण किए सदा याद ! वह कैसे ?

भाषा अध्यापक : क्यों चौंक गए? मैं सत्य कह रहा हूँ और आज मैं आपको कुछ ऐसा ही कुछ सिखाने जा रहा हूँ बोलो सीखना चाहोगे?

सभी विद्यार्थी मिलकर – हाँ जी, हाँ जी हम सीखेंगे।

 

भाषा अध्यापक: ठीक है सबसे पहले राधा तुम बताओ तुमने पानी के कितने पर्यायवाची कंठस्थ किए है?

राधा :( सोचते हुए) जल ,वारि , नीर ...... तीन ही याद हैं।

भाषा अध्यापक : चलो तुम इसे श्यामपट पर ऊपर से नीचे की ओर क्रम से लिख दो (राधा आकर स्यामपट पर लिखती है भाषा अध्यापक अन्यों को सम्बोधित करते हुए) और कोई ?

रमेश : अम्बु और तोय भी तो जल के ही पर्यायवाची हैं।

भाषा अध्यापक : क्यों नहीं तुम भी इन्हें इसके नीचे लिख दो । (रमेश भी आकर नीर के नीचे अम्बु और उसके नीचे तोय लिख देता है, अध्यापक अपनी बात जारी रखते हुए)अब आपके सामने पानी के ये न पाँच पर्यायवाची शब्द है - जल, नीर ,अम्बु तोय और वारि। अब हम आज हम इन्ही पाँच शब्दों से अनेक शब्दों का निर्माण करने का कार्य करेंगे ।

राधा: गुरुजी, वह कैसे?

भाषा अध्यापक : गणित के ही नियम नही होते भाशा के भी नियम्क होते हैं, जिन्हे समझने की आवश्यकता होती है और जब समझ में आने लगते हैं तो भाषा तो इतनी आसान हो जाती है कि हम नए नए शब्दों का प्रयोग करने लगते हैं I

रमेश : सत्य कह रहे हैं आप?

 

भाषा अध्यापक : मैं भला आपसे असत्य क्यों कहूँगा। अब जरा ध्यान से देखो , अब मैं इन पाँचो वर्णों के अंत में ‘ज’ वर्ण लगा देता हूँ।( सब शब्दों के आगे ‘+ज ’ लगा देते हैं बच्चे साथ-साथ उन्हें अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारते रहते हैं) अब आप एक बात अपने दिमाग मे बैठा दो कि ‘ज’ जब बाद में लगाया जाता है तो वह में या से उत्पन्न या में या से जन्म लेने वाला अर्थ देता है। अब देखो मैंने पंक जिसका अर्थ होता है कीचड़ के साथ ‘ज’ लगा दिया ( ब्लैक बोर्ड पर लिखते है पंक + ज = पंकज)। अब इस पंकज शब्द का अर्थ हो गया कीचड़ में जन्म लेने वाला I

राधा : पंकज तो कमल को कहते हैं आपने ही तो बताया था।

भाषा अध्यापक : राधा बिटिया कमल कीचड़ में तो पैदा होता है इसीलिए तो उसे कमल कहते है।

रमेश : अब समझ में आया गुरुजी।

भाषा अध्यापक : ज़रा देखो मैंने जब इन पाँचों के साथ ‘ज’ जोड़ा (स्याम पट पर लिखते हुए) पाँच नए शब्द बन गए -–

जल + ज = जलज

वारि + ज = वारिज

नीर + ज = नीरज

तोय + ज =तोयज

अम्बु + ज =अम्बुज

मोहन : क्या जलज तो कमल को नही कहते हैं?

 

भाषा अध्यापक : मोहन कहते हैं, आप् बिलकुल ठीक कह रहे हो कमल जल में पैदा होता है तो जलज हुआ I वैसे तो जल में बहुत कुछ पैदा होता जैसे मोती, मछली आदि परन्तु यह शब्द कमल के लिए रूढ़ हो गया है। और जलज ही नहीं वारिज , नीरज, तोयज, अम्बुज ये सभी शब्द भी पानी के पर्यायवाची के आगे ‘ज’ जोड़ कर बने है इसलिए इन सबका अर्थ भी कमल ही है।

राधा : यह तो बिलकुल सुगम है पानी के पाँच पर्यायवाची याद किए और ‘ज’ जोड़ने से कमल के बन गए। यह तो सच में समझने की बात है इन्हें याद करने की तो जरूरत ही नहीं है।

रमेश : क्या इस प्रकार और शब्द भी बनाए जा सकते है?

भाषा अध्यापक : क्यों नहीं ,बहुत से।

सीता : गुरुजी, और बताओ न, यह तो बहुत ही आसान सा तरीका हैI

भाषा अध्यापक : अरे , अभी यही बात कहाँ पूरी हुई है धीरज रखो। एक शब्द है ‘अनु’ और इसका अर्थ होता है बाद में और इसके बाद मैंने (श्यामपट पर लिखते हुए ) यह देखो ‘ज’ जोड़ दिया यह बन गया अनुज I अब इसका अर्थ हो गया बाद में पैदा होने वाला I राधा बेटी तुम्हारे बाद कौन पैदा हुआ?

राधा :( खड़े होकर ) मेरे बाद तो मेरा छोटा भाई रीतेश पैदा हुआ है I

भाषा अध्यापक : तो राधा के बाद उसका छोटा भाई पैदा हुआ इसलिए अनुज का अर्थ हो गया छोटा भाई I

रमेश : इसका अर्थ तो यह हुआ कि अग्र होता है पहले या आगे और यदि ‘ज’ जोड़ें तो बन गया अग्रज अर्थात पहले पैदा होने वाला और अर्थ हुआ बड़ा भाई I

भाषा अध्यापक : अरे बहुत खूब , रमेश तुम तो बिलकुल समझ गए I अब तुम इसी प्रकार स्वेदज, अंडज , आत्मज जैसे बहुत से शब्द बना सकते हो और अपने शब्द भण्डार में वृद्धि कर सकते हो I

राधा: भाई के लिए तो आपने बता दिए और बहन के लिए?

भाषा अध्यापक : हाँ राधा बेटी तुमने समय पर याद दिला दिया अन्यथा मैं बताना भूल ही जाता। यह बात भी जरा ध्यान से अपने मस्तिष्क में रख लो।

कुछ विद्यार्थी : कौन सी बात गुरूजी ?

 

भाषा अध्यापक : य़दि इस ‘ज ’ में आ की मात्रा लगा दी जाए तो स्त्रीलिंग बन जाता है। जैसे अनुज का अर्थ था छोटा भाई तो अनुजा का अर्थ हो गया छोटी बहन।

राधा : वाह ! तब तो अग्रज बड़ा भाई , अग्रजा बड़ी बहन , आत्मज पुत्र तो आत्मजा पुत्री।

रमेश : वैसे ही तनुज और तनुजा।

भाषा अध्यापक :(उनको प्रोत्साहित करते हुए ) कमाल है तुम तो लग गए एक शब्द से अनेक शब्दों का निर्माण करने।

रमेश : गुरुजी आज आपने सिखाया ही इस तरीके से जिससे शब्द बिना स्मरण किए ही दिमाग मे इस प्रकार चिपक गए जैसे सिमेंट से ईंट जुड़ जाती है। (अध्यापक और अन्य बच्चे हँसने लगते हैं)

राधा :(कुछ विचारते हुए) मैं रितेश की अग्रजा हुई न ? यदि मैं उसको पत्र लिखू तो क्या पत्र के नीचे ‘तुम्हारी अग्रजा’ लिख सकती हूँ?

भाषा अध्यापक : क्यों नही , तुम सम्बोधन में भी उसे प्रिय अनुज लिख सकती हो। अब बताओ सब कैसा लग रहा है सीखना ?

सभी : बहुत अच्छा ,बहुत अच्छा ।

सीता: गुरुजी इस प्रकार तो यदि पुस्तक में ये शब्द आते हैं तो हम ‘ज’ या ‘जा’ को अलग करके इन शब्दों के अर्थ भी सुगमता से सीख सकते हैं

 

अध्यापक : इसमें तो कोइ संदेह ही नही I जैसे आत्मजा शब्द कहीं पर आता है तो ‘आत्म + जा’ जो अपने से उत्पन्न हुई हो अर्थात पुत्री अर्थ सुगमता से लिया जा सकता है यह सब कुछ तो मैं तुम्हे सन्धि और समास सिखलाते हुए भी करवाऊँगा। उस समय आप इसे और भी आसानी से सीख जाएँगे। `

सोहन : इससे भी आसान तरीके से? हम तो इन शब्दों को रटते थे और आपने हमें इस प्रकार समझा दिए कि हम इन्हें कभी भूल ही नहीं सकतेI

भाषा अध्यापक : यदि शब्दों के अर्थ अच्छी प्रकार समझ लिया जाए तो उन्हें बार-बार याद करने की आवश्यकता ही नहीं रहती है I अब देखो मैं हम इन पाँच शब्दों के बाद लगाए गए ‘ज’ को मिटा देता हूँ ( मिटाते हैं) और इसके स्थान पर ‘द’ लिख देता हूँ I

मोहन : ‘द’ लगा देने से अब क्या हो जाएगा?

भाषा अध्यापक : इस ‘द’ का अर्थ होता है देने वाला I पहले सोहन तुम यह तो बताओ तुम्हें पानी कौन देता है?

सोहन : मैं तो खुद नल से पानी भर कर लाता हूँ I

भाषा अध्यापक : ( अध्यापक मुस्कुराते हुए) और नल में कहाँ से आता है ?

सोहन : पानी के टैंक से I ( सब हँसते हैं )

भाषा अध्यापक : और पानी के टैंक में कहाँ से आता है रमेश तुम बताओ ?

रमेश : जब मेघ बरसते हैं तो हमें जल मिलता है उसी का जल तालाबों, सरोवरों में एकत्रित होता है, नदियों में भी तो वर्षा का जल प्रवाहित होता है I

भाषा अध्यापक : शाबाश, हाँ हमें जल बादल ही प्रदान करते हैंI

 

सोहन: मेरे घर के पास पानी तो जमीन के अन्दर से निकलता है I

भाषा अध्यापक : सोहन तुम भी ठीक कह रहे हो, जब मेघ बरसते हैं मिट्टी और पौधे उस जल को सोख लेते लेते हैं वही एकत्रित जल नाले बावड़ियों में आता रहता है लेकिन सबको जल देने वाले बादल ही होते हैं। अब समझ गए क्या?

सोहन: अब तो अच्छी प्रकार समझ गया तभी मैं सोचता था कि बरसात में जमीन से जगह जगह पानी क्यों निकलता है आज मेरी समझ में आ गया जब जमीन में वर्षा का ज्यादा जल चला जाता है तो वह बाहर निकालने लगता है।

भाषा अध्यापक: ठीक हैI अब इन्ही पांच शब्दों के बाद में ‘द’ लगा देने ये पाँच शब्द बन गए ( श्यामपट्ट लिखते हुए )

जल + द = जलद

वारि + द = वारिद

नीर + द = नीरद

तोय + द =तोयद

अम्बु + द =अम्बुद

राधा: अब इन सब का अर्थ भी बद्द्ल ही हो गया I

भाषा अध्यापक :(मुस्कुराते हुए)बद्दल तो हम अपनी बोली में बोलते हैं यहाँ तो बादल याद रखना पड़ेगा ( बाकी बच्चे मुस्कुराने लगते हैं)I

राधा : गुरूजी गलती हो गई आपने इतने सरल तरीके से समझाया कि उत्सुकतावश बादल को कब बद्दल बोल दिया ध्यान ही नहीं रहाI

अध्यापक: बच्चो, इसमे हँसने की क्या बात है। हम परिवार में अपनी-अपनी बोली के शब्दों का प्रयोग करते है जो गलत नहीं होते लेकिन शुद्ध भाषा सीखने के लिए हम उनका प्रयोग यहाँ नहीं करते हैं। हाँ तो इतना आप लोगोन की समझ में आया?

 

सभी: हाँ जी ऽऽऽऽ।

सोहन : मुझे तीन ही याद नहीं हो रहे थे आपने तो पांच याद करवा दिए।

भाषा अध्यापक : अभी तो तुम दस भी याद कर लोगे लेकिन पहले आप यह जान लो कि कि बाद में ‘द’ लगा कर और भी शब्द बनाए जा सकते हैं।

सोहन : और भी !

भाषा अध्यापक : हाँ, और भी कई शब्द बन सकते हैं जैसे – सुख +द =सुखद सुख देने वाला , दुख + द =दुखद दुःख देने वाला

सीता : वर में द लगाकर वरद I

भाषा अध्यापक : बिलकुल ठीक , आप इसी प्रकार ‘द ‘ जोड़कर और भी कई शब्दों का निर्माण कर सकते हो I

राधा : आपने बड़ी सुगमता से पाँच से पन्द्रह शब्द बना दिए और साथ ही साथ बहुत से और शब्दो को बनाना थोड़ी ही देर में समझा दिया I आज सीखने में बहुत आनंद आ रहा है।

भाषा अध्यापक: जब विषय को समझने का प्रयास करोगे तो ऐसा ही आनन्द आएगा। आपको यह तो पता ही है कि ‘धर’ का अर्थ होता है धारण करना i अब में ‘द’ को भी मिटा देता हूँ और उसके स्थान पर ‘धर’ लगा देता हूँ I

 

(‘द’ को मिटाकर ‘धर लगा देते हैं ) अब रमेश आप बताओ कि जल को कौन धारण करता है I

रमेश : (कुछ सोचकर ) गुरु जी मुझे पता नहीं I

सीता: (भाषा अध्यापक के संकेत पर )जब गर्मी पड़ती है तब बादल जल को वाष्प के रूप में धारण करते हैं और आकाश में ले जाते हैI

भाषा अध्यापक : सीता ने बिलकुल सही बताया कि जल को धारण करने बाले बादल होते हैं I

रमेश : तब तो जलधर, वारिधर, अम्बुधर, तोयधर व नीरधर ये सब बादल के पर्यायवाची हो गए।

भाषा अध्यापक : हाँ ,ये सब बादल के ही पर्यायवाची हैंI

राधा : इस प्रकार तो बादल के दस पर्यायवाची बन गए और मेघ आदि अलग से | अब तो हिन्दी आसान लगाने लगी हैI

भाषा अध्यापक : हिन्दी है ही आसान I आप अब शब्द के अंत में ‘धर’ लगा कर कुछ शब्द बनाओ और उसके अर्थ बताओI

मोहन : शिवजी भगवान के सिर पर गंगा है इसलिए उन्हें गंगाधर भी कहते हैं ?

भाषा अध्यापक : सही कहा तुमने , इसी प्रकार चक्र हाध में धारण करने से विष्णु भगवान को ‘चक्रधर’, बलराम को हल धारण करने से ‘हलधर’ कहते है I

राधा : कृष्ण को ‘मुरलीधर’ और ‘वंशीधर’ I और सांप को ‘फणधर’ I

 

भाषा अध्यापक : अब तो आप खुद ही शब्द बनाने सीख गए हो I इसी प्रकार प्रयास करने पर आपके पास बहुत से शब्द बन जाएँगेI अब मैंने धर को भी मिटा दिया (मिटाते हुए ) अब हम इसके स्थान पर निधि शब्द जोड़ देते हैं (पाँचोंचों शब्दों के साथ निधि लिखते हुए )-

जल + निधि =जलनिधि

वारि + निधि = वारिनिधि

नर + निधि = नीरनिधि

अम्बु + निधि =अम्बुनिधि

तोय +निधि =तोयनिधि

(सीता की और इशारा करते हुए) अब तुम बताओ कि निधि किसे कहते हैं I

सीता : निधि का अर्थ भण्डार , कोश होता है I

भाषा अध्यापक : जल का का भंडार कहाँ होता है सोहन ?

सोहन: तालाब ,कुँए , सरोवर में I

भाषा अध्यापक :रमेश ज़रा तुम सोचा कर बताओ कि पानी का सबसे बड़ा भण्डार क्या हो सकता हैI

रमेश : वर्षा का जल नदियों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है i तो समुद्र ही जल का भण्डार हुआI

भाषा अध्यापक : बिलकुल सही बताया आपने| वसे तो जल के भण्डार कई है लेकिन अंत में सारे का सारा जल समुद्र में एकत्रित हो जाता है I

रमेश: अब ये पांचो बन गए समुद्र के पर्यायवाची | ठीक है न गुरूजी ?

भाषा अध्यापक : ठीक है। इसी प्रकार अंत में निधि लगाकर बनने वाले कुछ और शब्द बताओ?

मोहन : करुनानिधि , दयानिधि ,कृपानिधि ।

भाषा अध्यापक : अब लग रहा है कि आप शब्दों को स्वयं बना सकते हो। कैसा लग रहा है आपको अब यह सब कुछ जानकर ?

सब : बहुत अच्छा |

 

भाषा अध्यापक : अब समय भी होने वाला है इसलिए अब अंत में निधि को भी मिटा देता हूँ (मिटाते हैं ) और इसके स्थान पर ‘धि ‘ लगा देता हूँ ( जहाँ जहां निधि था वहा दि लगाते हैं ) देखो अब शब्द बन गए –

जल +धि =जलधि

वारि + धि =वारिधि

नीर +धि =नीरधि

तोय + धि =तोयधि

अम्बु + धि +अम्बुधि

मोहन : गुरूजी ऐसा ही कुछ और बताओ|

भाषा अध्यापक : बच्चो, भोजन उतना खाओ जितना हजम हो जाए और एक समय में पढो उतना ही जितना समझ में आ जाए। पहले आप लोग यह बताओ कि आज हमने पांच शब्दों से कितने शब्द बनाए ?

राधा : पूरे तीस और इसके साथ और भी तो बहुत से शब्द हमें आ गए हैं।

(घंटी बजती है )

भाषा अध्यापक : देखो समय भी समाप्त हो गया है ,अब आपने इसको बाद में दोहराना है और कल मै आगे सिखाने से पहले आपसे इनके बारे में पूछँगा I

रमेश : हमारी तो यह घंटी खाली है हम मिलकर इसे अभी करने की कोशिश करेंगे I

भाषा अध्यापक : हाँ जरूर करना (इसके साथ ही अध्यापक का प्रस्थान)

राधा : क्यों न हम कोइ एसा तरीका निकाले जिससे यह कभी हमें भूले ही नहीं |

रमेश : क्यों न हम इसकी कविता ही बना दें |

 

सीता : कोशिश तो की जा सकती हैi ( कुछ सोचकर )

आओ रे मोहन सोहन सीता , मिलकर सारे नव खेल रचाएं , शब्दों में कुछ नव वर्ण जोड़ नव नव सार्थक शब्द बनाएंI

रमेश :

तोय जल नीर अम्बु वारि में ‘ज’ वर्ण जोड़ दिया यदि जाए, अर्थ तब तो जल से उत्पन्न ‘कमल’ उन सबका बन जाए I

मोहन : इन्हीं के आगे जब देखो मैंने , ‘द’ वर्ण को लाकर चिपकाया उससे तो जल को देने वाला , बादल अर्थ है निकल आया I

राधा : धर का अर्थ है धारण करना जब कभी पीछे आ जाएगा , बोलो तुम उसका मतलब भी , ‘बादल’ क्या न बन जाएगा?

रमेश : निधि कहते सब भण्डार को इसको भी इनके पीछे लाओ, मेघ के पर्यायवाची पाँच तुम उससे तत्काल स्वयं बनाओI

सीता: ‘धि’ को को भी इनके पीछे कभी कभार हम लगा देते तब भी तो इनके अर्थ क्या सागर समुद्र नहीं हो जाते I

रमेश : ऐसे ही अब हम वर्ण जोड़ कर हम विविध शब्द बना सकते हैं अनुज अग्रज सुखद दुखद के अर्थ शीघ्र हम बतला सकते हैं |

 

ओम प्रकाश शर्मा ,

एक ओंकार निवास ,छोटा शिमला , शिमला -१७१००२ हिमाचल प्रदेश

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