शनिवार, 8 नवंबर 2014

सपना मांगलिक का व्यंग्य - रहिमन जिह्वा बावरी

रहिमन जिह्वा बावरी

रहिमन जिह्वा बावरी

कह गयी सरग पताल

आप तो कह भीतर गयी

जूता सहे कपाल

रहीम जी का यह दोहा आज के युग में सौ प्रतिशत सटीक बैठता है .आखिर खरी खरी कहने वालों को लोग सिर पर बैठाते कम हैं उनके सिर पर लगाते ज्यादा हैं .हमारे कपाल को भी हमारी जिह्वा से बड़ी शिकायत रहती है .क्योंकि चपल,चंचल बातूनी जिह्वा जिम्नास्टिक खिलाड़ी की भांति कब लोच ले जाये कौन जाने?और फिर हमारा बेक़सूर कपाल...आगे आप खुद समझदार हैं .हमारे मनसुख लाल को ही ले लीजिये घटिया तुकबंदी कर उसे शायरी का नाम देने में उन्होंने अनु मालिक को भी पीछे छोड़ा हुआ है .चाहे मैयत का माहौल हो या शादी का उनकी शताब्दी एक्सप्रेस एक बार जो शुरू हो जाती है तो तभी रूकती है जब उनके सामने उनसे भी ज्यादा कोई धाकड़ तुकबंदी आ जाये .और फिर होता है दोनों का एक्सीडेंट .

एक बार की बात है एक पहुंचे हुए नेता किसी संस्था का उद्घाटन करने आये .हमारे बातूनी प्लस शायर मनसुख लाल जी भी जुगत लगाकर पहुँच ही गए वहां .पहले उन्होंने नेताजी की तारीफ में घिसा पिटा एक शेर पढ़ा -"वो आये हमारे दर खुदा की कुदरत है

कभी हम उनको तो कभी बुलाने वालों को देखते हैं "

नेताजी को इस शेर में अपनी तारीफ़ नजर आई और उन्होंने मुस्कुराते हुए गर्व से अपना सीना चौगुना चौड़ा कर लिया .नेताजी कि मुस्कराहट से मनसुख लाल के हौसलों को जैसे पंख लग गए उन्होंने दूसरा चुराया शेर सुनाया -

आस्तीन के सांप यहाँ पर हमने कितने पाले हैं

उजले उजले चेहरे लेकिन दिल सबके ही काले हैं

इत्तेफाक से हमारे नेताजी गोरवर्ण और झक्कास सफ़ेद कुर्ता धारण किये हुए थे .इस शेर के बाद नेताजी के चेहरे का भूगोल थोड़ा गड़बड़ाया .मगर वक्त की नजाकत और वोट खोने के डर से उन्होंने खुद को संभल लिया आखिर चुनाव सर पर जो थे .इतने पर भी मनसुखलाल जी हिचकिचाए नहीं नेताजी की चुप्पी को वह अपनी कामयाबी समझ अपनी काव्य धारा का प्रवाह जारी रखे हुए थे जो गंगा बन हमारे नादान मनसुख भाई के सर पर इस समय विराज मान थी .नेताजी की भ्रकुटी थोड़ी टेडी हो काहली थी मगर मनसुख भाई कहाँ रुकने वाले थे उन्होंने अपना एक पसंदीदा शेर और दागा -

मेरा नेता कहीं खो गया है

देखना कहीं आदमी तो नहीं हो गया है

मनसुख भाई के इस शेर पर जनता और मीडिया वाले तो बुरी तरह खिलखिला पड़े मगर नेताजी की काटो तो खून नहीं वाली हालत थीं .अब उसके बाद नेताजी का क्या हुआ होगा इसका अंदाजा तो आप लगा ही सकते हैं.

तो भैया कुछ रहीम जी के दोहे की तरह अपनी वाणी से अपनी कपाल क्रिया की स्वयं नौबत पैदा करते हैं तो कुछ कबीर जी के दोहे -

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये

औरन कू शीतल करे आपहु शीतल होए

की तर्ज पर अपना आपा ताक पर रख ऐसी वीररस और रौद्र रस वाली वाणी बोलते हैं कि बेचारा सुनने वाला एक झटके में ही ठंडा पड़ जाये .और रही बात उस महान वक्ता की जो ऐसी वाणी बोलता है तो जनाब दूसरों को ठंडा करके कौन शीतल अनुभव नहीं करेगा ?आखिर उसने अपने दिल और दिमाग की समस्त गर्मी सामने वाले पे जो उडेंल दी .

अब आप खुद ही निर्णय करे की रहीम जी के दोहे कि तरह आप कपाल फुड़वाने वाली वाणी बोलना चाहते हैं या कबीर जी का आदेश मान किसी भले आदमी को ठंडा करने की फिराक में हैं ?यह तो तय है आप जिह्वा बाबरी है आप कुछ भी बोले बवाल तो निश्चित है .मीठा बोलोगे तो लोग मीठी छुरी का उपनाम दे देंगे ,कुछ चापलूस कहकर इशारा करेंगे "देख फलां को कैसे फुक्के पे चढ़ा रहा है "अब मीठी जबान की पार्टी को छोड़ दल बदलू नेता की तरह गर्म जुबान की सहायता लेंगे तो हो सकता आपसे इंसानों की श्रेणी छिनकर जानवर की उपाधि से महिमा मंडित कर दिया जाए .और मान लीजिये अपने घबराकर अपनी जिव्हा का इस्तेमाल सीमित भी कर दिया तो यह दुनिया आपको चैन से जीने देगी ?कदापि नहीं .अब आपके मन में यह सवाल फड़फडा रहा होगा कि हमारे चुप रहने से किसी के बाप का क्या नुकसान है ?तो भैया नुकसान यह है कि ना तिल का ताड़ बन पा रहा है और ना राई का पहाड़ बनाने का आप लोगों को शुभ अवसर दे रहे हैं अब वह किसकी आलोचना करे? ,किसके उत्तर का प्रत्युत्तर दें ?आपने उनकी रसपूर्ण जिन्दगी को बेरस जो कर दिया है .

तो साहिबान, कद्रदान, मेहरबान आपकी यह नाजुक जिह्वा आपको चैन से तो कभी बैठने देगी नहीं .यहाँ तक कि आप इसको कटवा भी डालोगे तो सुनने को मिलेगा गूंगा है बेचारा जरूर पिछले जन्म में कोई पाप किया होगा तो देखा साबुत जिह्वा आपको इस जन्म का पापी बनाती है और कटी जिह्वा पिछले जन्म का .पापी तो इसे बनाना ही है .संक्षेप में जिह्वा वाकई बाबरी है .यह कपाल भी तुडवायेगी ,जूते भी खिलवाएगी और ठंडा भी करवाएगी. आप इसके हर साहसिक कारनामे के लिए बस खुद को मानसिक रूप से तैयार रखें .

 

साहित्यकार

सपना मांगलिक (आगरा)

1 blogger-facebook:

  1. व्यंग में हास्य के साथ ही एक शिक्षाप्रद संदेश भी शामिल है

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