बुधवार, 12 नवंबर 2014

सपना मांगलिक का आलेख - कन्या भ्रूण हत्या –परिणाम

कन्या भ्रूण हत्या –परिणाम

करीब दस साल पहले प्रकाश झा कि फिल्म मात्रभूमि में बिहार के उस गाँव की कहानी दिखाई गयी जहां महिलाओं कि की अत्यधिक कमी के चलते वहां के पुरुष अन्य गाँव से युवतियों को खरीद कर उनसे ब्याह रचाते कभी कभी कुछ ठग महिलाओं का वेष धर लड़के वालों से पैसे लेकर उनसे शादी करते .इस फिल्म में दिखाया गया कि एक धनी व्यक्ति को पता चलता है कि एक गरीब शराबी आदमी के घर में एक कन्या है तो वह अपने पांच बेटों का व्याह एक साथ इसी कन्या से करने की बात कहकर कन्या के पिता को हर लड़के के एक लाख के हिसाब से पांच लाख देता है और लड़की का पिता अपनी एकमात्र कन्या का सौदा या विवाह इस व्यक्ति के पुत्रों से कर देता है .शादी के वाद जब पांचों पुत्र उस कन्या पर अपने हक की बाबत झगड़ा करते हैं तो उनका पिता भी उस कन्या पर अपना प्रथम हक बताता है क्यूंकि पांच लाख रुपये तो उसी ने दिए थे .इस तरह वो कन्या एक नयी द्रौपदी बन जाती है जिसके ६ पति हैं .

ये तो अमीरों की बात है जो पैसे खर्च करके अपना वंश और परिवार बढ़ाते हैं दूसरी तरफ वो लोग जिन पर पैसा नहीं है वो अपनी शारीरिक संतुष्टि के लिए या तो अमानवीय कर्म करेंगे या दूसरों की बहु बेटियों पर गिद्ध द्रष्टी रखेंगे जिससे व्यभिचार और स्त्री शोषण की अति हो जायेगी .

कन्या भ्रूण हत्या के बढते इस ग्राफ से विश्व के सभी समाजशास्त्री परेशान हैं पूरे विश्व में दस से पन्द्रह करोड़ कन्या भ्रूण हत्याएं प्रति वर्ष होती हैं जिनमे अकेले भारत में ही हर साल तीन करोड़ कन्या भ्रूण हत्या होती हैं

भारत में पंजाब ,हरियाणा, राजस्थान उत्तरप्रदेश व मध्य प्रदेश में ये कुप्रथा सर्वाधिक व्याप्त है .ये समस्या एकदम गरीब परिवारों की नहीं क्यूंकि इन घरों में कन्याएं बर्तन मांज व खेती और अन्य कार्यों में मदद कर आर्थिक उत्पादक कि भूमिका अदा करती हैं इनसे इनके शराबी पति व जुआरी बाप को फायदा ही होता है नुकसान नहीं .ये समस्या माध्यम वर्गीय से लेकर उच्च माध्यम वर्गीय परिवारों में ज्यादा पायी जाती है क्यूंकि इन घरों में कन्याओं से कोई काम नहीं कराया जाता वरन पढ़ाई लिखाई और शादी विवाह में मोटे दहेज और त्यौहार लड़के वालों द्वारा मांगे जाने के चलते माँ –बाप को कन्या बोझ लगने लगती हैं .एक सर्वे से ये तथ्य भी सामने आया है कि राजस्थान एवं हरियाणा के मंत्रियों और विधायकों के यहाँ बीस प्रतिशत कन्या धन अनुपात से कम है .

हमारे शास्त्रों में कहा गया है “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता “खेद इस बात का है कि धर्म ग्रंथों का ये सूत्र और इसके महत्त्व के प्रति हम हमेशा से उदासीन रहे हैं .ये तथ्य भी बहुत हैरान करने वाला है कि सानया नेहवाल और गीता उसी हरियाणा को देश विदेश में प्रस्तुत कर राही हैं जहां आज भी कन्याओं का पैदा होते ही या तो गला घोंट दिया जाता है या खोलते तेल की कड़ाही में डाल दिया जाता है .तीरंदाज दीपिका झारखंड की हैं और उनके पिता रिक्शा चालक हैं यदि ये गरीब लोग अपनी बेटियों के सपनों को अपनी मेहनत और लगन से साकार कर सकते हैं तो हम जैसे माध्यम और उच्च मध्यमवर्गीय परिवार क्यों उन्हें बोझ समझ मार डालते हैं .

जरूरी है कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए हमें उचित प्रयास किये जाने चाहियें जिसके लिए सोनोग्राफी मशीन में साइलेंट ओव्जर्वर अनिवार्य करना होगा जो गर्भवती महिलाओं के टेस्ट की इमेज तैयार कर सेव कर लेती है और एक साल तक किये सभी टेस्टों का रिकॉर्ड सुरक्षित होना आवश्यक हो .दूसरा सबसे बड़ा कदम दहेज प्रथा को पूर्णतया खतम करके किया जा सकता है .स्कूल व कालेजों में दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या जैसे ज्वलंत विषयों पर भाषण और सेमीनार व ग्रुप डिस्कशन रखने चाहिए जिससे बच्चों में जागरूकता आये .

क्षोभ की बात है हम आधुनिकता की बात तो करते हैं पर विचारों से अभी तक पाषाण बने हुए हैं .सृजन को सहज करने वाली और अंधकारों से उबारने वाली बेटियों पर हमें नाज होना चाहिए अगर हम इसी तरह इनका दमन करते रहे तो बहुत जल्द ही विश्व खत्म हो जाएगा सृजन बंद हो जाएगा और विनाश अपनी गति से चलेगा तो धरती पे कौन बचेगा ?

 

साहित्यकार /कवि/स्वतंत्र पत्रकार

सपना मांगलिक (आगरा)up 282005

Sapna8manglik@gmail.com

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