December 2014

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (अंतिम भाग)

पिछले अंक 9 से जारी.. ठी क दस बजे कलेक्टर ने बैठक ली। बैठक में ज़मीन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी- एस.डी.एम., तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस...

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (9)

पिछले अंक 8 से जारी.. आधी रात को कुम्हार की एक दुःस्वप्न में नींद खुल गई। उसका समूचा शरीर काँप रहा था और तेज़-तेज़ साँसें चल रही थीं। वह उठ...

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (8)

पिछले अंक 7 से जारी.. शा म को जब कुम्हार घर पहुँचा, मैना कर्कश स्वर में किटकिट करती मिली। उसे अंदेशा हुआ ज़रूर कोई गड़बड़ है। और यह गड़बड़ ख़ुद...

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (7)

पिछले अंक 6 से जारी.. थो ड़ी देर आराम करने के बाद पटवारी ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं और उठ बैठा। उसकी ख़ैरियत जानने के लिए भोला, श्यामल का बाब...

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (6)

पिछले अंक 5 से जारी.. सु बह उठते ही, कुम्हार सीधे पटवारी के घर पहुँचा। उस वक़्त वह बाहर संडास में था। और इस तरह कराह रहा था जैसे कोई उसे ह...

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार (5)

पिछले अंक 4 से जारी.. रा त में कुम्हार को भूख नहीं थी। पत्नी के बार-बार कहने पर उसने एक रोटी खाई और ढेरों पानी चढ़ा लिया। इस पर पत्नी नारा...