रविवार, 14 दिसंबर 2014

चन्द्रकुमार जैन का आलेख - ग्रेट शो मैन राज कपूर : जीना इसी का नाम है

 
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ग्रेट शो मैन राज कपूर : जीना इसी का नाम है 
डॉ.चन्द्रकुमार जैन
हिन्दी सिनेजगत के लोकप्रिय अभिनेता, फिल्म निर्माता-निर्देशक राज कपूर के 90वें जन्मदिन के ख़ास मौके पर गूगल ने अपने जाने-माने अंदाज 'डूडल' से उन्हें श्रद्धांजलि दी. डूडल पर राज कपूर की फिल्म 'श्री 420'(1955) के दृश्य को खूबसूरती से उकेरा गया है.इसके बैकग्राउंड में राज कपूर और अभिनेत्री नरगिस की इस फिल्म के चर्चित गाने प्यार हुआ इकरार हुआ की एक तस्वीर भी है. इस पर क्लिक करते ही राज कपूर से जुड़ी सारी जानकारियां सामने आ गईं।याद रहे कि 14 दिसंबर,1924 को जन्मे राज कपूर का निधन 2 जून 1988 को 63 साल की उम्र में हुआ था।
अवार्ड्स से भी ऊँची शख्शियत
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दादा साहेब फाल्के पुरस्कार लेने गए राज कपूर समारोह में ही बेहोश हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए एम्स ले जाया गया था. एक महीने बाद उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. राज कपूर को बॉलीवुड में अपनी मशहूर फिल्म मेरा नाम जोकर, श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है और आवारा  के जरिए दिए गए उनके अनुपम योगदान के लिए जाना जाता है.इसी योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.राज कपूर साहब को 1983 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार (प्रेम रोग),1970 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार (मेरा नाम जोकर), 1965 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार (संगम), 1962 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार (जिस देश में गंगा बहती है) और 1960 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार (अनाड़ी) से नवाजा गया था.
मिला ऊपर तक जाने का मन्त्र
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हिंदी फिल्म जगत के शोमैन कहे जाने वाले दिवंगत अभिनेता-निर्माता-निर्देशक राज कपूर के फिल्मी करियर की शुरुआत भी उनकी तरह ही निराली है। हिंदी सिनेमा में बड़े कीर्तिमान स्थापित करने वाले राज कपूर का फिल्मी करियर एक चांटे के साथ शुरू हुआ था। हुआ यूं कि पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे राजकपूर जब अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ मुंबई आकर बसे, तो उनके पिता ने उन्हें मंत्र दिया कि राजू नीचे से शुरुआत करोगे तो ऊपर तक जाओगे। पिता की इस बात को गांठ बांधकर राजकूपर ने 17 साल की उम्र में रंजीत मूवीकॉम और बांबे टॉकीज फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटब्वॉय का काम शुरू किया।
उस वक्त के नामचीन निर्देशकों में शुमार केदार शर्मा की एक फिल्म में क्लैपर ब्वॉय के रूप में काम करते हुए राज कपूर ने एक बार एक बार इतनी जोर से क्लैप किया कि नायक की नकली दाड़ी क्लैप में फंसकर बाहर आ गई और केदार शर्मा ने गुस्से में आकर राज कपूर को एक जोरदार चांटा रसीद कर दिया। आगे चलकर केदार ने ही अपनी फिल्म 'नीलकमल' में राजकपूर को बतौर नायक लिया।
जीना इसी का नाम है
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राज कपूर को अभिनय तो पिता पृथ्वीराज से विरासत में ही मिला था जो अपने समय के मशहूर रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता थे। राज कपूर पिता के साथ रंगमंच पर काम भी करते थे उनके अभिनय करियर की शुरुआत पृथ्वीराज थियेटर का मंच से ही हुई थी। राज कपूर का पूरा नाम रणबीर राज कपूर था। रणबीर अब उनके पोते यानी ऋषि-नीतू कपूर के बेटे का नाम है।राज कपूर की स्कूली शिक्षा कोलकाता में हुई थी। हालांकि पढ़ाई में उनका मन कभी नहीं लगा और 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी होने से पहले ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि मनमौजी राज कपूर ने विद्यार्थी जीवन में अपनी किताबें-कॉपियां बेचकर खूब केले, पकौड़े और चाट के मौज उड़ाए थे।
शो मैन की दस निराली बातें
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भारतीय सिनेमा के इतिहास में राज कपूर का योगदान उन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके बाद परिवार की चार पीढ़ियां लगातार सिनेमा जगत में सक्रिय रही हैं और मनोरंजन के क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। कपूर परिवार एक ऐसा परिवार है, जिसमें दादा साहेब फालके पुरस्कार दो बार आया। सन् 1972 में राज के पिता पृथ्वीराज कपूर को भी यह सर्वोच्च पुरस्कार मिला था। ये रहीं इस ग्रेट शो मैं की ज़िंदगी से जुडी दस निराली बातें -
1-राज कपूर को अभिनय तो पिता पृथ्वीराज से विरासत में ही मिला था, जो अपने समय के मशहूर रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता थे. राज कपूर ने अभिनय का सफर पृथ्वीराज थियेटर के मंच से ही शुरू किया था.2-राज कपूर का पूरा नाम 'रणबीर राज कपूर' था. रणबीर अब उनके पोते यानी ऋषि-नीतू कपूर के बेटे का नाम है.3-14 दिसंबर 1924 को पेशावर में जन्मे राज कपूर की स्कूली शिक्षा कोलकाता में हुई थी. हालांकि पढ़ाई में उनका मन कभी नहीं लगा और 10वीं क्लास की पढ़ाई पूरी होने से पहले ही उन्होंने स्कूल छोड़ दिया था. राज कपूर स्कूल की कॉपी-किताबें बेचकर केले, पकौड़े और चाट खा जाया करते थे.4-राज कपूर की फिल्मों के कई गीत बेहद लोकप्रिय हुए, जिनमें मेरा जूता है जापानी (श्री 420), आवारा हूं (आवारा), ए भाई जरा देख के चलो और जीना इसी का नाम है (मेरा नाम जोकर) सबसे ज्यादा मशहूर हैं.5-राज कपूर के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि उन्हें सफेद साड़ी बहुत पसंद थी. जब छोटे थे तब उन्होंने सफेद साड़ी में एक महिला को देखा था, जिस पर उनका दिल आ गया था. उस घटना के बाद से राज कपूर का सफेद साड़ी प्रति इतना मोह हो गया कि उन्होंने अपनी फिल्मों काम करने वाली हीरोइनों- नरगिस, पद्मिनी, वैजयंतीमाला, जीनत अमान और मंदाकिनी तक सफेद साड़ी पहनाई. यहां तक कि घर में उनकी पत्नी कृष्णा भी हमेशा सफेद साड़ी ही पहना करती थीं.6-राज कपूर की फिल्मों में मेरा नाम जोकर, श्री 420, आवारा, बेवफा,'आशियाना, अंबर, अनहोनी, पापी, आह, धुन, बूट पॉलिश प्रमुख हैं.7-भारत सरकार ने राज कपूर को मनोरंजन जगत में उनके अपूर्व योगदान के लिए 1971 में पद्मभूषण से सम्मनित किया था. साल 1987 में उन्हें सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी दिया गया था. 8-1960 में फिल्म अनाड़ी और 1962 में जिस देश में गंगा बहती है के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार भी राज कपूर ने जीती. इसके अलावा 1965 में 'संगम', 1970 में मेरा नाम जोकर और 1983 में प्रेम रोग के लिए उन्हें बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था.9-शोमैन राज कपूर को एक अवार्ड समारोह में दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद वह एक महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे. आखिरकार 2 जून 1988 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.10-कपूर परिवार ऐसा परिवार है, जिसमें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दो बार आया. सन 1972 में राज के पिता पृथ्वीराज कपूर को भी यह पुरस्कार मिला था.
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प्राध्यापक, दिग्विजय कालेज,

राजनांदगांव।

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