रविवार, 7 दिसंबर 2014

राजीव आनंद का आलेख - क्या लियोनार्डो दा विंची की माँ थी मोनालिसा ?

क्या लियोनार्डो दा विंची की माँ थी मोनालिसा ?


       महान इतालवी चित्रकार लियोनार्डो दा विंची की मशहूर कलाकृति 'मोनालिसा' जो सदियों से एक रहस्य बनी हुई है, उस रहस्य से पर्दा उठाने का दावा अब एक हांगकांग के इतिहासकार व उपन्यासकार एंजेलो प्रेटिको ने किया है.

       एंजेलो प्रेटिको का कहना है, दरअसल मोनालिसा एक चीनी दासी थी और दा विंची की माँ थी. एंजेलो प्रेटिको की नयी पुस्तक 'लियोनार्डो दा विंची : ए चाइनीज स्कॉलर लॉस्ट इन रेनेंसा इटली' में दा विंची के सुदूर पूर्व यानी ओरिंयटल संबंध पर गहन अघ्ययन-विश्लेषण पिछले दो सालों में किया है. एंजेलो प्रेटिको का कहना है कि ''मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि दा विंची की माँ सुदूर पूर्व की थी. दा विंची के पिता पीयरो दा विंची न्यायालय में नोटरी का कार्य करते थे. कैटरीना उन्ही के एक ग्राहक की दासी थी लेकिन 1452 ई. में लियोनार्डो दा विंची के जन्म के बाद उस अनाम ग्राहक के दस्तावेजों से कैटरीना का नाम गायब हो गया था.'

       एंजेलो प्रेटिको ने सिगमन्ड फ्रायड के उस शास्त्रीय धारणा कि मोनालिसा चित्रकार की माँ है, का उद्धरण दिया है जो फ्रायड ने 1910 में एक निबंध 'दी चाइल्डहुड रिमेनेसेंस ऑफ लियोनार्डो दा विंची' में दिया था. एंजेलो प्रेटिको के दावों के अनुसार कैटरिना चीनी मूल की दासी थी जो बाद में लियोनार्डो दा विंची की माँ बनी. इस रोचक दावे के समर्थन में उनका कहना है कि 'नवजागरण काल में इटली और स्पेन सुदूर पूर्व के दास-दासियों से भरे पड़े थे. कैटरीना उन्ही के एक ग्राहक की दासी थी लेकिन 1452 ई. में लियोनार्डो दा विंची के जन्म के बाद उस अनाम ग्राहक के दस्तावेजों से कैटरीना का नाम गायब हो गया था जिसका कारण संभवत लियोनार्डो के पिता के साथ उसका नाजायज संबंध होना था. कैटरीना को फलोरेंस से बाहर विंसी शहर ले जाया गया था जब वह माँ बनने वाली थी. यद्यपि एंजेलो प्रेटिको के इस थ्योरी पर यूरोप के कई विशेषज्ञों ने नाक-भौं चढ़ा रखा है परंतु एंजेलो का कहना है कि ऐसा कहने वाले वे पहले नहीं है बल्कि विश्व के महान मनोवैज्ञानिक फ्रायड ने यह थ्योरी आज से 104 वर्ष पहले ही अपने निबंध 'दी चाइल्डहुड रिमेनेसेंस ऑफ लियोनार्डो दा विंची' में दे चुके हैं. एंजेलो प्रेटिको का कहना है कि लियोनार्डो दा विचीं के जीवन और उनके कार्य के विभिन्न पहलूओं पर गौर करने से यह स्पष्ट होता है कि उन पर पूर्वी देशों का काफी प्रभाव रहा था, उदाहरण के लिए दा विंची बाएं से दाएं की ओर लिखते थे तथा वह पूर्ण शाकाहारी थे जो यूरोप के लोगों के लिए असामान्य था. मोनालिसा संभवत उनकी माँ की तस्वीर है। अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दा विंची ने अत्यंत पतली ग्लेज की 40 परतों को चढ़ाकर पेंटिंग पर स्मोकी इफेक्ट पैदा किया था. इस इफेक्ट को 'सुमैटो' कहा जाता था, जो दा विंची की खासियत थी. विभिन्न रंगों के साथ मिश्रित ग्लेज परत मोनालिसा के मॅुह के पास हल्का धुधलापन और परछाई पैदा करती है. यही मोनालिसा को उसकी रहस्मय मुसकान देती है जो गौर से देखने पर गायब होती प्रतीत होती है.

       प्रसंगवश यह जानना भी समीचीन होगा कि इतिहासकारों के अनुसार ईसा मसीह के अंतिम भोज पर बनाए प्रसिद्ध चित्र 'दी लास्ट सपर' में विंची ने दो धर्म प्रचारकों के चेहरे को अपनी शक्ल दी है. इस 500 वर्ष पुरानी पेंटिंग में थॉमस नाम के व्यक्ति की दो उंगलियां विजयी होने के चिन्ह के रूप में भी उठाए दिखाया गया है जिसे उनके समकालीनों द्वारा विंची की पंसदीदा मुद्रा कहा जाता रहा है.

       यहां यह भी जानना रोचक होगा कि नासा के वैज्ञानिकों ने चित्रकार लियोनार्डो दा विंची की अमर कृति 'मोनालिसा' की पेंटिंग की झलक चाँद को भी दिखा दिया. मेरीलैंड में केन्द्र से इस तस्वीर को लिए पहला लेजर सिग्नल धरती से 3 लाख 84 हजार 400 किमी दूर नासा के लूनर रिशॅनिसन्स आर्बिटर को भेजा जो वर्ष 2009 से चाँद का परिक्रमा कर रहा है. नासा के वैज्ञानिकों ने कहा कि अंतर भूमंडलीय अंतरिक्षयान के लिए मोनालिसा की तस्वीर को भेजा जाना लेजर संचार के लिए उल्लेखनीय प्रगति है.

       एंजेलो प्रेटिको ने अपने थ्योरी के समर्थन में यह भी कहा है कि महान इतालवी चित्रकार लियोनार्डो दा विंची ने 'मोनालिसा' का एक नहीं दो कृतियाँ बनाई थी. मोनालिसा की दूसरी कृति को उन्होंने बहुत पहले ही कैनवस पर उतार दिया था. कला विशेषज्ञों ने हाल में यह दावा किया है कि उस समय उनकी यह मॉडल काफी युवा थी. कला विशेषज्ञों के अनुसार, दा विंची की इस दूसरी प्रचीन पेंटिंग को 'इसलवर्थ मोनालिसा' को पिछले साल सितंबर में जिनेवा में खोजा गया था. इस खोज के बाद मौजूदा 'मोनालिसा' और 'इसलवर्थ मोनालिसा' की प्रमाणिकता को लेकर खासी बहस छिड़ गयी थी. कुछ कला विशेषज्ञों ने 'इसलवर्थ मोनालिसा' को दा विंची की पेंटिंग मानने से इंकार कर दिया था लेकिन नये शोध के बाद कुछ अन्य कला विशेषज्ञों ने यह दावा किया है कि 'इसलवर्थ मोनालिसा' दा विंची की ही पेंटिंग है जो उन्होंने काफी पहले बनाया था.

       'डेली मेल' के रपट के अनुसार, पेरिस के लौवर संग्रहालय में पिछले तीन शताब्दियों से प्रदर्शनी के लिए रखी गई 'मोनालिसा' पेंटिंग के संबंध में यह समझा जाता रहा है कि इतालवी मूल के दा विंची ने 'मोनालिसा' नामक एक ही कृति बनायी थी जबकि स्विट्जरलैंड स्थित एक कला संस्थान ने अपने हालिया परीक्षण के बाद यह दावा किया है कि दा विंची द्वारा बनायी गयी 'इसलवर्थ मोनालिसा' ज्यादा उत्कृष्ट कृति है. इस पेंटिंग के कार्बन डेटिंग परीक्षण के बाद इसे बनाए जाने का काल 1420 से 1455 ई. के बीच तय की गयी जबकि 'मोनालिसा' की पेंटिंग वर्ष 1516 ई. में बनायी गयी थी. कला विशेषज्ञों के अनुसार 'इसलवर्थ मोनालिसा' पेंटिंग में दा विंची द्वारा तैयार मानवरूपों से ज्यादा मेल खाता है तथा कई अंर्तराष्ट्रीय समूहों ने भी अब 'इसलवर्थ मोनालिसा' की प्रमाणिकता को स्वीकार कर लिया है.

       लियोनार्डो दा विंची द्वारा मोनालिसा की दो-दो पेंटिंग बनाया जाना भी अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है क्योंकि 'इसलवर्थ मोनालिसा' में दिखने वाली स्त्री युवा है जबकि 'मोनालिसा' पेंटिंग में दिखने वाली स्त्री कुछ ज्यादा उम्र की चीनी स्त्री प्रतीत होती है, साथ ही इस पेंटिंग में प्रयोग किया गया बैकग्राउंड लैंडस्केप चीनी लैंडस्केप होने का एहसास कराता है. साउथ चायना मोर्निंग पोस्ट को एंजेलो प्रेटिको ने 3 दिसंबर को अपनी इस चौंकाने वाली थ्योरी से अवगत कराया, जो छपने के बाद चाइनीज वेब यूजरों के बीच खासा चर्चा का विषय बना हुआ है. इन यूजरों का कहना है कि अगर प्रेटिको का यह थ्योरी सत्य साबित हो जाता है तो महान लियोनार्डो आधा चीनी हो जायेंगे. एंजेलो प्रेटिको का कहना है कि इस रहस्य का पूर्णरूपेण उद्घाटन के लिए लियोनार्डो दा विंची के सगे-संबंधियों का डीएनए टेस्ट करवाना आवश्यक प्रतीत होता है, जो फलोरेंस में दफन है. हालांकि कला इतिहासकार वाइटर टेक्सेरा का कहना है कि मोनालिसा का चीनी होने का थ्योरी दूर की कौड़ी है क्योंकि मोनालिसा का चेहरा किसी भी तरह चीनी मूल के होने की बात को साबित नहीं करता है.

       बहरहाल मोनालिसा चीनी मूल की दासी थी और लियोनार्डों दा विंची की माँ थी, इस टॉपिक पर वेब पर खासा बहस छिड़ चुका है. 3 दिसंबर 2014 को जब इसे एंजेलो प्रेटिको ने वेब पर लांच किया तो उसी दिन दोपहर तक लगभग 4 लाख लोगों ने इसे शेयर किया तथा 160000 पोस्ट इस टॉपिक पर पोस्ट किये गए.

 

राजीव आनंद

प्रोफेसर कॉलोनी, न्यू बरगंडा

गिरिडीह-815301

झारखंड

1 blogger-facebook:

  1. Actually she was an Indian from Gujarat. Her real name was "Monali Shah" or Monalisa as we know it ;)

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