रविवार, 21 दिसंबर 2014

पुस्तक समीक्षा - कितनी प्यारी है यह धरती

पुस्तक समीक्षा
बाल कविता संग्रह : कितनी प्यारी है यह धरती

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कवियत्री : अंजना वर्मा
प्रकाशक : उन्नयन प्रकाशन, मुजफ्फरपुर
    लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार अंजना वर्मा आधुनिक भाव-बोध से युक्त चर्चित कवयित्री हैं। शब्द की सार्थकता पर अंजना वर्मा जी को अटूट विश्वास रहा है। वास्तविक और साहित्यिक जीवन व्यवहार में मानवीय मूल्यों के प्रति अगाध विश्वास रखने वाली कवयित्री अंजना वर्मा मूल्यों को रचनाकार के रूप में जीती है और मनुष्य के रूप में भी।
    अंजना वर्मा जी के वैसे तो चार कविता संग्रह, दो गीत संग्रह, एक लोरी संग्रह, एक दोहा संग्रह, एक कहानी संग्रह सहित कुल 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जो पाठकों के बीच काफी चर्चित भी रही है। कहना न होगा कि 'कितनी प्यारी है यह धरती' उनके पूर्व में प्रकाशित दो बाल साहित्य की कड़ी में तीसरा है।
    सर्वविदित है कि बाल साहित्य रचना एक दुरूह कार्य है जिसे अंजना वर्मा जी ने बड़ी सरलता से करती आयी हैं। उन्होंने पुस्तक में अपनी बात में लिखा है कि 'मुझे खुशी है कि मैं कभी इतनी सयानी नहीं हुई कि अपने बचपन को अलविदा कर देती। वह अभी भी मेरे साथ है। मेरा बचपन थोड़ा सुस्त जरूर हो गया है पर रह रहा है मेरे भीतर बड़े आराम से। उसी की आँखों में देख-देखकर मैं बच्चों के लिए गीत, कविताएँ और कहानियाँ लिखती रही हूँ। उन्होंने आशा व्यक्त किया है कि बच्चे इसे पढ़कर बहुत खुश होंगे।'
    यह जानकर पाठकों को खुशी होगी कि मैंने जब अपने बच्चों को 'कितनी प्यारी है यह धरती' पढ़ने को दिया तो वे न सिर्फ कविताओं को बड़े चाव से पढ़े बल्कि दो-एक दिनों में दो-चार कविताओं को कंठस्थ कर मुझे सुनाते रहे। बच्चों को लुभाने वाले आवरण पृष्ठ के चयन के लिए प्रकाशक साधुवाद के हकदार है।
    जैसा कि मैंने पहले कहा है कि शब्द की सार्थकता पर कवयित्री को अटूट विश्वास है। पुस्तक की एक कविता 'स्वर्ग से उपर पृथ्वी' की आखरी पंक्ति ''वायु विष पीते रहते है, वे तो जीवित शंकर हैं'' बहुत ही बेहतरीन बन पड़ी है। शब्दों की ताकत इसे ही कहते है। बड़ी कवयित्री वही होती है जो बहुत बड़ी बात को साधारण तरीके से कह देती है और यही किया है अंजना वर्मा जी ने अपनी छत्तीस बाल कविताओं में। इन कविताओं से गुजरते हुए न सिर्फ बच्चे ही आनंदित हुए अपितु बच्चों के माता-पिता भी उतने ही आनंदित होते रहें हैं।
    आत्मकेन्द्रित और स्वसुखाय होती जा रही वर्तमान साहित्य में बाल साहित्य एक ऐसी विद्या है जिसे साहित्यकार उपेक्षित रखते है। ऐसे समय में अंजना वर्मा जी बाल साहित्य रच कर सराहनीय कार्य कर रही हैं। बाल कविता लिखकर हम अपने समाज के भविष्य में हस्तक्षेप करते हैं। आज जब अंर्तजाल के गिरफ्त में बच्चे अपनी मासूमियत खोते जा रहे हैं, बचपना बच्चों का कहीं खोता जा रहा है, ऐसे क्रूर और निष्ठुर समय में अंजना वर्मा जी की बाल कविताएँ हमारे देश के भविष्य यानी बच्चों को उनकी मासूमियत, उनका नटखटपना वापस दिलाने में सक्षम साबित हो सकता है।  अंजना वर्मा जी अपनी एक कविता बिटिया' में बड़ी अच्छी बात लिखी है-
                   ' बिटिया कई गुणों की खान,
                     बोल रही है मैं सब जानूँ,
                     मत समझो मुझको नादान,

                     बिटिया की प्रतिभा अनंत है,
                     बेटी होती है महान !

राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्यू बरगंडा
गिरिडीह-815301
झारखंड

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