मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

पखवाड़े की कविताएँ

श्याम गुप्त ग़ज़ल ज्ञान ग़ज़ल की कोई किस्म नहीं होती है दोस्तों| ग़ज़ल का जिस्म उसकी रूह ही होती है दोस्तों |   हो जिस्म से ग़ज़ल विविध रूप रंग की...

सोमवार, 28 अप्रैल 2014

असगर वजाहत की कहानी - सूफी का जूता

सूफी का जूता (1) पूरे हिन्दुस्तान में सूफियों की तलाश शुरू हो गई हैं। पुराने, अनुभवी और थोड़ा-बहुत अपने आत्म-सम्मान का ध्यान रखने वाले सूफ...

असगर वजाहत की कहानी - सदन में शहीदे आजम

सदन में शहीदे आजम हमारे लोकतंत्र पर चारों तरफ से हमले हो रहे हैं। लेकिन हमारे प्रतिनिधि इन हमलों को नाकाम कर देते हैं। हो सकता है कि हमारे ...

असगर वजाहत की कहानी - ताजमहल की बुनियाद

ताजमहल की बुनियाद यमुना के किनारे जहां आज ताजमहल खड़ा है वहां ताजमहल बनने से पहले कई हजार बीघा उपजाऊ जमीन थी। यह जमीन बिलसारी, रगबड़ी चौखेट...

असगर वजाहत की कहानी - नो रेडलाइट इन इंडिया

नो रेड लाइट इन इंडिया अमेरिका से हार्वर्ड विजनेस स्कूल से एम.बी.ए.। आक्सफोर्ड से बी.ए.। किंग्स कॉलेज से हाईस्कूल। बीरु भाई का ये सब डिग्रिय...

असगर वजाहत की कहानी - दिल की दुनिया

दिल की दुनिया मुझे यह अन्दाजा बिल्कुल नहीं था कि मैं बुढ़ापे में इतनी जल्दी ‘खिसक’ जाऊंगा। मैं तो ये सोचे बैठा था कि दांतों के दर्द और आंखो...

असगर वजाहत की कहानी - कत्लेआम का मेला

कत्लेआम का मेला आसमान का रंग इतना सुर्ख हो गया जैसे तपता हुआ इस्पात और लगा कि अभी कुछ ही सेकेंड में आसमान फट जाएगा और जमीन के टुकड़े-टुकड़े...

असगर वजाहत की कहानी - यहाँ से देश को देखो

यहां से देश को देखो चांद और जमीन के बीच से देखा जाए तो यह लाखों मील चौड़ा जमीन का हिस्सा है जहां धरती फटकर चीथड़ा-चीथड़ा हो गई है। इस कोने ...

असगर वजाहत की कहानी - मेरे मौला

मेरे मौला याचना, प्रेम, विनय और करुणा...यह सब क्या है...आंखों के सामने तस्वीर आ गई...मेरे मौला बुला ले मदीने मुझे...उलाहना...घिसे पिटे टेप ...

असगर वजाहत की दो कहानियाँ – वर्जित फल तथा लहर

  वर्जित फल पशु अधिकार आन्दोलनकारियों ने हजारों लेख लिखे थे, सैकड़ों प्रतिनिधि-मंडल राजनेताओं से मिले थे, बरसों आन्दोलन चला था तब कहीं जा...

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