सोमवार, 19 जनवरी 2015

प्रमोद यादव का व्यंग्य - परेड के बहाने ओबामा...


‘अजी.. सुनते हैं...काम-धाम के चक्कर में एक खुशखबरी बताना तो भूल ही गई..’ पत्नी ने डिनर लेके आराम से बिस्तर में लेटे टी.वी. देखते पति को सुनाते बोली.
‘ क्या खुशखबरी भई ?.. चलो..सुना भी डालो..सवेरे वाली गाडी से मायका जा रही हो क्या ? ‘ पति ने छेड़ते हुए पूछा.
‘ आप भी न ..हमेशा मजाक के ही मूड में रहते हैं..भगवान् जाने आफिस कैसे चलाते होंगे ? कभी तो कोई बात सीरियसली लिया करें ? ’ पत्नी ने ताना देते कहा.
‘ अच्छा भई..लो.. सीरियसली लेते हैं..अब बता भी डालो..क्या खुशखबरी है ? क्या तुम्हारे भाई साहब आ रहे ? ‘
‘ आ नहीं..जा रहे हैं..’ पत्नी बोली.
‘कौन ? तुम्हारे भाई साहब ? ‘
‘ अरे नहीं जी...हमारे लाडले सुपुत्र राहुल साहब जा रहे हैं..’
‘ कहाँ भई ? पति ने चौंकते पूछा.
 
‘ दिल्ली...देश की राजधानी दिल्ली..गणतंत्र दिवस परेड के लिए उसका सलेक्शन हुआ है..पूरे स्टेट से केवल दो ही बच्चे जा रहे..उनमें से एक है आपका लाडला राहुल ..’ पत्नी गौरवान्वित होते बोली.
‘ अरे वाह...ये तो सचमुच खुशखबरी है यार ..कहाँ है राहुल ? ‘
‘ अपने कमरे में..लेकिन सो गया है..’
‘ कब जाएगा राहुल ? ‘
‘ अजी छब्बीस को परेड है तो दो-चार दिन पहले ही जाएगा..बता रहा था कि स्कूल के टीचर के साथ उसे राजधानी एक्सप्रेस से जाना है...मैं एक बात सोच रही थी जी ...’ इतना कह पत्नी चुप हो गई.
‘ अरे बोलो भी... चुप क्यों हो गई ? क्या सोच रही थी ? ‘ पति ने झिड़का.
 
‘ सोच रही थी कि क्यों न हम भी परेड देखने दिल्ली चले.. जब से पैदा हुई ,टी.वी. में ही देखती आ रही...’
‘ अरे ..तो मैं कौन सा हर साल सलामी लेने दिल्ली जाता हूँ..मैं भी तो यहीं तुम्हारे संग बैठे देखता रहा हूँ..’ पति ने जवाब दिया.
‘ तभी तो कह रही हूँ कि राहुल के बहाने परेड देख आयें...सुना है इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि ओबामाजी हैं.....’
‘ तो ? ’ पति ने पत्नी की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखते कहा .
‘ तो उन्हें भी देख लेते ...दुनिया के सबसे धनी देश के राष्ट्रपति हैं..सारी दुनिया में उनकी तूती बोलती है.. दादागिरी चलती है..भला ऐसी शख्सियत को देखने का अवसर फिर कहाँ मिलेगा ? ‘ पत्नी बोली.
‘ अरे तो यूँ कहो न तुम्हें परेड नहीं ओबामा देखने जाना है..’ पति ने मजाक से ताना मारा .
‘ चलिए...यही समझ लीजिये..इसमें बुराई क्या है ? मेरी तो ये भी इच्छा है कि उनसे वार्ता करूँ..उनका इंटरव्यू लूं..’
बात पूरी भी न हुई कि पति जोर-जोर से ठहाके लगा हंसने लगा.
‘ अरे इसमें हंसने वाली क्या बात है ?..पढ़ी-लिखी हूँ..सालों से टी.वी. में बड़े-बड़े लोगों के इंटरव्यू देखती रही हूँ..एकाध तो मैं कर ही सकती हूँ...’ पत्नी बड़े विश्वास के साथ बोली .
‘ अच्छा बताओ..बाई द वे तुम्हे ओबामा से इंटरव्यू के लिए पांच मिनट का समय मिल जाए तो इन पांच मिनटों में क्या-क्या पूछोगी ? ‘
‘वो तो उनसे समय मिले तभी बताऊँगी..पहले आप दिल्ली जाने की हामी तो भरें ..’
 
‘ ठीक है ..दिल्ली जरुर जायेंगे... प्रामिस.. राहुल के बहाने परेड देखेंगे और परेड के बहाने ओबामा... तुम इंटरव्यू की तैयारी करो ..क्या पता कब कोई चमत्कार हो जाए.. और ओबामा तुम्हारे सामने पड जाए..तैयारी नहीं होगी तो क्या पूछोगी ? थोडा होम वर्क कर लो तो अच्छा रहेगा.. ‘ पति ने मशविरा दिया.
‘ ठीक कहते हैं जी...जब दिल्ली जाना ही है तो होम वर्क करके जाने में क्या हर्ज ? ‘
‘ तो चलो ..फ़टाफ़ट चार-पांच प्रश्न बनाओ जो उनसे पूछना है..और पूछने की प्रैक्टिस करो..समझ लो कि मैं ओबामा हूँ..सबसे पहले क्या पूछोगी बताओ ? ‘
‘ ऊँ..ऊँ..सबसे पहले पूछूंगी उनके देश में आलू-प्याज के क्या भाव हैं..देखो न ..यहाँ तो इसके भाव इतने चढ़े है जितने कि नेताओं के...कमबख्त उतरते ही नहीं और पी.एम.साहब कहते हैं-अच्छे दिन आयेंगे.. क्या ख़ाक आयेंगे अच्छे दिन ? ..सात महीने हो गए तीस-तीस रूपये किलो आलू-प्याज खाते ..’
‘ अरे यार...तुम ओबामा का इंटरव्यू कर रही हो किसी लल्लूप्रसाद का नहीं..अंतर्राष्ट्रीय स्तर का न सही कम से कम राष्ट्रीय स्तर का ही पूछो.. ‘
‘ अच्छा..चलो ..कालेधन पर पूछती हूँ..तो ओबमाजी बताईये...आपके यहाँ जमा हमारे कालाबाजारियों का कालाधन आप हमारे देश को लौटाते क्यों नहीं ? कबसे देश के भोले-भाले नागरिक बार-बार अपना अकाउंट चेक कर रहे.. पंद्रह लाख तो दूर की बात..अब तक पंद्रह रूपये भी नहीं आये ..’
 
‘ कट..कट..यार...ये सवाल नहीं करना ..काला धन अमरीकी बैंकों में नहीं.. यूरोप के स्विस बैंकों में जमा है..वे तो खुद अपने देश के कालेबाजारियों का काला-धन लाने कब से जोर लगा रहे..लेकिन अब तक उनकी भी वहां दाल नहीं गली तो हम किस खेत के मूली ? चलो..नेक्स्ट क्वेश्चन..’
‘ इस बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पूछती हूँ..गरीबी के विषय में..यही एक शब्द है जो पूरे विश्व के बड़े-बड़े आकाओं के जुबान पर तांडव करते रहता है ..हर कोई कहता है कि भारत गरीब देश है..यहाँ गरीब ज्यादा है..पर मैं कहती हूँ कि हमारे यहाँ अमीरों की संख्या अमरीका से भी अधिक है..सच पूछो तो दुनिया में सबसे अमीर देश तो भारत ही है..यहाँ जो भी व्यक्ति प्रतिदिन पच्चीस रूपये से अधिक कमाता है उसे अमीरों की श्रेणी में माना जाता है..आपके यहाँ अमीरी-- गरीबी के क्या पैमाने हैं ओबामाजी ? ‘
‘ गुड..वेरी गुड..तुम तो एकदम बरखा जैसे पूछती हो ..’
‘ कौन बरखा जी ? ’ पत्नी पूछी.
‘ अरे कोई नहीं..चलो आगे बढ़ते हैं.. हाँ..और क्या पूछोगी ओबामा से ? ‘
‘ समय रहा तो ये जरुर पूछूँगी कि ओसामा को पाक में घुसकर मार गिराने वाली घटना पर उन्होंने अब तक कोई फिल्म क्यों नहीं बनाई ? सच कहती हूँ ..खूब चलती फिल्म.. हीरो के तौर पर वे रजनीकांत से भी ज्यादा हिट होते..हमारे यहाँ तो आजकल जीते-जागते लोगों पर फिल्म बनाने का ट्रेंड चला है..यहाँ लोग मरने तक का इन्तजार नहीं करते..’
‘बढ़िया..आगे बढ़ो..’ पति ने हौसला आफजाई की.
 
‘ एक सवाल “नासा” पर पूछूंगी जी..ये लोग अंतरीक्ष-अभियान में अरबों-खरबों डालर खर्च कर पचास साल से चाँद और मंगल में ही लटके हैं..क्या हजारो साल तक ये अंतरीक्ष में यूं ही खोजते –भटकते रहेंगे ? ‘
‘इसका जवाब मैं ही दे देता हूँ यार ..दरअसल कोलंबस ने अमरीका को खोजा तो अमरीका वालों का भी फर्ज है कि उनकी तरह कुछ और खोजें..इसलिए उन्होंने नासा का गठन किया और तब से कुछ न कुछ खोज रहे.. कभी-कभी तो वहां के वैज्ञानिक भी भूल जाते हैं कि वे खोज क्या रहे ? अब पचास साल तक कोई वही-वही काम करता रहे तो उनका पगला जाना लाजिमी है...खैर अब आखिर में ..चलते-चलते वाला सवाल भी कर डालो..’ पति ने कलाई-घडी को देखते कहा.
‘ ओबामाजी...चलते-चलते जानना चाहूँगी कि ओबामा के भीतर बम ज्यादा है या बाम ? ‘
‘ दोनों बराबर है मोहतरमा..बम उन देशों के लिए हूँ जहाँ आतंकवाद-उग्रवाद पैर पसारे बारूद पर बैठे हैं और बाम उन देशों के लिए जहाँ गरीबी,अशिक्सा और बेरोजगारी का वर्चस्व है ..मैं बम भी हूँ और बाम भी..मैं दर्द भी हूँ और दवा भी...’
 
‘ अच्छा..अच्छा..तभी ईरान,अफगानिस्तान और लीबिया, जैसे अनेक देश आपको हाथ जोड़े अक्सर गाते हैं- “तुम्हीं ने दर्द दिया तुम्ही दवा देना..”...वैसे विश्व के तीन-चौथाई राष्ट्र तो राष्ट्रीय गीत की तरह आपके सम्मान में “ तुम्ही तो माता ..पिता तुम्ही हो ” गाते हैं आपके लिए अच्छा ..ओबामाजी अब विदा लेते हैं ..आपने अपना कीमती समय हमारे साथ जाया किया उसके लिए कोटिशः धन्यवाद..नमस्कार...’
‘ वाह...त्वाडा जवाब नहीं जी.. क्या छक्का मारा..अब थोडा पांच मिनट का इंटरव्यू हमारा भी कर लो यार...हम ओबामा तो नहीं पर किसी बम-बाम से कम भी नहीं..देखो घडी के दोनों कांटे बारह पर भिड रहे....’ इतना कहते पति ने एकाएक पत्नी को बिस्तर में खींचा और बत्ती बुझा दी.
फिर अँधेरे कमरे में एक फुसफुसाहट उभरी- ‘ पहले बताओ ये बरखा कौन है ? ’
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प्रमोद यादव
गया नगर, छत्तीसगढ़ , दुर्ग,





















































2 blogger-facebook:

  1. बहुत बढ़िया लिखा गया है ,बधाई

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  2. धन्यवाद ..यूं ही बैठे-ठाले..

    उत्तर देंहटाएं

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