सोमवार, 19 जनवरी 2015

क़ैस जौनपुरी की कहानी - बबीता

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आओ कहें, दिल की बात

बबीता

 

विरल!

मैं आपसे कुछ बोलना चाहती हूं. ठीक है, मैं मानती हूं कि कुछ गलतियां मेरी भी थीं कि मैं आपपे शक करती थी. और...परेशान करती थी. ठीक है...वैसे गलती हो गई ना? लेकिन इसका ये मतलब थोड़े ना होता है कि तुम मुझे छोड़के जाओ. मैं भी तो तुम्हारी बीवी थी? हां? मैंने भी तो तुम्हारी, तुम्हारी पहली बीवी को ऐक्सेप्ट किया था ना? मैं कभी कुछ बोली थी उनके बारे में? जबकि वो आपके साथ में रहती भी नहीं थी. हूं? सात साल तक तुम, ये घर, मेरा घर, आपका घर था. है ना? मेरे बच्चे, तुम्हारे बच्चे थे. तो, अब ऐसा क्या हुआ तुम्हें? ठीक है, गलती किससे नहीं होती है? आपसे भी हुई हैं कितनी बार? इन छ:-सात सालों में आपसे भी बहुत सारी गलतियां हुईं थीं. मैंने भी तो माफ़ किया. इग्नोर किया था ना? कभी, तुम्हें, ऐसा नहीं सोचा, कि नहीं, छोड़ दूं विरल को. हां? हर चीज में मैंने तुम्हारा साथ दिया था.

फिर, अब? मैं भी तो एक साल से तुम्हारा वेट कर रही हूं ना? कि आप आ जाओ. लेकिन आप एक बार भी नहीं सोचते हो कि मैं कैसे जी रही हूं? मैं, कैसे अपने घर को, अपने बच्चों को, कैसे संभालती हूं? नहीं सोचते हो तुम. हां? सिर्फ़ तुम ये समझ रहे हो कि नहीं, मेरा परिवार, मेरा घर अच्छा है, मेरा खानदान अच्छा है. इसके लिए मैं जी लूंगी. लेकिन ये जरूरी नहीं है कि इन्सान, घर, खानदान, या ज्यादा पैसा रहता है, उससे खुश रह लेता है. नहीं रहता ना? कुछ अपने आदमी की भी जरूरतें होती हैं ना औरत को? हां? मुझे भी, मुझे हर तरीके से तुम्हारी जरूरत है विरल. और मैं ये चाहती हूं कि तुम मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ एक बार माफ़ कर दो. एक बार मुझे, एक मौका दे दो. जिससे मैं, मैं तुमसे मिलना भी चाहती हूं. एक बार मिलना चाहती हूं. अब मैं क्या करूं ऐसा, जिससे मैं तुमसे मिलूं?

मैं तुम्हें ऑफ़िस में फ़ोन करती हूं, बात नहीं करते हो. अपने...वैसे फ़ोन करती हूं, तुम, तो कट कर देते हो. तुम जाके, अपनी गीता को बताते हो, अपनी उस वाइफ़ को. तो ये गलत करते हो ना? क्यूं? थोड़ा सा, थोड़ा, थोड़ा भी अगर तुम ये सोचो कि इसने भी मेरे लिए कुछ किया है, क्या मैंने तुम्हारे लिये कुछ नहीं किया, हां? किया ना? उस, जो तुम्हारी वो औरत है, उससे ज्यादा मैंने आपके लिए किया है ना? वो तो आपके साथ रहती भी नहीं थी. हां? मैंने ऐसा तो नहीं किया कि नहीं, आपके साथ मैं शादी करने के बाद, मैंने आपको ऐसा बोला कि नहीं, आप मुझे अपने घर ले के चलो. हां? मैं खुद अपने घर में रहती थी ना? जो मेरा घर है. मैं आपके साथ वहीं खुश थी ना? लेकिन आप, वो जो औरत है वो आपके साथ कभी रही नहीं थी, हां? आप खुद उसके साथ इतना दूर जाके रह रहे हो. हां?

और जब, मैं ये नहीं, मैं ये भी नहीं कह रही हूं, कि नहीं, तुम मुझे अपने, अब तो तुम सिर्फ़ यही बोलते हो ना कि शायद जब तक मैं तुम्हें अच्छी लगी थी तब तक तुम मेरे पास थे. हां? तब तक मैं तुम्हारी बीवी थी. ये घर, घर, आपका था, लेकिन अब कुछ भी नहीं है आपका...तो ऐसा आपको नहीं करना चाहिए ना? एक बार, एक बार सोचो ना आप. प्लीज़. एक बार, अपने ठण्डे दिमाग से सोचो कि मैंने भी आपके लिए काफ़ी कुछ खोया है. यार, मैंने घर, परिवार अपना छोड़ दिया था मैंने. सबकुछ छोड़के आपके साथ आई थी मैं. फिर आप, एक बार क्यूं नहीं समझ रहे विरल? मैं आपसे प्यार करती हूं. बहुत प्यार करती हूं.

एक साल हो गए हैं हमारे झगड़े को. हमको अलग हुए. लेकिन एक साल में ऐसा एक दिन नहीं गया कि मैंने आपको कभी फ़ोन नहीं किया होए. आपको चेक नहीं करती हूं मैं कि आप कब घर पहुंचे हो? आप विरार जाते हो. मैं हमेशा चेक करती हूं. आप घर पहुंच गए हो. आप कहां हो? आप ऑफ़िस गए हो कि नहीं? आपके ऑफ़िस के लोगों से बात करती हूं कि विरल खाना खाया? ये किया? क्यूं? कौन करेगा ये? ये कोई, ऐसे कोई तो नहीं करेगा. जो प्यार करेगा, जो तुम्हारी बीवी होएगी वही करेगी ना? एक बार अगर तुम थोड़ा सा भी सोचो मेरे बारे में, तो शायद मुझे खुशी मिले.

अब, मैंने भी आपके पीछे अपनी ज़िन्दगी खराब की. वो तुम जानते हो, मैंने कैसे-कैसे अपनी ज़िन्दगी खराब की है. हां? तुम्हारी हर चीज को अपने गले लगाया था. तुम भी लगाते थे. लेकिन मेरे एक शक ने, मैं मानती हूं कि मैं शक, और शक भी वही करता है जो ज्यादा प्यार करता है. इसलिए मैंने तुमपे इत्‍ता शक कर लिया था. गलती हो गई मुझसे. अब क्या मैं, उस गलती को तुम माफ़ कर दो, उसके लायक भी नहीं हूं क्या मैं? हां? मैं क्या थी, क्या हो गई हूं, तुम्हारे चक्कर में. हं? हमेशा तुम्हारा इन्तजार करती रहती हूं कि कब विरल आ जाए? कि कब विरल घर का दरवाजा खटखटाएगा?

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qaisjaunpuri@gmail.com

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