सोमवार, 19 जनवरी 2015

मीनाक्षी भालेराव की लघुकथा - नाथ

लघु कथा

नाथ

उसे नहीं  मालूम था अनाथ क्या  होता है ,वह तो बस इतना जानती थी के माँ हमेशा नाथ ,नाथ पुकारती रहती थी उसने माँ को पूछा था मैं नाथ क्या होता है माँ ने बताया था कृष्ण भगवान  पूरे संसार के नाथ हैं।

उसे लगा मैं अनाथ हो गयी हूँ इसका मतलब मैं भगवान से भी बड़ी नाथ हो गयी हूँ क्यों की अब तो मुझे सभी अनाथ -अनाथ बुलाते हैं तो मेरा नाम तो भगवान के नाम से भी बड़ा है।

उस मासूम ने जब तकलीफ़ों को झेला तो उसे पता  जलाये रखी हूँ तो पता चला के अनाथ होना कितना तकलीफ़ दायक होता है

उन्हें पहले सबके लिये सब करना होता है अपने लिये कभी कुछ नहीं कर सकते इसलिए उसने अपने लिए कभी भगवान से कुछ नहीं माँगा।

जो भी माँगती अनाथों के लिये माँगती। 

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