शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

हर्षद दवे का प्रेरक आलेख - हौसला

वर्तन-परिवर्तन

(तौर तरीके)

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हर्षद दवे

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१. हौसला

ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता.

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लोग भी कमाल करते हैं. मनचाहा एडवांस गुकिंग न मिलने पर अपसेट हो जाते हैं और छोटी मोटी असफलता से टूट भी जाते हैं. किन्तु जिंदगी के सामने ऐसे घुटने टेक देनेवालों को समझना चाहिए कि कितने भी बुरे क्यों न हों, हालात सदैव एक से नहीं रहते.

एक अमरिकन युवक को बचपन में ही अपने परिवार के साथ घर से निकाल दिया गया था. परिवार को सहारा देने के लिए उसे टीन एज में काम में जुट जाना पडा. दो साल के बाद माता की मृत्यु हो गई. दस साल के बाद उसे बिजनेस में घाटा हुआ. वह स्टेट असेम्बली में चुनाव में हार गया.

उसी साल उस की नौकरी चली गई. क़ानून के अभ्यास के लिए वह एडमिशन नहीं पा सका. उसने दोस्तों से कर्ज ले कर फिर से कारोबार शुरू किया. शादी की  परन्तु पत्नी की मृत्यु हो गई. वह मानसिक रूप से बिलकुल टूट चुका था. बीमारी के कारण वह छः महिने तक बिस्तर में पड़ा रहा. फिर चुनाव, फिर शिकस्त. इस के बाद के वर्ष में भी उसी असफलता का पुनरावर्तन. वह १८४० से लगातार चुनाव हारता रहा... १९६० में वह चुनाव में जीता और आज उसका नाम इतिहास में अमर हो गया है.

उनका नाम है अब्राहम लिंकन! अमेरिका के प्रमुख बनने से पहले बयालीस वर्षों तक अब्राहम लिंकन के जीवन में खुशी के पल बहुत ही कम और अनहोनी दुखद घटनाएं अधिक घटीं थीं. फिर भी लिंकन लगातार लड़ते ही रहे. आठ बार चुनाव में हारे, दो बार कारोबार में घाटा, स्वजनों की मृत्यु, और छः महिने की बीमारी... टूट जाने के पर्याप्त कारण थे. इस से प्रमाणित होता है कि लिंकन भी आम आदमी की तरह टूट चुके थे... किन्तु उन्होंने हार नहीं मानी, वे निरंतर जिंदगी से जूझते रहे.

अब्राहम लिंकन हो या फिर कायली मिनोग जैसी पोप सिंगर... ऐसे ही लोगों से हमें प्रेरणा मिलती है कि 'हौसला बनाए रखनेवालों की हार नहीं होती.' हिम्मत, मेहनत और पोजिटिव एटिट्यूड का कोकटेल मानवी को हमेशा नई ऊंचाइयों तक ले जाता है. बल्ब का आविष्कार करनेवाले विज्ञानी थोमस एडिसन की प्रयोगशाला आग में जलकर ख़ाक हो गई तब उन की उम्र ६७ साल की थी. दूसरे दिन भस्मीभूत प्रयोगशाला के खंडहर से अवशेष को देखकर उन्होंने अपने बेटे से कहा: 'हमारी सारी गलतियाँ जलकर राख हो गईं. अब हम नए सिरे से प्रारंभ कर पाएंगे'!

जिंदगी में सफलता पानेवालों का स्पिरिट हमेशा ऐसा ही होता है. वे प्रत्येक अंत में एक नई शुरुआत देखते हैं!

केवल पंख होने से आसमान में उड़ा नहीं जा सकता, उड़ने का हौसला भी तो चाहिए!

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