सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

शैलेन्द्र चौहान का आलेख - डिजिटल प्रौद्योगिकी, कला और बाजार

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दुनिया में बड़े कलाकारों की मूल कलाकृतियों उर्फ पेंटिंग्स की कीमत बहुत अधिक होती है। भारत के पिकासो के नाम से जाने जाने वाले एम. एफ. हुसैन को गुजरे अभी बहुत समय नही हुआ है, लेकिन  हमेशा डिमांड में रहने वाली उनकी पेंटिंग्स, पचास फीसदी ज्यादा महंगी हो गई हैं। रिटर्न के मामले में इन पेंटिंग्स ने दूसरे सभी ऐसेट्स को पीछे छोड़ दिया है। दुनिया में कला के कद्रदानों के लिए हुसैन की पेंटिग्स हमेशा आकर्षण का केंद्र रहीं। अब इतनी महँगी पेंटिंग कोई आम आदमी तो खरीद नहीं सकता, यह उसके बूते के बाहर की बात  है। भारत में पेंटिग्स की खरीदारी में कॉरपोरेट हाउस और होटलों की हिस्सेदारी तकरीबन तीन-चौथाई है।  

ऐसे में एक राहत भरी बात यह है कि अब डिजिटल आर्ट के प्रयोग से कला को लेकर अनंत नमूने और कृतियां सृजित की जा सकती हैं। डिजिटल आर्ट कला का वह नया रूप है, जिसमें कोई कृति तैयार करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाता है। इसमें कंप्यूटर आधारित प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर असंख्य तरह के डिजाइन तैयार किये जा सकते हैं। इसीलिये इसे मीडिया आर्ट भी कहते हैं। डिजिटल आर्ट में किसी कृति को तैयार करने के लिए पहले चले आ रहे पारंपरिक तरीकों की बजाय आधुनिक प्रौद्योगिकी का सहारा लिया जाता है। इसके प्रमुख अंगों में कंप्यूटर ग्राफिक्स, एनिमेशन, वर्चुअल और इंटरएक्टिव आर्ट जैसे नए क्षेत्र आते हैं। 

आजकल जहां ओरिजनल पेंटिंग्स के कद्रदानों की संख्या गिरी है, वहीं इन पेंटिंग्स के डिजिटल प्रिंट्स की मांग बनी हुई है। फ़ैशन उद्योग भारत मे लगातार प्रगति पर है , प्रमुख फ़ैशन संस्थान जैसे राष्ट्रीय फ़ैशन अनुसंधान संस्थान और नये डिजाएनर भारत मे फ़ैशन के नये रूप, उनकी पुरानी डिजाईन की समझ व पारंपरिक कलाओं का बदलते रूप में प्रयोग ने एक नए वर्ग को जन्म दिया है। आज डिजिटल आर्ट की सीमाओं और अर्थ का तेजी से बदलाव और विस्तार हो रहा है। इसमें तकनीकी मदद का विशेष योगदान है।

डिजिटल आर्ट को फोटो मैनीपुलेशन भी कहते हैं यानी किसी फोटो में कला के साथ कुछ ऐसे इफेक्‍ट डालना जो देखने में किसी जादू से कम नहीं लगते। ये एक तरह से कलाकार की अपनी क्रिएटिविटी होती है कि कौन सी फोटो में कैसा इफेक्‍ट दे दे। एक बेहतर फोटो मैनुपुलेशनके लिए सिर्फ आपका कलाकार होना ही काफी नहीं इसके लिए आपकी सोच भी अलग होनी चाहिए। कोई तस्‍वीर को बनाते समय  जो भी विचार आपके मन में आएं उन्हें उस फोटो में कैसे समाहित किया जाये। कला के पुराने और नए रूपों का संगम होने के कारण हर वर्ग डिजिटल आर्ट के ज्ञान का उत्सुक होता है और इसको समझना चाहता है। दरअसल डिजिटल आर्ट ने कला को पहले से ज्यादा लोकप्रिय बनाने का काम भी किया है। तकनीक की मदद से पुरानी कला या डिजिटल आर्ट से तैयार कृति को इंटरनेट के माध्यम से दुनिया में कहीं भी देखा जा सकता है।

१९६० के दशक में कंप्यूटर के आगमन के साथ ही कला के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के प्रयोग में विस्तार हुआ था। उसके बाद जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी और तकनीक उन्नत और आधुनिक होती गई, कलाकारों ने इसके प्रयोग से नए डिजाइन बनाने आरंभ किए और कला को नये आयाम दिए। इंटरनेट के आने के बाद इस दिशा में विशेष उन्नति हुई। आज इंटरनेट पर अनेक जालस्थलों पर देखते हैं, कितने ही तरह के डिजाइन और नमूने दिखाई देते हैं। इनमें एनीमेशन आदि का प्रयोग भी किया जाता है। इसके संग यह सुविधा भी होती है कि उन्हें संगीतबद्ध किया जा सके। आज के युवा वर्ग में यह विधा तेजी से अपनी पकड़ बना रही है। इस तकनीक के बढ़ते प्रभाव और उपयोग का परिणाम है कि इस विषय को मीडिया के पाठय़क्रम में शामिल किया जा रहा है। इससे तैयार होने वाली कृतियों के लिए अलग से संग्रहालय तैयार किये जाने लगे हैं। इसका एक उदाहरण है नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय का डिजिटल आर्ट अनुभाग। डिजिटल आर्ट ने कला को पहले से अधिक लोकप्रिय बनाने में भरपूर सहयोग दिया है।

संपर्क : 34/242, सेक्टर -3, प्रताप नगर, जयपुर – 302033 (राजस्थान)

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