शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

सुरेश भाटिया की हास्य व्यंग्य कहानी - कारवां गुजर गया

व्यंग्य कथा

कारवाँ गुजर गया...........

सुरेश भाटिया

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विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हो गये थे। मंत्री मण्डल का गठन भी हो गया था और अब चापलूसी का दौर शुरू हुआ था। जगह-जगह विधायक मंत्रियों का स्वागत सम्मान हो रहा था। कई संस्थायें संगठन आगे बढ़कर आयोजन कर रही थी।

हमारे शहर के सटोरी जेबकतरों जुआड़ियों का संगठन भी भला इस दौर में पीछे क्यों रहता उसने भी एक नव निर्वाचित मंत्री को स्वागत सम्मान के लिए आमंत्रित किया।

इधर-उधर जुगाड़ कर शहर के व्यस्ततम चौराहे पर मंच बनाया गया चोर हार फूल मालायें चुरा लाये जेब कतरे मंच की व्यवस्था देख रहे थे। सटोरी मंत्री जी पर सट्टा लगा रहे थे। मंत्री जी सभा में आयेंगे या नहीं? आयेंगे तो कितनी देर से इस पर खायी-लगायी चल रही थी।

बहरहाल अपने काफिले के साथ मंत्री जी आये कितनी देर या समय पर आये यह स्टोरी जानते थे क्योंकि उनका रूपया इसी बात पर लगा था।

जेबकतरों ने मंत्रीजी को फूल मालायें पहनायी फिर एक तश्तरी में सजाकर ब्लेड कैंची उन्हें भेंट स्वरूप दी संगठन के अध्यक्ष ने स्वागत भाषण पढ़ा फिर माइक मंत्री जी को थमा दिया।

मंत्री जी ने भाषण का पर्चा निकालने के लिए जैसे ही जेब में हाथ डाला तो उन्हें पता चला उनकी जेब कट चुकी थी। भाषण का पर्चा नदारद था। उनकी अजीब हालत हो गई थी। माइक हाथ में था भाषण देना जरूरी था इसलिए जो मन में आया बोलते गये।

भाईयों और बहनों

फिर उन्होंने भीड़ पर एक सरसरी नजर डालकर कहा बहनें सभा में कम हे। यह हमारे देश का दुर्भाग्य है महिलायें घर के चूल्हे-चौकों में ही उलझी रहती है या हम उन्हें उलझाये रखते हैं। नारी शक्ति को आप कम करके नहीं देखें नारी मेरी कमजोरी है। मेरे चुनाव प्रचार में मेरी पार्टी के कार्यकर्ता नारेबाजी कम नारीबाजी ज्यादा कर रहे थे। क्यों................

तभी उनके पी.ए. ने धीरे से टोका

"सर आप विषय से भटक रहे हैं यहां स्टोरी, जेबकतरों की सभा में भाषण देने आये हैं इसलिए उन पर बोलिये।

"ठीक है"

मंत्री जी ने फुस-फुसाते जवाब दिया।

"हां तो मैं कह रहा था आपकी बदौलत में मंत्री पद पर बैठा हूं.........वरना मेरी क्या औकात. मैं चुनाव जीत कर मंत्री बन गया इसलिए आप मुझे अपने से अलग मत समझना. आज भी आपके साथ हूं इसलिए अब मेरी बारी है आपके काम धंधों में, आपके परिवार के कल्याण के लिए कुछ करूं मसलन आपका धंधा अवैध नहीं कहलाये अपराध की श्रेणी में नहीं आये पुलिस आपके अड्डों पर छापे नहीं मारे आदि कई काम है जो मुझे आपकी भलाई के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करके करना है।

तालियां बजाकर सभा में मौजूद लोगों ने उनकी बात का स्वागत किया तो मंत्री में पूरी तरह जोश भर गया।

"मैं जानता हूँ लोग आपको फिजूल चोर, स्टोरी, जेबकतरों की संबोधन देकर अच्छी निगाह से नहीं देखते हैं। परन्तु (छाती ठोंककर) मैं कहता हूं ऐसा कौन व्यक्ति है जो सटोरी नहीं है जेबकतरा नहीं है अब मुझे ही देख लो मैंने लाखों रूपया चुनाव में खर्च किया करोडों कमाऊंगा। चुनाव हार जाता तो मेरा लाखों रूपया डूब जाता यह सट्टा नहीं तो फिर क्या है?

"अभी-अभी मेरे पी.ए. ने बताया चुनाव में मुझ नाचाीज पर लगभग 2 करोड़ का सट्टा लगा था आपकी बदौलत ही मुझे मेरी औकात नजर आयी इसलिए मैं कम से कम आप लोगों का 1 करोड़ का काम जरूर करूंगा"।

पुनः तालियों का शोर हुआ साथ में नारे गूंजे "मंत्रीजी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। जो आपसे टकरायेंगे ताश के पत्तों की तरह बिखर जायेगें।

मंत्री जी में दूना जोश भर गया।

आप लोग क्रिकेट पर सट्टा खेलते है। इसका मतलब सट्टा एक खेल है इस खेल को हम राष्ट्रीय खेल के रूप् में विकसित करेंगे और खेल भावना के साथ लोगों को सट्टा सिखायेंगे, हम देखते है क्रिकेट में हार जीत है। सट्टे में भी हार जीत है। क्रिकेट का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया जाता है परन्तु सट्टे का नम्बर किसी भी चैनल नहीं दिखाया जाता है यह भेदभाव पिछली सरकार करती आयी है, परन्तु अब हम नहीं होने देंगे।

क्रिकेट खिलाड़ियों का सम्मान होता है आपको पुलिस पकड़ती भी है। उन्हें इनाम मिलता है आपको दण्ड, परन्तु अब ऐसा नहीं चलेगा सरकारी खजाने में आपका एक फण्ड होगा। आप जब चाहे कर्ज लेकर सट्टा खेल सकते हैं। आप लोग तो बेहद ईमानदार है अपने खेल के प्रति समर्पित हैं कभी सट्टा फिक्सिंग नहीं करते परंतु क्रिकेट फिक्सिंग होता है सटोरिये दिवालिये हो जाते हैं परंतु क्रिकेट खिलाड़ी का कभी दिवाला नहीं निकलता है।

पी.ए.ने पास खड़े अपने सहयोगी से कहा ''साला अनपढ़ चिंदी चोर जोश में आकर अंट-शंट बके जा रहा है। मैं जानता हूँ, सत्ता पक्ष के विधायकों के हाथों करोड़ों में बिका है और मुफ्त में मंत्री पद भी पा गया तो अपना आपा खो बैठा है। कम्बक्त को यह भी पता नहीं कि मीडिया के लोग यहां पर मौजूद है।''

फिर उसने अपना पी.ए. धर्म निभाया मंत्री जी को घड़ी दिखाकर जता कि समय ज्यादा हो गया है भाषण देना बंद करें। मंत्री ने पी.ए. का इशारा समझ कहा।

भाईयों मैंने आपका काफी समय ले लिया मुझे अब अगली सभा में भी अपना स्वागत कराने जाना है। आपने जो ज्ञापन दिया मैंने देखा आपके संगठन को मैं 1 करोड़ रूपये देने की घोषणा करता हूँ और साथ में शहर के बीचोंबीच जो गांधी चौराहे के पास सरकारी जमीन खाली पड़ी है वह देता हूँ वहां पर आप अपने संगठन का भवन निर्माण कर अपना धंधा सुचारू रूप से चलायें।

लोगों ने तालियां बजाकर घोषणा का स्वागत किया तभी पी.ए. ने मौका देखकर कहा -

''सर 1 करोड़ रूपया इनको दे दोगे तो आपके वैध अवैध बच्चों को क्या मिलेगा''?

मंत्री जी ने रहस्य भरी मुस्कान के साथ जवाब दिया - ''हमने सिर्फ घोषणा की है और तुम जानते हो मंत्री की घोषणा कैसी होती है.........''?

तभी एक पत्रकार ने आगे बढ़कर पूछा- ''सर आप जानते हैं सट्टा, जुआ, जेब काटना एक सामाजिक अपराध है। फिर भी आप इन्हें प्रोत्साहित करके जा रहे हैं क्या यह उचित है...................?

देखिए हम उचित अनुचित नहीं जानते। वे हमारे वोटर हैं और वोटर हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। यही राजनीति का पहला सबक है वोटर को खुश करो भाषण से या आश्वासन से.....................

तभी पी.ए. की मोबाइल की घंटी बज उठी पी.ए.ने मोबाइल कान के पास लगाया उधर से आयी आवाज का पी.ए. के चेहरे पर आते-जाते भावों से पता चल रहा था कोई गंभीर घटना हुई है फिर मोबाइल बंद कर पी.ए. ने कहा।

''सर दुखद खबर है अभी-अभी राष्ट्रपति जी ने मंत्री मंडल भंग कर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया है। क्योंकि आपकी सरकार के खिलाफ उनके पास पुख्ता सबूत पहुंच गये कि विधायकों की जमकर खरीद फरोख्त हुई है और जोड़-तोड़ कर आपकी सरकार बनी थी।

इतना सुनते ही मंत्री जी के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी। खबर आग की तरह पूरी सभा में फैल गयी धीरे-धीरे भीड़ छंटने लगी मंत्री का काफिला तुरंत इधर-उधर रफा-दफा हो गया।

''सर आप अब घर कैसे जायेंगे.............''?

पी.ए. ने कहा।

''लालबत्ती गाड़ी अब आपको नहीं मिलेगी और न ही अब मैं आपका पी.ए. रहा हूँ आप कहे तो हाथ ठेले, ताँगे या रिक्शे का इंतजाम कर दूं।

कहकर पी.ए. लालबत्ती गाड़ी में जा बैठा मंत्री जी पी.ए. को जाते हुए देखते रहे..................किसी जेब कतरे ने टेप रिकार्डर पर फिल्मी गीत लगा दिया................कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे

 

सुरेश भाटिया

23, अमृतपुरी खजुरीकला रोड,

पिपलानी भेल, भोपाल-462022

 

E-mail- Sbhatia916@gmail.com

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