बुधवार, 25 मार्च 2015

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविताएँ

   
आसमान में उड़ने की अब गलती नहीं करुँगी

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      चिड़िया कहती शाला जाऊं,
      मुझको भी अब पढ़ना।
      नहीं सुहाता अब तो मुझको,
      आसमान में उड़ना।

      हवा बहुत जहरीली है मैं,
      ऊपर उड़ न पाऊं।
      दम फूला जाता है मेरा,
      साँस नहीं ले पाऊँ।

      दरवाजों खिड़की आलों में,
      लगी सब जगह जाली।
      छतों मुंडेरों पर लिक्खा है,
      रूम  नहीं है खाली।

      ऐसे में हम कहाँ रहेंगे,
      कौन आजकल पूंछे।
      पत्ते डालें सूख गए हैं।
      पेड़ खड़े हैं छूंछे।

      शाला जाकर करूँ पढाई,
      मैं अफसर बन जाऊँ।
      एक बड़े से बंगले में मैं,
      भी रहने लग जाऊँ।

      ए.सी.  वाली बड़ी कार में,
      मैं भी सफर करुँगी।
      आसमान में उड़ने की अब,
      गलती  नहीं करुँगी।

*******

 

जो बेमन से ख़िलवता है

    चाची बोली खीर  खिलाओ,
    मुझसे ढेर दुआएं पाओ।

    रमियां ने थी खीर खिलाई,
    कक्षा में नंबर वन आई।

    मोहन जब भी खीर खिलाता,
    प्रश्न पत्र झट हल कर आता।

    मुझको खीर खिलाने वाले,
    आज हुए सब हस्ती वाले।

    पर मुनियाँ कस कर चिल्लाई,
    कल थी मैंने खीर खिलाई।

    खीर खिलाकर गई बाज़ार,
    गुमा वहां सोने का हार।

     लल्लू जब भी खीर खिलाता,
     सौ का नोट गुमाकर आता।

      चाची को यदि खीर खिलाई,
      कुछ सामान गुमेगा भाई।

       चाची बोली बात सही है,
      जो मुनियाँ ने अभी कही है।

       सच्चे मन से जो खिलवाता।
       सच्ची  दुआ वही पा पाता।

       जो बेमन से खिलवाता है,
       वह हर पल घाटा खाता है।

2 blogger-facebook:

  1. चिड़िया वाली बाल कविता बहुत पसंदआई.

    अभिनंदन.
    अयगर.

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