सोमवार, 30 मार्च 2015

दीपक आचार्य का आलेख - बातें छोड़ें, काम करें

आलेख (30 मार्च 2015 के लिए)

बातें छोड़ें, काम करें

आओ राजस्थान बनाएँ

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

राजस्थान प्रदेशवासियों के लिए आज उल्लास का पर्व है।

सभी ओर राजस्थान दिवस की धूम है और प्रदेशवासी उत्सवी माहौल में रमे हुए हैं। 

राजस्थान दिवस का यह मौका हमें भावी विकास और तरक्की के आयामों के बारे में ठोस और पक्की धारणाएं बनाते हुए संकल्प लेने की याद दिला रहा है वहीं बीते समय में हमारे द्वारा राजस्थान विकास के लिए किए गए कार्यों के लिए मूल्यांकनपरक आत्मचिन्तन का भी मौका देता है। 

किसी भी राज्य की तरक्की वहाँ के निवासियों की प्रदेश के प्रति समर्पित और आत्मीय भागीदारी पर निर्भर हुआ करती है।

मातृभूमि के प्रति लगाव और निरन्तर विकास के लिए पूर्ण सहभागिता ही वह पैमाना है जो उस क्षेत्र विशेष को अग्रणी बनाता हुआ अन्य प्रदेशों के मुकाबले अन्यतम और विलक्षण पहचान दिलाता है।

आज का दिन दो तरफा चिन्तन के लिए है।

अब तक निभायी गई भागीदारी का मूल्यांकन करें और इसके साथ ही आने वाले समय में और अधिक क्या कर सकते हैं, इस पर गंभीर मंथन की जरूरत है।

साफ तौर पर देखा जाए तो इंसान सामुदायिक उत्थान और विकास के लिए बना है और उसका पहला फर्ज यही है कि वह सामाजिकता के साथ रहे, सौहार्द और मानवीय मूल्यों पर अडिग रहे तथा ऎसा काम करे कि जिससे तरक्की का ग्राफ आगे बढ़ता रहे।

विकास के सुनहरे बिम्ब सभी तरफ सहज दिखाई देने लगें और अपने प्रत्येक कर्म से किसी को दुःख न पहुँचे बल्कि सुख, शांति और सुकून का दिली अहसास हो।

राजस्थान दिवस हम वर्षों से मना रहे हैं, राजस्थान के विकास की बातें भी करते रहे हैं और ढेर सारे धूमधड़ाके भी।

बावजूद इसके हम राजस्थान को अपेक्षित विकास अब तक नहीं दे पाए हैं।

जो कुछ दिख रहा है वह भौतिक विकास, सीमेंट-कंकरीट के ढाँचों, संचार उपकरणों का संजाल और बाहरी आकर्षण ही अधिक प्रतिभासित हो रहा है।

हालांकि पिछले वर्षों से लगातार बहुआयामी विकास के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन वांछित जनसहभागिता का अभाव कहें या समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं की मार, या फिर सम सामयिक समस्याओं के थपेड़ों का कहर। 

बावजूद इन सब के राजस्थान फौलादी ज़ज़्बों के साथ आज विकास की डगर पर तेजी से बढ़ता जा रहा है।

इस बार का राजस्थान दिवस कुछ विशेष है जबकि हर तरफ त्वरित विकास, पारदर्शिता, जवाबदेही और समर्पित योगदान की कितनी ही धाराएं एक साथ मिल गई हैं।

केन्द्र और राज्य की मिली-जुली सहभागिता और आम आदमी के उत्थान की नवीन परिकल्पनाओं के साथ राजस्थान अब विकास के तीव्रतर दौर में पहुँच चुका है।

स्वच्छता अभियान से परिवेशीय शुचिता और विशुद्ध आबोहवा के द्वार खुल गए हैं वहीं परस्पर सकारात्मक सहयोग और जन भावनाओं के अनुरूप विकास की परिकल्पनाओं को पर लगने लगे हैं।

इससे सबल, सशक्त तथा विकसित राजस्थान बनाने की गतिविधियों को खासा संबल प्राप्त हो रहा है।

राजस्थान का वास्तविक और उल्लेखनीय विकास किसी योजना-परियोजना, कार्यक्रम,  अभियान या भाषणों से नहीं हो सकता है।

राजस्थान की तरक्की तभी संभव है जबकि प्रदेश का हर व्यक्ति यह तय कर ले कि उसे जो कुछ करना है वह अपने लिए नहीं करना है बल्कि राजस्थान के लिए करना है, अपनी मातृभूमि और अपने क्षेत्र के लिए करना है।

यह भी तय करना होगा कि हमारी प्राथमिकताएं हम पर ही खत्म नहीं हो जाती बल्कि हमारी प्राथमिकता में हमारा अपना क्षेत्र, अपना राजस्थान है।

जो कुछ करना है वह राजस्थान के लिए ही करना है तभी हम सशक्त और विकसित राजस्थान बनाते हुए समर्थ भारत निर्माण में ऎतिहासिक भागीदारी का इतिहास रच सकते हैं।

अब तक प्रदेश विकास के अपेक्षित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाने का मूल कारण यही रहा है कि हमने अपने आपको ही हर कहीं देखने की आदत बना डाली है, और इसलिए जो कुछ कर रहे हैं वह अपने आपके लिए ही कर रहे हैं।

यही कारण है  कि हममें से अधिकांश लोग चंद फीट जमीन के घेरों, भौतिक चकाचौंध भरे कुछेक संसाधनों और कुछ लोगों के मोहपाश से भरे दायरों में सिमटे हुए हैं और राजस्थान के आसमान को देखने की हमें फुर्सत ही नहीं है।

अपने कत्र्तव्य कर्म में लगे रहें मगर हम सभी का ध्येय मातृभूमि के प्रति फर्ज पूरे करना चाहिए।

जगदीश ने हमें जगत में अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए नहीं भेजा है बल्कि जगत के परोपकार के लिए भेजा है।

हम जहाँ कहीं काम करते हैं वहाँ सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से काम करने का प्रण ले लें तो कोई कारण नहीं कि साल भर के भीतर हमारा राजस्थान कहाँ से कहाँ पहुंच जाए।

हम सभी के सभी लोग कम से कम साल भर के लिए यह तय कर लें कि हम जो कुछ करेंगे वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कत्र्तव्यनिष्ठा से करेंगे, अपने कर्मस्थलों में समय और कार्य सभी मामलों में अनुशासन और मर्यादाओं का पालन करेंगे तथा ऎसा कोई कर्म नहीं करेंगे जिससे राजस्थान की साख में कोई कमी आए।

मात्र साल भर के लिए ही सही, यह संकल्प अपने आप में राजस्थान निर्माण में अपनी वो ऎतिहासिक भागीदारी होगी जिसे पीढ़ियों तक याद भी रखा जाएगा और अनुकरण भी किया जाता रहेगा।

राजस्थान निर्माण के लिए आज के दिन वादों, नारों और भाषणों से कहीं ज्यादा जरूरी है हर व्यक्ति का संकल्पित होना।

आईये अपने राजस्थान को हर दृष्टि से अग्रणी बनाने के लिए मन से प्रतिज्ञा करें और साल भर इस पर चलते हुए ऎसा कुछ करें कि हम सभी के पास उपलब्धियों का पिटारा हो और दिग्दर्शन के लिए देश-दुनिया के पास राजस्थान का इन्द्रधनुषी स्वरूप।

राजस्थान दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ ....।

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