मंगलवार, 31 मार्च 2015

दीपक आचार्य का आलेख - संसार अच्छा न लगे तो छोड़ दें

संसार अच्छा न लगे

तो छोड़ दें

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

बहुत सारे लोग ऎसे होते हैं जो हमेशा ही कहते रहे हैं यह दुनिया खराब है।

बहुत से लोग ऎसे हैं जो किसी न किसी से हमेशा परेशान रहते हैं और कहते हैं कि लोग खराब हैं।

कई लोग ऎसे होते हैं जो अपनी ही समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं और दिन-रात इस बात को लेकर कुढ़ते रहते हैं कि उन्हें उतनी तवज्जो नहीं मिल पाती जितनी मिलनी चाहिए।

आम तौर पर  देखा यह जाता है कि दुनिया में कोई भी इंसान अजातशत्रु नहीं हो सकता है। हर किसी का कोई न कोई शत्रु हो ही जाता है।

यह जरूरी नहीं कि इसकी कोई वजह हो ही। खूब सारे लोग शत्रुता पैदा होने के लिए ही पैदा हुए हैं और इनके जीवन का एक सूत्री कार्यक्रम यही है कि वे बेवजह शत्रुता पैदा करते रहें और इसी से इनका वजूद बना रहता है।

जब तक रोजाना कोई न कोई नकारात्मक काम न कर लें या किसी से दुश्मनी नहीं निकाल लें तब तक चुप नहीं बैठते।

सांसारिक जीवन में हर इंसान के लिए शत्रु और मित्र हमेशा बने रहते हैं और इस कारण से इंसान किसी न किसी उलझन में पड़ा ही रहता है।

लोग हमसे किसी कारण या स्वार्थ से कोई शत्रुता करे यह बात है लेकिन कोई बिना कारण से शत्रुता करे, तो इसका अर्थ यही है कि इंसानियत के दुश्मनों का वजूद अभी कम नहीं हुआ है। 

आम तौर पर दो तरह के इंसान होते हैं। कई सारे लोग ऎसे होते हैं जो सारी दुनिया को खराब बताते रहते हैं और कोई काम नहीं करते हैं।

इन लोगों का हर दिन दूसरों की निंदा के साथ उगता है और सारे संसार की समस्याओं पर गंभीर चिन्तन  और षड़यंत्रों की चिन्ता के साथ समाप्त होता है।

ये लोग जहां काम करते हैं, जहां रहते हैं वहां अपने ही अपने में खोये रहते हैं। खुद कुछ नहीं करते मगर संसार और अपने साथ रहने वाले लोगों को दोष देते रहते हैं।

काफी सारे लोग ऎसे हैं जो हमेशा आत्मदुखी रहने के आदी हैं और इनका कोई क्षण प्रसन्नता से नहीं गुजरता।

यह पूरा संसार एक दूसरे पर आश्रित है, समन्वय और सहकार का प्रतीक है और इसमें तरह-तरह के लोग मिलते हैं जिन्हें अपनेपन से भी, और अनमनेपन से भी साथ रखना पड़ता है और साथ काम करना पड़ता है।

नदी-नाव जैसा यह संयोग जिन्दगी भर चलता रहता है और इस दौर से हर कोई गुजरता ही है। किसी को दोष देने से कुछ नहीं होने वाला।

जिन लोगों को यह संसार बुरा लगता है उन्हें चाहिए कि वे संसार छोड़ देने के लिए तैयार हो जाएं और दूसरी सारी आशाओं, आकांक्षाओं तथा अपेक्षाओं को त्याग कर ईश्वर से यही प्रार्थना करें कि जितना जल्दी हो सके, संसार से दूर कर दे।

संसार में जो लोग जैसे हैं उन्हें स्वीकारें और अपनी बुद्धि तथा विवेक के अनुसार उनका उपयोग करें, उनसे काम लें तथा सांसारिक और परिवेशीय कर्मयोग का प्रवाह निरन्तर बनाए रखें।

आज संसार से भागने की बजाय संसार को अपने अनुकूल बनाकर चलने की आवश्यकता है। और यह तभी संभव हो पाएगा जबकि हम सभी लोग अपने-अपने क्षुद्र अहंकारों से मुक्त होकर संसार के लिए जीने और मरने की आदत डालें।

---000---

2 blogger-facebook:

  1. आचार्या जी,

    विषय तो आपने वाकई अछूता चुना है. बधाई.

    केवल एक प्रस्ताव ( सुझाव न
    हीं कहूँगा) - कि -

    आज संसार से भागने की बजाय संसार को अपने अनुकूल बनाकर चलने की आवश्यकता है।
    में - अपने को संसार के अनुकूल - होता तो शायद ज्यादा अच्छा होता. यह मेरा निजी मत है.

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------