सोमवार, 16 मार्च 2015

हर्षद दवे का लघु आलेख - रुक जाना नहीं...

वर्तन परिवर्तन -

हर्षद दवे

६.रुक जाना नहीं...

सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. असफलता सफलता तक पहुँचने का जरिया बन सकता है. बहुत उत्साहपूर्वक हम किसी कार्य का आरम्भ करते हैं और उसमें जब हमें सफलता नहीं मिलती तो हम हताश हो जाते हैं. लोग असफल आदमी से किनारा कर लेते हैं. सब उदीयमान सूर्य की ही पूजा करते हैं.

असफलता मिलने पर हताश होना या असफल आदमी की उपेक्षा करना दोनों ही गलत बात है. केवल वे ही असफल हो सकते हैं जो सफलता की दिशा में कदम उठाते हैं. असफल मनुष्य के प्रयत्न करने के हौसले की हमें दाद देनी चाहिए और उसे समझना चाहिए, किन्तु अक्सर लोगों का रवैया अकाल का दोष किसान पर थोपने जैसा ही रहता है! ऐसे समय में परिस्थिति एवं दूसरों के व्यवहार के कारण असफल आदमी टूट जाता है.

जरुरत है अपना नजरिया बदलने की. जिंदगी बड़ी ही शातिर होती है. जो हमें कहीं न कहीं पटक देती है. ऐसे में हमें ही साहस जुटाना पड़ता है. देखिए ये पंक्तियाँ क्या सन्देश सुनाती है...

‘दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा...गिर गिर के मुसीबत में सम्हलते ही रहेंगे, जल जाएँ मगर आग पे चलते ही रहेंगे...’ या फिर : ‘चलना ही जिंदगी है, रुकना है मौत तेरी...’

असफलता को सफलता पाने के सोपान समझो और आगे बढ़ो. काइली मिनोग को ही देखिए. इस पोप स्टार को २००३ में विश्व की सब से अधिक सेक्सी पोप गायिका का खिताब मिला था. २००५ में उसे ब्रेस्ट केंसर हुआ. फिर? एक साल तक डिप्रेशन, सदमा, मानसिक अस्थिरता और ट्रीटमेंट के दौर से गुजरने के बाद उसने फिरसे स्टेज शो करना शुरू किया. २००६ में उसे सब से अधिक ‘प्रेरक जानी मानी’ सेलब्रिटि के रूप में सराहा गया. अनुराग बासु की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. हम अमिताभ बच्चन से भी प्रेरणा पा सकते हैं. एबीसीएल का बयानब्बे करोड का कर्ज इस मर्द जाँबाज आदमीने केवल अकेले अपने बलबूते पर चुकता कर दिया. स्टीव जोब्स भी उसी मिट्टी का बना था!

बचपन से ही सुनते आए हैं: ‘रुक जाना नहीं तू कहीं हार के...काँटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के...’ यदि इस मन्त्र को हम अपना जीवनमंत्र बना लेते हैं तो बात बन जाती है.

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1 blogger-facebook:

  1. आलेख लघु ज़रूर है लेकिन बात बड़ी कहता है। सफलता और असफलता तो ज़िन्दगी में लगी ही रहती है लेकिन उससे हताश होके काम को बंद करना ठीक नहीं है। सफलता के मिलने पर असमान पर चढ़ जाना और असफलता के मिलने पर अवसाद के गर्त पर चले जाना ठीक नहीं है। सफलता का हमे आनंद लेना चाहिए लेकिन ये भी याद रखना चाहिए कि हमे उसके लिए क्या क्या मेहनत करनी पड़ी। वहीं दूसरी और असफलता मिलने पर हमे सीख लेनी चाहिए और दोबारा उस कार्य को करने की कोशिश करनी चाहिए। इस आलेख के लिए साधुवाद स्वीकार करें।

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