सोमवार, 16 मार्च 2015

सप्ताह की कविताएँ

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मनीष सिंह


इक दिन वो आएगी

थक गई है राह देखकर पर,
आँखों में चमक अभी बाकी है।
धूप से मुरझाए हैं पर,
फूलों में महक अभी बाकी है।

है विश्वास मन में अभी तलक,
मेरी दुआ कभी तो रंग लाएगी।
फूलों की महक भी मुझसे,
कहती है इक दिन वो आएगी।

झूठ सही लेकिन फिर भी,
एक बार मुझे अपना कह दे।
ले ले मेरी सारी खुशियाँ,
और अपने गम मुझको दे दे।

सब भूल के उसकी आँखों में,
जीवन भर उसका होके रहूँगा।
सच हो जाए गर ख्वाब मेरा,
तो उससे बस इतना ही कहूँगा।

कि दिल ने तुमको पूजा है,
और आँखों ने इकरार किया है।
सच कहता हूँ जबसे देखा,
तबसे तुमको प्यार किया है।

अब तो खुद भी भूल गए हैं,
कबसे तुमको प्यार किया है।
शायद जबसे जीना सीखा,
तबसे तुमको प्यार किया है।

तुम बिन सूना मन का मंदिर,
तेरे लिए कुछ भी यार करूँगा।
जब तक चलेंगी मेरी साँसे,
जब तक तुमसे प्यार करूँगा।

आग से तपते इस सेहरा में,
बहार कभी तो छाएगी।
कहता है मन मेरा मुझसे,
हाँ इक दिन वो आएगी, हाँ इक दिन वो आएगी।
-

 

कवि परिचय

नाम: मनीष सिंह
व्यवसाय: सॉफ्टवेयर इंजीनियर (साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ )
ईमेल : immanish4u@gmail.com
वेबसाइट : http://www.immanish4u.com
वर्तमान पता: 017, प्रिस्टिन पैराडाइस अपार्टमेंट ,
शान्ति निकेतन स्कूल के पास ,
अनुग्रह लेआउट , बिलेकाहल्ली , बैंगलोर ( कर्नाटक ) – 560076

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जय जय राम आनन्द


बाल गीत

बे मौसम बरसात
बेमौसम आती बरसात
बतलाती अपनी औकात
आँधी ओला दे तूफ़ान
सब जग को करती हैरान
फसलें होती सब बरबाद
अधर अधर छाता अवसाद
खेलकूद बच्चों का बंद
भूल जांय वे गाना छंद
बड़ी निर्दयी यह बरसात
जो देती अनगिन अवसाद
[भोपाल:१६.०३.२०१५
Dr Jai Jai Ram Anand
E7/70 Ashoka Society Arera colony,Bhopal, MP 462016

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अनुज कटारा


1.भूले पल
भूले बिसरे पलों को याद किया नहीं करते
और कर भी लो तो उन्हें जिया नहीं करते|
छोड़ गये जो तुम्हें वापस कभी ना  आयेंगे
बस अपनी यादों से तुम्हें तड़पायेंगे
यादों के इस सैलाब में अकेला जिया नहीं करते
और भूले हुए पलों को याद किया नहीं करते
जैसे पुराने घावों को कुरेदा नहीं जाता,
वैसे यादों को फिर से जिया नहीं जाता
क्योंकि बीता हुआ समय वापस कभी ना आयेगा
और आ भी गया तो फिर
बिछुड़ जाने के डर से कहाँ जी पायेगा||

2.दिल मेरा भी रोता है
भारत माँ की परम्पराओं का नाश देख
हिंदी का बेटा कहता है -दिल मेरा भी रोता है
और अफ़सोस सभी को होता है|
राम की इस पावन भूमि पर मर्यादा का अंत हुआ |                    
जिस इज्ज़त के लिए सीता ने अग्नि परीक्षा का वरण किया,    
और वही द्रोपदी की  लाज के कारण महाभारत का रण हुआ |
लेकिन आज देख नारी की हालत
दिल मेरा भी रोता है और अफ़सोस सभी को होता है ||
भारत माता की इस  भूमि पर
आतंकवाद और नक्सलवाद का साया है|
युवा वर्ग भी अवसर ना मिलने से परेशानी में आया है|
भूख से तड़पते बच्चों को देख
माँ का दिल भी रोता है और अफ़सोस सभी को होता है||
भोजन उगाने वाला ही स्वयं भोजन के लिए रोया है|
महँगाई को देख सभी लोगों का दिल भी रोया करता है|
जिस भारत माता को महापुरूषों ने अपने खून से सींचा है|
उस माता की गोद में
स्वयं के बेटों को मरता देख दिल मेरा भी रोता है|
दिल मेरा भी रोता है||
3. मेरा भारत शिवम् सुंदरम
मुकुट हिमालय ह्रदय में गंगा, चरणों में सागर अगम|                              
मेरा भारत शिवम् सुंदरम||
गोद खिलाया इस माटी ने गंगा जी का जल जहाँ
सूर का श्याम बजायें बन्शी तुलसी का रघुवर यहाँ
      
कर्म प्रधान लोग वहीं, गीता का ज्ञान जहाँ
प्रेम का पवित्र बंधन में मीरा का प्यार अगम|
मेरा भारत शिवम् सुंदरम||
महापुरुषों ने खून बहाया तब आजादी का सूरज उग आया
हुआ लोकतंत्र देश प्यारा तब निर्धन जन हर्षाया
भारत माता की रक्षा में पुत्रों ने प्राणों की आहुति लगायी है
प्राणों से प्यारे भारत की महिमा अनुपम्।                                      
मेरा भारत शिवं सुन्दरम्||
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देवेन्द्र सुथार


आज की नारी

मैँ आज की नारी हूँ
सब पे भारी हूँ
मेरी भी अस्मिता है
मेरा भी अस्तित्व है
मैँ एक माँ हूं
मै एक बेटी हूँ
मैँ एक बहू हूँ
कभी सीता तो कभी सावित्री
विषम परिस्थितियोँ मेँ चण्डिका की कृति
मुझे क्योँ बनाया दामिनी और निर्भया
आखिर मेरा क्या कसूर मैंने क्या किया
मैँ रुपवती श्रृंगार मेरा सुंदर सुशील
फिर भी मुझे तुम कहते हो सरासर अश्लील
अरे! नामर्दों छोडो अपनी मुर्दोनी
अब मैँ हूँ झांसी की रानी
अब दूंगी मैँ कुर्बानी॥

-बालकवि देवेन्द्र सुथार
गांधी चौक,बागरा,जालोर,राजस्थान।
devendrasuthar196@gmail.com

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