शुक्रवार, 20 मार्च 2015

दीपक आचार्य का आलेख - आरोग्य की गारंटी : वानस्पतिक औषधियाँ

नव वर्ष की शुरूआत होती है वानस्पतिक औषधियों से

नीम रस देता है सेहत की मिठास

साल भर आरोग्य की गारंटी देता है कड़वा अमृत

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

भारतीय नव वर्ष की शुरूआत में नव वर्ष का अभिनन्दन किये जाने की परंपराओं मआज भी विभिन्न स्थानों पर अपनी सेहत की रक्षा के लिए नीम के कड़वे रस का पान करते हुए ‘‘शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्...’’ का पैगाम गूंजता है।

हर अंचल में प्राचीन काल से चैत्र नव वर्ष से नीम के रस का सप्ताह से लेकर पखवाड़े, इक्कीस दिन और माह भर के लिए पान किया जाता है। लोगों का पक्का अनुभव है कि इससे साल भर तक किसी भी प्रकार के रोग नहीं होते और स्वास्थ्य रक्षा होती है। इस अवधि में रोजाना प्रातःकाल कड़वे नीम की कोंपलों का रस निकाला जाता है और इसका खाली पेट पान किया जाता है।

अब तो  कई स्थानों पर नीम का रस निकाल कर बेचने के लिए बाकायदा दुकानें लगती हैं जहां सवेरे नीम पान के शौकीनों का तांता बंधा रहता है।  इन दुकानों से गन्ने के रस की तर्ज पर गिलासों में नीम का हरा रस पीने के लिए दिया जाता है। कई परिवारों में सामूहिक रूप से नीम का रस निकाल कर पूरे परिवार के लोग इसका पान करते हैं।

image

नीम का रस भले ही पीने में कड़वा लगे लेकिन जानकारों का मानना है कि यह सेहत के लिए अत्यन्त लाभकारी है। इसके नियमित पान से शरीर में अप्रत्याशित रूप से प्रतिरोधक शक्ति का भण्डार जमा होता है जो साल भर तक शरीर की रक्षा करता है।

यही नहीं तो नियमित रूप से नीम के सेवन से असाध्य रोगों से मुक्ति पायी जा सकती है और किसी भी प्रकार के विष का प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता। मधुमेह, चर्म रोग, बुखार आदि बीमारियों से मुक्ति और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमताओं के विकास की दृष्टि से नीम का रस अत्यन्त लाभकारी है।

image

चैत्र माह में सात से लेकर इक्कीस दिन अथवा पूरे माह जो नीम रस का पान कर लेता है उसे वर्ष में विभिन्न बीमारियों और संक्रमण का सामना नहीं करना पड़ता।  इस दौरान नीम की पत्तियों  का बहुआयामी उपयोग किया सकता है। रस पान के बाद पत्तियों के घोल को चर्मरोग वाले स्थान पर लगा देने, इसे पानी के उबाल कर स्नान करने आदि से भी लाभ होता है।

इसके अलावा साल भर आरोग्य की कामना से लोग चैत्र प्रतिपदा को मिश्री की डली एवं काली मिर्च मिलाकर सेवन करते हैं। अब तो विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भी नीम रस निःशुल्क प्रदान करने की परंपरा शुरू की गई है। सामाजिक सेवा के इन सरोकारों का लाभ आम लोगों को प्राप्त हो रहा है। नीम की कड़वाहट पर न जायें, यह जितना कड़वा है उतना ही अपनी सेहत के लिए मिठास और आनंद देने वाला है।

---000---

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------