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रचनाकार.ऑर्ग के लिए गर्व और खुशी का पल

यह रचनाकार.ऑर्ग के लिए गर्व और खुशी का पल है. गिरिराज भंडारी के ग़ज़ल संग्रह - तेरे नाम का लिए आसरा का लोकार्पण पिछले दिनों हुआ. गिरिराज भंडारी ने रचनाकार.ऑर्ग के माध्यम से अपनी सृजनशीलता प्रारंभ की थी और आज वे इस मुकाम पर पहुँचे हैं. गिरिराज जी को बधाई व शुभकामनाएँ!

रचनाकार.ऑर्ग गिरिराज भंडारी जैसे अनेकों रचनाकारों को लान्चिंग प्लेटफ़ॉर्म प्रदान कर चुका है. प्रसिद्ध, पुरस्कृत व्यंग्यकार, भास्कर.कॉम के कंटेंट प्रमुख अनुज खरे भी इनमें शामिल हैं - जिनके प्रयोगवादी, मौलिक शैली के व्यंग्य को रचनाकार.ऑर्ग ने पहले पहल प्रकाशित किया था.

प्रस्तुत है गिरिराज भंडारी का पत्र अविकल रूप में -

आपके यहाँ से शुरु किया सफर के एक पड़ाव पार करने की खुशी आपसे साझा कर रहा हूँ

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लगभग डेढ़ साल पहले  आपके रचनाकार.कॉम में रचनायें भेजा करता था । फिर अचानक रचनायें भेजना बंद कर दिया था , जिसका मुझे दिली अफसोस लगातार रहा और आज भी  है । इसके लिये मेरे पू. बड़े भाई ( श्री अखिलेश श्रीवास्तव ) से डांट भी खानी पड़ी । उसका एक मात्र कारण ये था कि मैं ग़ज़ल के अरूज सीखने में लगा हुआ था , एक बड़े काम को अपनी उम्र के 59वें साल में उठा लिया था । जिसके कारण मैं - ओपन बुक्स आन लाइन.काम के नियमों से बन्धा हुआ था । वहां अरूज़ के जानकार बहर में गज़लें कहना सिखाते थे । वहाँ का भी यही नियम था कि अप्रकाशित रचनायें ही प्रकाशित की जायेंगी और बिना प्रकाशित हुये उस्तादों के द्वारा जाँची परखी और सिखाई ही नहीं जा सकती थीं । अत: कठोरता से नियम पालन ज़रूरी था ।
                     आज मुझे इस तपस्या का प्रतिफल , पहली खुशी मिली , मेरी एक ग़ज़ल की किताब अंजुमन प्रकाशन इलाहाबाद से छप चुकी है , अभी कुछ दिन हुये विमोचन कार्यक्रम से लौटा हूँ ।किसी भी सफर का पहला क़दम भी उतना ही महत्व्पूर्ण होता है जितना आखिरी , और मेरा पहला क़दम आपके यहाँ से शुरू हुआ था , अतः आपको शामिल किये बिना मेरी खुशी अधूरी रह जाती । मेरा आभार प्रदर्शन अधूरा रह जाता  अतः मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि , आपसे मिले शुरुआती सहारा के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ , रचनाकार.काम का आभारी हूँ  ॥
अभी किताब की फोटो अटेच किया हूँ , पर मैं आपको एक किताब भेंट करना चाहता हूँ , अतः आपको स्वीकार हो तो मुझे लौटती मेल से अपना पोस्टल एड्रेस भेजने की कृपा करेंगे ॥
आदरणीय रवि भाई , आपक पुन आभार .  

 

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आपका - गिरिराज भंडारी

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रघुवीर शर्मा

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आदरणीय रघुबीर भाई , आपका आभार ।

आदरणीय रवि भाई एवँ रचनाकार. अर्ग का हृदय से आभारी हूँ ॥

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