May 2015

कहानी - चेहरा

मोनी सिंह सुबह उठते ही शीशे में मैं अपना चेहरा देखा करती हूं। हर दिन की शुरूआत मेरी वही से होती है। जिस दिन न देखूं कुछ अधूरा सा लगता ...

सप्ताह की कविताएँ - मुझे पिता बनना है

  मधु संधु मुझे पिता बनना है बैक ग्राउंड म्यूजिक की तरह मन की परतों में  निरंतर बजता है एक उद्घोष  कि  मुझे पिता बनाना है- स्पष्...

किन्नरों का अपना साम्राज्य

- बाल मुकुन्द ओझा         किन्नरों का देश-भर में अपना साम्राज्य है। वे अपने लिये एक अलग और अनूठी दुनियाँ का सपना देखते हैं और उसी में ज...

मौत का इंतजार क्यों ?

 डॉ. दीपक आचार्य दुनिया की भी अजीब रीत है।  जिन्दा रहते हैं तब तक कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते रहते हैं। साँप-बिच्छुओं और कैंकड़ों जै...

हास्य - व्यंग्य : फ़ेसबुक में गहरे पानी पैठ ....

सुशील यादव फेसबुक के गहरे पानी में सर्फिंग का शानदार समय चल रहा है | कबाडियों को छोड़, हर किस्म के लोग जुड़ने लगे हैं,उनको अपने कबाड़ जोड़...

बाल कहानी - माईक का भाप के इंजन से चलने वाला एक फावड़ा

 वर्जिनिया बर्टन  हिंदी अनुवाद -  अरविंद गुप्ता   माईक के पास भाप के इंजन से चलने वाला एक फावड़ा यानी स्टीम शवल था। शवल सुंदर और लाल रंग...

ज्ञान -विज्ञान : आप अपने आसपास की मिट्टी के बारे में कितना जानते हैं?

मिट्टी  लौरी बेकर  हिंदी अनुवाद – अरविन्द गुप्ता   लौरी बेकर का जन्म 1917 में बरमिंघम, इंग्लैन्ड में हुआ। 1937 में उन्होंने बरमिंघम...