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किन्नरों का अपना साम्राज्य



- बाल मुकुन्द ओझा
        किन्नरों का देश-भर में अपना साम्राज्य है। वे अपने लिये एक अलग और अनूठी दुनियाँ का सपना देखते हैं और उसी में जीना मरना और रच-बसना चाहते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही अपने एक ऐतिहासिक फैसले में किन्नरों को संवैधानिक मान्यता प्रदान कर दी है। किन्नरों को अलग श्रेणी में रखने के सरकार को निर्देश दिये गये हैं। इससे किन्नरों में खुशी की लहर व्याप्त हो गई और उन्होंने यह खुशी सार्वजनिक रूप से व्यक्त भी की। हाल ही में एक ट्रांसजैंडर के कॉलेज प्रिंसिपल बनने की खबर भी सुर्खियों में आई. प्राचीन समाज में ये स्वीकृत थे, परंतु दुख की बात है कि आधुनिक समाज में स्वीकार्यता के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की ओर देखना पड़ रहा है।

       आमतौर पर किन्नरों का अपना अलग से कोई रोजगार या व्यवसाय नहीं है। वे नाच-गा कर और बधाई लेकर अपना जीवन यापन करते हैं। किन्नरों की देश भर में संख्या लाखों में है। परिवार में शादी अथवा बच्चे के पैदा होने पर किन्नर बधाई लेते हैं। यह बधाई कोई छोटी-मोटी नहीं अपितु पाँच अंकों में सामान्य रूप से होती है। किन्नर हठी है, अपनी बात से पीछे नहीं हटते और मांगी गई राशि अपनी हैसियत से कई गुणा अधिक वसूल करते हैं। उनका अपना बनाया कानून है। वे पुलिस अथवा किसी कानून से नहीं डरते और जोर जबरदस्ती से अपनी बधाई वसूल करते हैं। सामने वाले परिवार की कोई हैसियत नहीं हो तब भी वे अपनी बधाई दबंगाई से वसूल करते हैं। कई बार लोग इधर-उधर से उधारी लाकर उन्हें यह नजराना भेंट करते हैं।

बधाई लेने किन्नर कभी अकेले-दुकेले नहीं जाते अपितु समूह में जाते हैं। दो-तीन बड़े टेम्पुओं अथवा बड़े वाहन में जाना पसन्द करते हैं। समूह में 5 से 10 की संख्या में जाने पर उनका रोब-दबाव पड़ता है और फिर घर में जबरदस्ती घुसकर फूहड़ ढंग से अपना नाच-गाना शुरू कर देते हैं। उन्हें किसी की लाज शर्म से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो अपनी बधाई या मन माफिक नजराना चाहिये। यदि आपने उनकी पसन्द का नजराना दे दिया तो वे भरपूर आशीष देकर हंसी-खुशी चले जाते हैं अन्यथा भारी गाली गलोज और दुर्व्यवहार पर उतर आते हैं। कई बार मार-पीट भी कर बैठते हैं। पुलिस बुलाने पर वे भी सहयोग नहीं करते और ले-दे कर मामले को सुलझाने की राय देते हैं। यह भी देखा गया है कि किन्नरों के अपने-अपने सुरक्षित इलाके हैं और वे अपने इलाके में दूसरे किन्नरों को घुसने नहीं देते। कई बार नकली किन्नर भी बधाई लेने आ धमकते हैं और फिर असली-नकली में घमासान शुरू हो जाता है। कई स्थानों पर किन्नरों की अच्छी धाक है जहाँ लोग  इन किन्नरों को स्वेच्छा से भी बधाई देते हैं। किन्नर कई बार चुनाव में भी खड़े हो जाते हैं। कहीं-कहीं चुनाव जीतने में भी सफल हो जाते हैं।

        मगर किन्नरों के बारे में लोगों की अच्छी राय नहीं होती इसका एक मुख्य कारण किन्नरों की जोर जबरदस्ती से वसूली है। अब तो किन्नर रहीसाई ठाठ बाट से रहने लगे हैं। हाल ही में एक किन्नर मुन्नी बाई और उसकी शिष्याओं को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह वारदात राजधानी जयपुर के सांगानेर थाना क्षेत्र में हुई। मुन्नी बाई स्वयं को किन्नरों की उस्ताद बताती है।

शहर के अस्पतालों में उनकी निगाह लगी रहती है जहाँ से वे बच्चे के जन्म की सूचना प्राप्त करते हैं। इसी भांति विवाह स्थलों पर भी घूमते रहते हैं। जहाँ से उन्हें विवाह की पूरी जानकारी मिलती है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर वे धावे मारते हैं और वसूली करते हैं। इनकी मनमानी को रोकने के कोई उपाय नहीं है। किन्नरों पर अनेक पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज हैं। शांति भंग से लेकर जबरदस्ती वसूली, मारपीट और हत्या तक के मुकदमों में किन्नर वांछित हैं। केवल पुलिस प्रशासन के भरोसे इनकी वसूली नहीं रोकी जा सकती। जोर-जबरदस्ती की वसूली रोकने के लिए समाज को जागरूक होना पड़ेगा।

- बाल मुकुन्द ओझा (स्वतंत्र पत्रकार)
क्.32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218
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किन्नरों के बारे में आधी अधूरी जानकारी देने से बेहतर है उन्हें पूरी तरह से समझा जाये इसके लिए पर्याप्त शोध व् अध्ययन की जरूरत है ..लेखक ने प्रयास किया साधुवाद ...जो भी विवरण यहाँ दिए वह जादातर नकली किन्नर कर रहे हैं ...महेंद्र भीष्म 08004905043

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