विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

बेशर्म हैं नंगे-भूखे

image

डॉ. दीपक आचार्य

दुनिया में खूब सारे लोग हैं जिन्हें न किसी की परवाह है, न कोई लाज-शरम।

इन लोगों के लिए मर्यादाओं, नियम-कानूनों और अनुशासन से लेकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में संस्कारों का कोई महत्त्व नहीं है। 

हमारे लिए इंसान के रूप में पैदा हो जाना ही काफी नहीं है बल्कि इंसानियत को जीवन भर धारण करते हुए जीना और दूसरों को मस्ती के साथ जीने देने तमाम अवसर मुहैया कराना अधिक जरूरी है।

इंसान होकर इंसान की तरह जीना सभी लोगों के भाग्य में नहीं होता।

यही कारण है कि इंसानों की बस्तियों में खूब सारे लोगों के बारे में अक्सर कहा जाता रहा है कि ढेरों ऎसे हैें जिन्हें इंसान तक नहीं कहा जा सकता।

ऎसे अनगिनत लोगों का जमावड़ा दुनिया के हर कोने में है।

जहाँ कहीं कोई सख्त अनुशासन है वहाँ ये लोग मवेशियों के बाड़ों में रहने वाले जानवरों की तरह पूरे अंकुश में हैं इस कारण इनकी उच्छृंखलता पर लगाम कसी हुई है।

लेकिन अधिकांश स्थानों पर ये कहीं भी आने-जाने और कुछ भी करने को स्वच्छन्द, निरंकुश और मुक्त हैं क्योंकि इन पर कोई नकेल नहीं कसी हुई है।

इंसान बनकर जीने वाले लोग अपनी कुल परंपरा, वंश आदर्शों, मानवीय मर्यादाओं, संस्कारों तथा सिद्धान्तों पर जीते हैं लेकिन  दूसरी तरह के लोगों के लिए अपना समग्र जीवन स्वार्थपूर्ति और भोग प्राप्ति का ही दूसरा नाम है और इसलिए उन लोगों के लिए मर्यादाएं, अनुशासन और संस्कार सब कुछ बेमानी हैं।

इनके जीवन का ध्येय अपने लिए जीना होता है और इसके लिए कुछ भी कर सकने को अपनी काबिलियत मानते हैं।

इन लोगों को कोई सा काम करने, कोई सी बात कहने और कुछ भी कर गुजरने से कोई परहेज नहीं होता यदि अपना उल्लू कहीं सीधा हो रहा हो तब।

इन लोगों के लिए ज्ञान, हुनर और अनुभव अपनी आकांक्षाओं की प्राप्ति की सीढ़ियाँ भर होते हैं, इसके बाद इन ज्ञानदायी गलियारों और अपने निर्माताओं की ओर झाँकना तक ये लोग पाप समझते हैं।

इस प्रजाति के लोगों को अपने मर्यादाहीन कर्मों के लिए न कोई चिंता होती है, न कुछ पछतावा।

फिर इनके जैसे ही दूसरे लोग भी साथ मिल जाएं तब तो लगता है कि जैसे नंगों और भूखों का कोई कुंभ ही उमड़ आया हो, जिन्हें न कोई लज्जा आती है, न किसी प्रकार की शर्मं।

लाज और शरम दूसरों को आए तो आए, इन्हें क्या।

फिर सदियों से कहा जाता रहा है कि जो नंगा होकर नदी उतर गया, उसे काहे की शरम।

आजकल खूब सारे लोग नंगे होकर तटों पर मौज-मस्ती भी कर रहे हैं और नदी में उतर कर जलक्रीड़ाएँ भी। इन्हें कैसी शरम।

लाज तो उन लोगों को आनी चाहिए जो संस्कारों, अनुशासन और मर्यादाओं से बँधे हैं, जिन्हें पुरखों की आन-बान और शान बचाए रखनी है, समुदाय और राष्ट्र के लिए जीना मरना है।

बेशर्मों की संख्या बढ़ती ही चली जा रही है और बेशर्मी सारी हदें पार करती जा रही है। इन बेशर्मों को कोई कुछ न कहो, जो चाहे करने दो, देखते रहो सिर्फ। इन्हें दूसरों से क्या लेना-देना।

इन लोगों को हमेशा अपने स्वार्थ की पड़ी होती है और इसके लिए जिन रास्तों और सीढ़ियों का प्रयोग ये लोग करते रहते हैं वह अपने आप में कभी शोध का विषय होते हैं और कभी जिज्ञासा तृप्ति या फूहड़ मनोरंजन का।

आजकर सर्वत्र इन्हीं बेशर्म लोगों का फ्री-स्टाईल कल्चर हावी है। जिसे जहाँ मौका मिल रहा है वहाँ अपनी चला रहा है।

जो रोकने-टोकने वाला बीच में आ जाता है उसे हाशिये पर लाने के सारे गुर बेशर्मों के सम्प्रदाय में सिद्ध किए हुए रहते हैं।

अब तो लोग भी इनसे खौफ खाने लगे हैं। पता नहीं नंग-धड़गों और भूखों की जमात मिलकर कब कोई नया स्वाँग रच दे।

नंगों का क्या जाता है, ये तो पहले से ही नंगई पर उतर आएं हैं।

अब तो सभी तरफ इन भूखों-प्यासों और नंगों की जमात पाँव पसारने लगी है।

इस जमात में शामिल हर किसी नंग-धड़ंग और बेशर्म को पता है कि उनका रास्ता अपना कर वह सब कुछ जल्दी-जल्दी हासिल किया जा सकता है जिसे संस्कारों, मर्यादाओं और अनुशासन के दायरों में बंधे लोग ताजिन्दगी परिश्रम करके भी प्राप्त नहीं कर पाते।

बचकर हमें ही रहना है, बचाए रखें अपने कपड़ों को, कालिख का जमाना है। पता नहीं कोई सा नंगा पास आकर कीचड़ उछाल कर चला न जाए।

शर्म तो हमें ही करनी है, जंगलराज के हिमायती नंगे तो लाज-शरम की सारी जोखिमों से दूर हैं।

---000---

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

--

(ऊपर का चित्र - रूपा गोस्वामी की कलाकृति)

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget