बुधवार, 27 मई 2015

लघुकथा - कीमत


राकेश बाजिया

पूरे गांव में वो ही एक था , जो घोड़ी रखता था । गांव क्या आस -पास के गांवों में भी जो किसी के ब्याह शादी होती तो उसे जरूर शादी का कार्ड मिलता , उसकी घोड़ी किराये न करते तो भी उस तक कार्ड देकर जाते थे । क्या पता कब जरूरत पड़ जाये । एक दिन उसकी घोड़ी मर गयी । अब शादियां तो पहले की तरह ही होती थी पर उसके यहाँ कोई कार्ड नहीं देने आता । कुछ दिन बीते की उसने नयी घोड़ी खरीद ली । अब लोग फिर से आने लगे , एक बार कोई कार्ड लेकर आया तो उसने बड़े आराम से कहा..... भाई ऐसा करों कार्ड मुझे नहीं,..घोड़ी को ही दे आओ ।

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