शुक्रवार, 29 मई 2015

शासक अपनी मेहनत और ईमानदारी से धरती पर स्वर्ग बसा सकता है



रेनू सैनी
एक गणराज्य में शासक को पांच वर्ष के लिए चुना जाता था । ये चुनाव प्रजा तथा राज्य के उच्च अधिकारियों की सहमति से होते थे । इस चुनाव में सर्वश्रेष्ठ व योग्य व्यक्ति को ही शासक बनाया जाता था । जो व्यक्ति पांच वर्षों तक के लिए शासक बन जाता था, वह अपने शासनकाल में तमाम सुख भोगता था ।

हर तरह का ऐश्वर्य, सुख-सम्पत्ति उसके दास होते थे । पांच वर्षों के लिए विलासिता और ऐशो आराम पाकर हर शासक यह सोचता था कि संपूर्ण जीवन वह ऐसे ही सुख में बिताएगा, लेकिन पांच वर्षों के बाद उस शासक को गणराज्य के एक ऐसे निर्जन स्थान में छोड़ दिया जाता था जहां पर भोजन व पानी का नामोनिशान नहीं था । फलस्वरूप भूतपूर्व शासक भूख-प्यास से दम तोड़ देता था । इस गणराज्य का नियम था कि शासक यदि उस स्थान से वापिस गणराज्य में देखा गया तो उसे निमर्म तरीके से मौत के घाट उतार दिया जाएगा ।

गणराज्य की इस अजीबो-गरीब प्रथा से लोेग भयभीत हो गए थे । इसलिए अब वहां पर नवयुवक शासक बनने के लिए तैयार ही नहीं होते थे । इस बार जब गणराज्य में नया शासक चुनने की बारी आयी तो ऐसा ही हुआ । कोई भी युवक शासक बनने को तैयार न था । यह देखकर एक नवयुवक आदित्य आगे आया और बोला, ‘मैं गणराज्य का नया शासक बनने के लिए तैयार हूं । किंतु मैं इस राज्य में काम की तलाश में आया हूं । मैं यहां का निवासी नहीं हूं । यदि आपके नियम एक अपरिचित को शासक बनाने की आज्ञा देते हों तो मैं सहर्ष तैयार हूं ।’

 उच्च अधिकारी व प्रजा तो बेसब्री से नए शासक का इंतजार कर रहे थे । सभी ने आदित्य का नए राजा के रूप में स्वागत किया । आदित्य के शासक बनते ही हर तरह की सम्पत्ति व सुविधा उसके पास आ गई । लेकिन उसने भोगविलास में समय व्यर्थ नहीं गंवाया । सत्ता हाथ में आते ही उसने ऐसी व्यवस्था कि पूरे राज्य में कोई भी नंगा, भूखा व निर्धन नहीं रहा । उसने सभी के लिए मकान और जीविका के साधन उपलब्ध कराए । योग्य तथा सम्मानीय व्यक्तियों को उनकी योग्यातनुसार पद उपलब्ध कराए ।

समाज में अशांति उत्पन्न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की । सभी को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की । पांच वर्ष पूरे होने पर जब आदित्य के पद त्यागने की बारी आई तो प्रतिनिधियों व समूची जनता ने उसे ऐसा करने ही नहीं दिया और सर्वसम्मति से उसे अगले पांच वर्षों के लिए फिर से शासक बना दिया ।

इस प्रकार योग्य व गुणवान आदित्य ने न सिर्फ समूची जनता के दुख-दर्द दूर किए बल्कि उस जगह को भी उपजाऊ बना दिया जहां पर भूतपूर्व शासक अन्न व जल के अभाव में प्राण त्याग चुके थे । अब वहां फसलें लहलहाती थीं, जगह-जगह कुएं व बावड़ियों ने उस स्थान को रहने लायक बना दिया था । जनता ने वहां अपने घर बनाने शुरू कर दिए थे ।

  आदित्य ने अपनी चतुरता और काम करने के तरीके से उस गणराज्य में एक कुशल राजनीति की शुरूआत कर दी थी और सभी को यह बता दिया था कि कुशल राजनीति न सिर्फ गणराज्य को बदल सकती है बल्कि समूची जनता को मेहनती, ईमानदार और नेक बना सकती है ।
प्रत्येक देश अच्छी राजनीति के संसर्ग में ही फलता-फूलता है, उन्नति करता है । ईमानदार शासक अपनी मेहनत, ईमानदारी और योग्यता से धरती पर स्वर्ग बना सकता है ।

रेनू सैनी

खिड़की गांव,
मालवीय नगर,
नई दिल्ली-110017

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