शुक्रवार, 29 मई 2015

मन की शक्ति


रेनू सैनी
व्यक्ति का मन बगीचे की तरह होता है । मन को जितना अधिक स्वच्छ और सुंदर रखा जाए, वह उतना ही अधिक स्वस्थ और स्फूर्ति से भरपूर होता है । जिस प्रकार बगीचे की स्वच्छता, सुंदरता और हरियाली मन को तरोताजा और उत्साहित कर देती है, उसी प्रकार सकारात्मक भावनाओं के साथ निर्मल मन व्यक्ति के व्यक्तित्व को जीवंत कर देता है, उसे खूबसूरत, परोपकारी, करूणामय बना देता है ।

 मन के सात्विक भावों के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक बीमारियों पर भी काबू कर लेता है । कहते हैं कि पहले इंसान का मन बीमार होता है और फिर शरीर । मन उस समय बीमार होता है जब उसमें आध्यात्मिकता का लोप हो जाता है । लोग ईर्ष्यालु, झगड़ालू, लोभी और क्रोधी प्रवृत्तियों के कारण मानसिक रूप से बीमार होते हैं और फिर मन की कुत्सित प्रवृत्तियां शरीर पर नजर आने लगती हैं जिससे व्यक्ति बीमार हो जाता है । अध्यात्म के साथ शुद्ध व सात्विक प्रवृत्तियों वाला मन व्यक्ति के जीवन को सफल बनाता है । मन मस्तिष्क और पूरे शरीर को नियंत्रण में रखता है। जोस सिल्वा अपनी पुस्तक ‘यू द हीलर’ में लिखते हैं कि,‘मन मस्तिष्क को चलाता है और मस्तिष्क शरीर को । और इस तरह शरीर आदेश का पालन करता है । मस्तिष्क उपचार के लिए एक इन्द्रिय है । यह शरीर को चलाता है ।’

मस्तिष्क की न्यूरोन कोशिकाएं मन में उठने वाले विचारों के अनुसार कार्य करती हैं । यदि विचार और कार्य सकारात्मक होते हैं तो कोशिकाएं प्रफुल्ल्ति होकर काम को अंजाम देती हैं । इसके विपरीत मन में उठने वाले दूषित विचारों से कोशिकाएं मंद और सुस्त पड़ जाती हैं । इसी कारण मन में ईर्ष्या, परेशानी और तनाव उत्पन्न होता है जो शरीर को बीमार कर देता है । इसके विपरीत भी कई बार शरीर बीमार व अस्वस्थ हो जाता है । ऐसे में व्यक्ति को रोगों से घबराए बिना अपने मन को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए । मन में हमेशा स्वस्थ और प्रेरक विचारों से रोगों का सामना करना चाहिए । जब मन आध्यात्मिक रूप से सद्वृत्तियों के साथ आचरण करता है तो वह व्यक्ति के कार्य और लक्ष्य को भी ऊंचाई और सफलता के शीर्ष पर स्थापित कर देता है ।

सात्विक मन अत्यंत शक्तिशाली होता है । वह बड़ी से बड़ी परेशानी पर विजय पाने की क्षमता रखता है । अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के भाषाविद् जॉन ग्रिंडर तथा कम्प्यूटर विशेषज्ञ रिचर्ड बैंडलर द्वारा विकसित न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग कहती है कि, ‘मन की शक्ति के द्वारा ही हम शिक्षा, खेल-कूद, संगीत-नृत्य, उद्योग-व्यवसाय, व्यक्तित्व विकास तथा चिकित्सा एवं उपचार के क्षेत्र में असाधारण सफलता प्राप्त कर सकते हैं ।’ यही नहीं मन के द्वारा कैंसर और भयावह इलाज तक को ठीक किया जा सकता है ।

महान व्यक्तित्व नेल्सन मंडेला का 95 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हुआ । उन्होंने जीवन में अनेक कष्टों और संघर्षों का सामना किया । उन्होंने 27 साल जेल में बिताने के बाद विश्वस्तर पर सफलता प्राप्त की । ऐसा वह इसलिए कर पाए क्योंकि उन्होंने अपने मन को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया । मन अत्यंत बलशाली है । यदि सद्विचारों के साथ आगे बढ़ा जाए तो मन के द्वारा जीवन में व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होते हैं ।

 जेम्स एलेन ने अपनी पुस्तक ‘एस ए मैन थिंकेन’ में कहा भी है कि, ‘अच्छे विचार बीजों के अच्छे सकारात्मक व स्वास्थ्यप्रद तथा बुरे विचार बीजों के बुरे, नकारात्मक व घातक फल आपको वहन करने ही पड़ेंगे ।’ बचपन से ही बच्चों के अंदर नेक और सुंदर विचारों का समावेश करना चाहिए । इससे बच्चों के लक्ष्य और ज्ञान प्राप्ति को सुदृढ़ता प्राप्त होती है और वह अपने भावी जीवन की सही दिशा निर्धारित करते हैं ।

 इसलिए मन की शक्ति को अध्यात्म के साथ विकसित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि इंसान का जीवन कामयाब हो सके । अध्यात्म की नींव जितनी गहन होगी, मन उतना ही शुद्ध और पावस होगा । शुद्ध मन जीवन में कभी भी व्यक्ति को पराजय का मुंह नहीं देखने देगा । शुद्ध और सात्विक मन वाले व्यक्ति के लिए असफलता और पराजय क्षणिक होती है । ऐसा व्यक्ति जीवन के कष्टों और परेशानियों से घबराता नहीं है, बल्कि शिक्षा लेकर आगे बढ़ता है । अंत में व्यक्ति सभी चुनौतियों का सामना कर अपने जीवन और जन्म को सफल बनाता है । 


रेनू सैनी

खिड़की गांव,
मालवीय नगर,
नई दिल्ली-110017

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