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व्यंग्य - किला फतह आज भी करते हैं लोग !


सुदर्शन कुमार सोनी

’’किला फतह करना’’  शब्द आज भी प्रासंगिक है जबकि आज न तो कोई राजा महाराजा है और न ही कोई किला बनवाता है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग रोज किला फतह कर रहे है हमारा ध्यान इन पर भले ही न जा रहा हो !

अब आप पूछेंगे कौन रोज क्यों और कैसे किला फतह कर रहा है ?
हां यदि आप पेरेन्ट नहीं है तो आपको इसका भान नहीं होगा और यदि आप है तो हो सकता है कि आप भी किला फतह करने वालों में शामिल हो लेकिन आपको अपनी इस उपलब्धि के बारे में पता न हो।

बच्चे के बड़े होने के साथ ही आप इस किला फतह करने वाले क्लब में शामिल होते है। जब आप अपने बच्चे का एडमीशन अच्छे नर्सरी  स्कूल में कर लेते हैं तो यह आपका पहला किला फतह होता है ! फिर बच्चा और बडा़ हुआ तो एक अच्छे स्कूल के एंट्रेस टेस्ट में उसे उपस्थित करवा कर उसे पास करवा कर नियमित कक्षाओं में दाखिला करवा लेना आपका दूसरा किला फतह होता है । वैसे स्कूल वाले शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत आठवीं तक की कक्षाओं के लिये कोई प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं कर सकते है लेकिन कुछ स्कूल वाले जानते हुये भी इसे मानते नहीं हैं किला फतह करने के लिये पेरेन्टस् को मजबूर करते हैं।

अब आपका बच्चा यदि नौवीं कक्षा में पंहुच गया है और अब आप यदि और अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाना चाह रहे है तो यह एक और बडा़ किला फतह करने के समान है ! आप कितने भी बड़े तोपचंद या मिसाईल मैन हो आप स्कूल के टेस्ट में बच्चे को शराफत से बिठलवाकर उसे पास करवा कर एडमीशन करवा पाये तो यह एक और सबसे महत्वपूर्ण किला फतह करना होगा ! अब ये तो बात हुई अच्छे स्कूल में एडमीशन की अभी एक और महत्वपूर्ण किला फतह करना बाकी है ये है बच्चे को किसी अच्छे कोचिंग संस्थान में एडमीशन दिलवा लेना , क्योंकि यहां भी प्रवेश परीक्षा होती है ? इसे पेरेन्टस हल्के से नहीं लेना नहीं तो सबसे महत्वपूर्ण किला फतह करने से आप चूक जायेंगे! और गंगू की बात को गौर कीजियेगा आप सोसायटी में दीनहीन और मीन व्यक्ति हो जायेंगे जिसमें कोई कीन नहीं होगा। आपका जो होगा सो होगा परन्तु आप अपने बच्चे के बारे में तो सोचिये कि वह कितना हीन भावना से भरपूर हो जायेगा और चिंता में आपका मोटा ताजा बच्चा लीन हो जायेगा। याद रखिये किला फतह करना एक सीरिज में चलने वाली प्रक्रिया है जब तक कि आपका बच्चा कालेज में दाखिला न ले ले ।

मां बाप , आज अपने बच्चों के खातिर कदम कदम पर किला फतह कर रहे है। पहले का  सैनिक किला फतह करना तो गंगू आज के किला फतह से आसान मानता है । पहले जिसकी सेना और रणनीति मजबूत  रहती थी वह किला फतह कर लेता था लेकिन आज का किला फतह करना आसान नहीं है। आप बड़े पद पर हो सकते है , आप बड़े आदमी हो सकते है , आप बडे कलाकार हो सकते है , आप बड़े लेखक हो सकते है , आप बडे संगीतकार हो सकते है , आप बड़े खिलाड़ी हो सकते है  परन्तु यह सब आपके किसी काम का नहीं यदि आपने अपने बच्चे को अच्छे स्कूल और अच्छे कोचिंग संस्थान में एडमीशन नहीं करवा पाये तो आप कुछ भी नहीं और आपकी हस्ती भी इतनी सस्ती कि किसी काम की नहीं ।

अब जब किला फतह करना ही है तो इसके बारे में तैयारी भी अच्छी होनी चाहिये ताकि सफलता आपको मिले मतलब आपके बच्चे को मिले ! आप जब भी किसी शैक्षणिक संस्थान में किसी टेस्ट या दाखिले के काम से जाये तो कई बातों का ध्यान रखे जैसे आपकी ड्रेस अच्छी होनी चाहिये , डाढ़ी बगैरह बढी नहीं होना चाहिये । नहीं तो आपके बच्चे की बाढ़ यहां रूक सकती है और पत्नी साथ में हो तो साड़ी वगैरह अच्छी होनी चाहिये  !

आप अपराधी की तरह सिर झुकाकर संस्था के परिसर में बैठे रहे यदि कोई तीन चार घंटों में एक गिलास पानी के लिये भी नहीं पूछे तो बुरा न माने ! ये माने कि यह वह जोन है जहां आपका पद , पैसा , सम्मान , अकड़ , राजनीति में पकड़  कुछ भी काम नहीं आता है । यहां आपकी चौधराहट की कोई आहट तक नहीं सुनता है !  इस सब को घर में छोड़ कर आये, नहीं तो आप अपने बच्चे के बारे में सोच रहे , सपनों को घर छोड़ कर आये ।

 हां एक और बात को याद रखे कि जब किला फतह कर लिया हो तो जीत को हार में न बदले , यह कहकर कि किताबें स्कूल द्वारा बताये समय , दिन , स्थान और व्यक्ति से ही क्यों खरीदी जाये ? आपको क्या पता नहीं है कि स्कूल वालों का इससे इमोशनल अटेचमेंट होता है वे नहीं चाहते कि उनके प्रिय छा़त्र किसी उटपटांग दुकान से यह सब खरीदे ?

और हां यदि वे यूनिफार्म भी किसी एैसी दुकान से खरीदने कहे जिसने कि पहली बार ही ये काम शुरू किया हो तो माईंड नहीं करना है नहीं तो आपका किला फतह रिबाऊंड हो सकता है ! इसमें इस बात का भी कोई ध्यान रखने की जरूरत नहीं है कि मान लीजिये यदि आपकी बिटिया या बेटा कक्षा सात और कक्षा नौ के विद्यार्थी है और यूनिफार्म छोटी या बड़ी दे दी गई है तो यह भविष्य को देखकर ही किया गया होगा । बच्चे तेजी से बढ़ते है कि आपका मतलब स्टूडेन्ट के बाप का निकट भविष्य में ज्यादा नुकसान न हो तो बड़ी साईज की यूनिफार्म दे दी गई हो । यदि छोटी साईज की दे देी गई है तो यह भी भविष्य को ध्यान में रखकर ही दी गई होगी छोटे भाई बहन भी तो कल के दिन स्कूल जायेंगे ?

आपने अपने वार्डस के लिये इतने किला फतह किये है , आपके मन में कोई गिलाशिकवा नहीं होना चाहिये , कि स्कूल वालों ने आपको बेआबरू करके ही छोडा़ आपको लंबी रेस का घोडा़ मानकर खूब दौडा़या। बड़े लोगो के साथ एैसी छोटी छोटी घटनाएं होती रहती है । आपको तो इनका एहसानमंद होना चाहिये कि आपको झुकना सिखाया गया , नहीं तो जैसे तूफान में वृक्ष धराशायी हो जाते है और छोटे पेड़ साबुत बने रहते है तो आप भी जिंदगी के आनेवाले  तूफानों  में धराशायी नहीं होंगे । साबुत बने रहेंगे नहीं तो ताबूत में चले जाने का अंदेशा था !

गंगू तो कहता है कि हे भगवन अगले जन्म में मुझे किसी अच्छे स्कूल का मालिक या प्रिंसिपल बनाना या यहां का कुछ नहीं तो चपरासी ही बना देना कम से कम किला फतह करने में कुछ सपोर्ट तो मिल ही जायेगा ।

 सुदर्शन कुमार सोनी
डी-37 , चार ईमली
भोपाल , 462016
मोबाईल : 9425638352

Email: sudarshanksoni2004@yahoo.co.in
 Blog: meethadank.blogspot.in






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