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व्यंग्य - देश के लोग एक समय में एक ही काम करते हैं

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सुदर्शन कुमार सोनी

कहा जाता है कि एक समय में एक ही काम करो तो परिणाम अच्छे प्राप्त होते हैं। जैसे यदि खाना खा रहे है तो केवल इसे खाये टी वी वगैरह चालू कर समाचार या सीरियल न खाये मतलब न सुने। यदि सिनेमा देखने गये है तो केवल वही ध्यान लगाये और कहीं नहीं नहीं तो सिनेमा में मजा की जगह सजा महसूस होने लगेगी बेवकूफियों के पुलिंदे देखकर। यहां तो नौकरी व्यापार का ध्यान या चिंता छोड़ दे नहीं तो चिंता चिता की ओर आपको अग्रसर कर देगी ऐसा स्याने लोग कहते हैं। और जब ध्यान कर रहे हो तो केवल ध्यान पर ही ध्यान हो और कहीं नहीं। स्नान कर रहे हो तो अच्छे से स्नान ही करे और कुछ नहीं।

देश के लोग भी एक समय में एक काम करते हैं लगता है 'आर्ट आफ लिविंग' के इस सिद्धांत को देश के सभी लोग अच्छे से जानते हैं गंगू ने शुकुल जी से चाय की चुस्कियों के बीच कहा दोनों 'चिंतन रेस्तरां' में चाय पीने आये थे।

शुकुल जी बोले कैसे ?

देखिये अभी सभी लोग एक ही काम में लगे है ?

कौन से एक काम में हर आदमी अलग अलग काम कर रहा है शुकुल जी ने प्रति प्रश्न किया ?

गंगू बोला , हाथ में अखबार लिये हो , उसे पढ़ भी डाला है , फिर भी कह रहे हो कि हर आदमी एक काम नहीं कर रहा है ? इस समय हर आदमी आम और खास पीएम साहब को सलाह दे रहा है ईमानदारी का , बोल्ड होने का , सिद्ध करने का तो यह सिद्ध नहीं हो गया कि देश का हर आम और खास इस समय एक ही काम में लगा है सलाह रूपी बाम लेकर सुबह शाम घूम रहा है ! यह सुनकर शुकुल जी खोपड़ी खुजाने में लग गये थे। गंगू समझ गया था कि बात हिट हो गई है।

गंगू बोला यहां तो झोंका आता है एक ही काम करने का और सभी लोग एक ही काम करने लगते हैं। इसके पहले सभी लोग टू जी स्पेक्ट्रम के विश्लेषण में लगे थे। इतना विश्लेषण कर डाला कि कुछ शोघार्थी इस पर अपनी पीएच.डी. का जुगाड़ देखने लगे , न कहो कि एकाध ने कही पंजीयन करवा डाला हो। वैसे भी पीएच.डी. आजकल किसी भी विषय पर हो सकती है ? यह आपको अटपटा लग सकता हॅै परन्तु करने वाले के लिये तो गौरव की बात है , नवाचार का जमाना है। देखो न यूके में एक छा़त्रा ने जबलपुर के ''श्याम बैण्ड'' पर पीएच.डी. कर डाली है , तो एक ने महानायक अमिताभ बच्चन पर पीएच.डी. की हेै।

शुकुल जी इसके पहले लोग रक्षा क्षेत्र का काम कर रहे थे , जैसे कि अनिवार्य मिलेटरी ट्रेनिंग के अपने दायित्व को पूरा कर रहे हो ! हर आदमी ट्रेटा ट्रक के बारे में विश्लेषण कर रहा था। इतना तो 'भारत अर्थ मूवसर्' ने भी नहीं किया होगा। अब उन्हें मलाल हो रहा होगा कि पहले यदि विवाद खडा़ करवा देते तो और ज्यादा अच्छा माडल निकल कर सामने आता ? क्योंकि देश के लोग एक साथ एक काम में लग जाते हैं तो कुछ न कुछ नया आता ही है।

अभी कुछ ही दिनों पहले सब लोग एक ही काम महंगाई को कोसने में लगे थे। यह पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से उपजी महंगाई थी , यह साल में दो बार यानी छै माही आती है और फिर देश के लोग एक काम एक साथ करने लग जाते हैं। कंपनियां कहती है कि उसे ये दाम बढा़ने के बाद भी घाटा होगा ! तो हम नहीं मानते। हमारा तो कहना है कि जब जूते चप्पल वाले बाटा को कभी यहां घाटा नहीं हुआ तो ये एकाधिकार वाली आयल कंपनियां क्यों हमें हर बार बेवकूफ बनाने की कोशिश करती रहती है। हां इस समय पुतला बनाने वालों को तो महंगाई से कम से कम राहत मिल जाती है उन्हें हर शहर में टेम्पररी ही सही कुछ काम मिल जाता है।

एक और काम देश के लोग एक साथ करते हैं गंगू बोला।

कौन सा ? शुकुल जी बोले।

कोई धमाका हुआ तो फिर सुरक्षा एजेन्सियों की चूक पर टीका टिप्पणी एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर सब करते हैं। ये निंदा की भूख है चूक को टारगेट बनाकर अपना काम करती है। देश के लोग पक्के अनुशासन प्रिय है , कौन कहता है कि अंग्रेजों की अच्छी चीजें हमने नहीं सीखी। अनुशासित होना नहीं सीखते तो सब एक साथ एक काम कैसे करते होते।

शुकुल जी बोले , लगता है गंगू तुम सही कह रहे हो चूक से ही रेल दुर्घटना हो जाती है। इसके होने पर भी तो कोरस में लोग एक काम एक साथ करने लगते हैं , कोसने का। भले ही इससे राहत कार्यों में बाधा पहुंच रही हो घायल अधमरे फंसे लोगों को निकालने में दिक्कत हो रही हो ? लेकिन हमारे कोरस में कोसने के काम में बाधा नहीं पहुंचना चाहिये। अरे जो सलाह अभी दे रहे हो वो पहले कहां थी और नौ साल से किराया नहीं बढा़ और जिसने बढा़या उसके पीछे एक काम एक समय में करने में लग गये। पहले सलाह कहां से आयेगी देश के लोग 'एक समय में एक काम करते हैं' न।

एक समय याद करो पूरा देश बोफोर्स के फोर्स के प्रभाव में था। हर आदमी इसका विश्लेषण अपने अपने हिसाब से करता था। बाद में कारगिल वार में जरूर बोफोर्स ने जब अपना फोर्स दिखाया तो ये लोग शर्मिंदा हुये थे। शायद ये हमारी पुरातन आदत है कि 'एक समय में हम एक काम साथ साथ करते हैं'। आज ही देखो देश के लोग जिनके पास मोबाईल ज्यादा है शौचालय कम है। दो टायलेट की कीमत पैंतीस लाख रूपये पर ही बात कर रहे है सब एक साथ एक काम कर रहे है !

चलो गंगू ऐसा करते हैं कि 'सब लोग एक काम एक समय में करते हैं' इस चर्चा को विराम देने के लिये हम दोनों एक काम एक साथ करते हैं , तुम अपने ठिकाने पर जाओ , और मैं अपने ठिकाने पर जाता हूं।

 

सुदर्शन कुमार सोनी

डी-37 , चार ईमली

भोपाल , 462016

मोबाईल : 9425638352

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