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जय राणा प्रताप की

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दीपक आचार्य

परंपरा से हम प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप महान का स्मरण विशिष्ट अवसरों पर करते रहे हैं।

शौर्य और पराक्रम से भरे रहने के लिए जोर-जोर से उद्घोष भी लगाते रहते हैं - जय शिवा सरदार की, जय राणा प्रताप की।

और महाराणा प्रताप जयन्ती पर अपने पूरे उल्लास के साथ धूमधड़ाकों में रमे रहते हैं, उनका पावन स्मरण करते हैं, उनके व्यक्तित्व और कार्यों का बखान करते हैं और गौरव तथा गर्व से अभिभूत होकर इस दिन को धन्य करते हैं।

हम सभी पूरी ईमानदारी से इस बात का चिंतन करें कि जिन महाराणा प्रताप का स्मरण करते हुए हम समाज और देश के लिए जीने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, संकल्प लेते हैं, भाषण झाड़ते हैं, उनके उपदेशों पर चलने की बातें करते हैं, क्या उनमें से किसी एक पर भी साल भर में कोई अमल कर पाये हैं अब तक पाये हैं।

इसका जवाब दे पाने की स्थिति में हम अपने आपको कभी नहीं पाते। पाएं भी कैसे, हम सिर्र्फ बड़ी-बड़ी बातें ही करना जानते हैं, कुछ करने का माद्दा तो हमारे पुरखों में ही देखने को मिलता था, अब कहाँ?

हमने अपने संकल्पों, सामाजिक सरोकारों और देश के प्रति भावनाओं को कुछ उत्सवी आयोजनों तक सिमट कर रख दिया है। एक-दो दिन हम याद करते हैं फिर भूल जाते हैं।

भूलना भारतीय जनमानस की वह दुर्भाग्यपूर्ण बुराई है जिसके कारण हम गुलामी भुगतते रहे, अपने पर अत्याचार ढाने वाले विधर्मियों के क्रूर कर्मों, राष्ट्रभक्षी करतूतों आदि को भूल गए और इसका खामियाजा आज तक और अब भी समाज और देश को भुगतना पड़ रहा है।

हम स्वाधीनता और विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन असल में हम कितने स्वाधीन रह गए हैं, इस बारे में किसी को बताने की कोई जरूरत नहीं है, हम सभी के भीतर लहरा रहा आत्मग्लानि और कायरता का ज्वार इस सब को बयाँ करने के लिए काफी है।

महाराणा प्रताप ने विधर्मियों से मुक्ति और सनातन स्वतंत्रता के लिए ही अवतार लिया था और उसी लक्ष्य को लेकर जीवन होम दिया।

परवर्ती काल में हम कितने गिरते चले गए, इसे कहना-सुनना भी लज्जित कर देने वाला ही है।

महाराणा प्रताप आज के भारतवर्ष को देखते तो उन्हें ही शायद सर्वाधिक पीड़ा होती और तब उनके क्या उद्गार हमारे लिए होते, इसकी कल्पना हम सभी को करनी चाहिए।

आज हमने समाज और राष्ट्र की बजाय खुद को ही संप्रभु इकाई मान लिया है और हम जो कुछ कर रहे हैं वह सिर्फ  अपने ही अपने लिए कर रहे हैं, समाज और देश की हमें कोई चिन्ता नहीं है। अपने आपको हर कहीं स्थापित करने के लिए हमने जाने कितनी दीवारें खड़ी कर रखी हैं, भगवान ही जाने।

हम अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए कुटिल चालों, प्रलोभनों और धर्महीन स्वेच्छाचारी लोगों की सेवा-सुश्रुषा में रमे हुए हैं, उनकी चाकरी करने लगे हैं और अपने आपको बुलंदियां दिलाने भर के लिए वह सब कुछ करने लगे हैं जिसे अशोभनीय ही कहा गया है।

महाराणा प्रताप की कही दो-चार बातें की हमने अंगीकार कर ली होती तो आज साल भर महाराणा प्रताप अपने उपदेशों और अनुकरणीय कार्यशैली के रूप में हमारे बीच होते और राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और विकास के नए वैश्विक मानदण्ड हमारे सामने होते।

पर हमने अपने आपको खुद के लिए पैदा होना मान लिया, खुद का ही घर भरने का लक्ष्य बना लिया। संगठन, समुदाय और देश को भुला दिया।

आज हम समाज और देश के लिए कितनी ही बड़ी-बड़ी डींगे हाँक लें, तालियाँ बटोर लें, जब तक महाराणा प्रताप हमारे दिल और दिमाग में नहीं होंगे, उनके संगठन-सूत्र और लोकमंगल के लक्ष्य हमारे सामने नहीं होंगे, तब तक इन उत्सवी आयोजनों का कोई मूल्य नहीं है।

आज हमारी नई पीढ़ी महाराणा प्रताप के सर्वांग व्यक्तित्व और कर्तृत्व के बारे में जानकारी के अभाव के दौर से गुजर रही हैं।

हमारे परंपरागत गौरव को मिटाने के लिए सदियों से बहुत कुछ किया जा रहा है और हम हैं कि जड़ मूर्ख बने हुए सब कुछ चुपचाप देख रहे हैं।

हमें अपने पद, प्रतिष्ठा और पैसों से ही मतलब रह गया है। खुद को बड़ा दिखाने के लिए हमने अपने आपको इतना नीचे गिरा दिया है कि कुछ कहा नहीं जा सकता।

जिनके खिलाफ महाराणा प्रताप ने लड़ाई लड़ी, उन लोगों और विषयों को दरकिनार कर हम जो कुछ कर रहे हैं, वह समाज और देश के लिए गद्दारी ही कही जा सकती है।

महाराणा प्रताप के बारे में सर्वत्र अधिकाधिक साहित्य को प्रचारित-प्रसारित करने, उनकी जीवनी को पाठ्यक्रमों में पूर्णता के साथ शामिल करने, आम जन के लिए सुबोध और सरल भाषा शैली में पत्रकों व लघु पुस्तिकाओं के माध्यम से व्यापक प्रचार का बीड़ा उठाने और महाराणा प्रताप के नाम पर हर साल कोई न कोई दो-चार अच्छी बातों को अभियान के रूप में जन-जन तक पहुंचाने व संकल्प लेने की आवश्यकता है।

महाराणा प्रताप प्रत्येक नागरिक, समुदाय और देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं जिनकी एकाध सीख भी हम अंगीकार कर पाएं तो समाज और देश ही नहीं दुनिया का भला कर पाने योग्य अपने आप को पा सकते हैं।

हिन्दुआँ सूरज प्रातःस्मरणीय महाराणा प्रताप जयन्ती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

आईये महाराणा प्रताप जयन्ती से ‘संघे शक्ति कलौयुगे’ का संकल्प लें। देश को बहुविध व परिपूर्ण स्वतंत्रता से रूबरू कराने में भागीदार बनें।

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- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

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